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दिवाली रोशनी, खुशियों और ढेर सारी खरीदारी का त्योहार है. इस समय हर कोई अपने घर को सजाने, नए कपड़े खरीदने, उपहार देने और स्वादिष्ट पकवान बनाने में लगा रहता है. लेकिन, इस फेस्टिवल के जोश में अक्सर हम अपनी जेब का ध्यान रखना भूल जाते हैं. नतीजतन, दिवाली के बाद क्रेडिट कार्ड का बिल और खाली बैंक बैलेंस साल के अंत की खुशियों पर पानी फेर देता है. इससे बचने के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप दिवाली शॉपिंग से पहले एक स्मार्ट बजट प्लान बनाएं. कैसे? आइए बताते हैं-
हर खर्च के लिए अलग लिमिट सेट करें जैसे- कपड़े ₹10,000, गिफ्ट ₹5,000, घर की सजावट ₹3,000 वगैरह.इससे आप समझ पाएंगे कि कुल खर्च आपकी इनकम या सेविंग से कितना मेल खाता है. कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फेस्टिव सीजन में टोटल खर्च आपकी मासिक इनकम के 30% से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग में डिस्काउंट और रिवॉर्ड पॉइंट्स जरूर मिलते हैं, लेकिन बिना लिमिट के खर्च बड़ी गलती साबित हो सकता है. कोशिश करें कि कार्ड लिमिट का 30-40% से ज्यादा खर्च न करें. इससे आपका क्रेडिट स्कोर भी अच्छा रहेगा और बिल भरना भी आसान होगा. अगर कई कार्ड हैं, तो खर्च एक पर फोकस करें ताकि ट्रैकिंग आसान रहे.
फेस्टिव सीजन में “50% OFF” या “Buy 1 Get 1” जैसे ऑफर्स आकर्षक लगते हैं, लेकिन कई बार ये ट्रैप साबित होते हैं. कोई भी चीज सिर्फ डिस्काउंट देखकर न खरीदें. जांचें कि वो प्रोडक्ट सच में जरूरत का है या सिर्फ ऑफर देखकर मन ललचा रहा है. रिसर्च से पता चलता है कि 65% भारतीय फेस्टिव ऑफर्स के दौरान ऐसे सामान खरीदते हैं जो उन्हें असल में जरूरत नहीं होती.
दिवाली के समय ई-कॉमर्स साइट्स EMI और BNPL (Buy Now Pay Later) स्कीम्स देती हैं. ये मददगार हैं, लेकिन तभी जब आप इन्हें प्लानिंग के साथ इस्तेमाल करें. केवल 0% EMI वाले ऑप्शन चुनें. अगर इंटरेस्ट लग रहा है, तो वो आपकी पॉकेट पर भारी पड़ेगा.
जहां संभव हो, डेबिट कार्ड या UPI से भुगतान करें. ये आपके खर्च को रियल टाइम में कंट्रोल करता है क्योंकि पैसा सीधे अकाउंट से कटता है. क्रेडिट कार्ड से खर्च करते वक्त “अभी के मजे” का एहसास होता है, लेकिन “बाद की चिंता” बढ़ जाती है. बेहतर होगा अगर आप एक अलग “Festive Wallet” या अकाउंट बना लें जिसमें सिर्फ शॉपिंग बजट का पैसा रखें.
छोटे-छोटे खर्च सबसे बड़ा बजट तोड़ते हैं. किसी नोटबुक, गूगल शीट या ऐप में हर ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड करें. इससे आपको साफ दिखेगा कि कहां जरूरत से ज्यादा खर्च हुआ है. कई बैंकिंग ऐप अब spending tracker फीचर देते हैं, उसका फायदा उठाएं.
शॉपिंग खत्म होने के बाद देखें कि कहां खर्च प्लान के मुताबिक हुआ और कहां ओवरस्पेंड. इससे आप अगले साल के लिए बेहतर फाइनेंशियल डिसिप्लिन बना पाएंगे. अगर क्रेडिट कार्ड बिल बढ़ गया है, तो कंसॉलिडेट लोन या बैलेंस ट्रांसफर जैसे ऑप्शन भी देखें ताकि ब्याज का बोझ कम हो.
अगर EMI पर ब्याज 0% है, तो नहीं. लेकिन इंटरेस्ट वाला EMI लोन आपकी जेब पर भारी पड़ता है.
नहीं, पर्सनल शॉपिंग या गिफ्टिंग पर कोई टैक्स बेनिफिट नहीं होता.
हां, अगर आप बिल समय पर चुकाते हैं तो रिवॉर्ड्स आपके लिए रियल सेविंग बन सकते हैं.
नहीं, जब तक बहुत जरूरी न हो. ये फ्यूचर EMI बोझ बढ़ा देता है.