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पूरे देश में सूर्य देव की उपासना का महान पर्व, चार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा, इस समय पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाई जा रही है. ये त्योहार सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि ये आस्था, स्वच्छता (सफाई), संयम और अपनी चीज़ों (स्वदेशी) के इस्तेमाल का एक अनोखा मेल है. कभी छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार का त्योहार माना जाता था, लेकिन अब ये पूरे देश में फैल चुका है. देश के करीब 15 करोड़ श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष इस चार दिवसीय पर्व में व्रत, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने के पारंपरिक रिवाजों में शामिल हो रहे हैं. ये पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें डूबते और उगते, दोनों ही सूर्य की पूजा की जाती है, जो भारतीय संस्कृति की समावेशी (सबको साथ लेकर चलने वाली) भावना को दिखाता है.
छठ पूजा सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि ये देश की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा सहारा देती है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस साल छठ पूजा के मौके पर देशभर में लगभग ₹38,000 करोड़ रुपये का बड़ा व्यापार होने का अनुमान है. ये आंकड़ा बताता है कि छठ पर्व का व्यापार हर साल तेज़ी से बढ़ रहा है. पिछले साल ये कारोबार लगभग ₹31,000 करोड़ रुपये का था, और 2023 में ये लगभग ₹27,000 करोड़ रुपये था. इससे साफ पता चलता है कि हर साल इस पर्व से होने वाले व्यापार में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है. राजधानी दिल्ली में भी छठ पूजा पर बड़ा व्यापार होने की उम्मीद है. दिल्ली में ये आंकड़ा 6 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो पूर्वांचली समुदाय की बड़ी संख्या और उनकी खरीदारी की शक्ति को दर्शाता है.
छठ पूजा से देशभर में अनुमानित व्यापार का तुलनात्मक विवरण (CAIT के अनुसार)
छठ पूजा अब सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं है. देश के कई राज्यों में ये त्योहार बड़ी भव्यता से मनाया जाता है. इनमें प्रमुख हैं: बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र, विदर्भ, मध्य प्रदेश. इसके अलावा, देश के जिन भी हिस्सों में काम-काज के लिए पूर्वांचली समुदाय के लोग बसे हुए हैं, वे सभी पूरी श्रद्धा से इस पूजा में शामिल हो रहे हैं.
दिल्ली, जहां बड़ी संख्या में पूर्वांचली समुदाय रहता है, वहां छठ पूजा बेहद धूमधाम से मनाई जा रही है. दिल्ली सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, जिसके तहत लगभग 1500 घाटों का निर्माण किया गया है. यमुना घाट, वासुदेव घाट, लाल बाग, मुनक नहर, कालिंदी कुंज, वज़ीराबाद, मजनूं का टीला, गीता कॉलोनी जैसे दिल्ली के प्रमुख घाटों पर लाखों श्रद्धालु पहुंचकर अर्घ्य देंगे.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और दिल्ली चांदनी चौक से सांसद, श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि छठ पूजा से जुड़े व्यापार में स्वदेशी यानी स्थानीय उत्पादों की बिक्री सबसे ज्यादा होती है. ये खरीदारी सीधे तौर पर छोटे व्यापारियों
और कारीगरों को फायदा पहुंचाती है.
श्री खंडेलवाल ने कहा कि छठ पूजा में इस्तेमाल होने वाली ज़्यादातर चीज़ें स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों द्वारा बनाई जाती हैं. इससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होते हैं और देश के कुटीर उद्योग को मज़बूती मिलती है. उन्होंने जोर दिया कि इस पर्व पर स्वदेशी उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को बल मिलता है.
दिल्ली के प्रमुख बाज़ार, जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, मॉडल टाउन, अशोक विहार, पीतमपुरा, उत्तम नगर, पश्चिम विहार, तिलक नगर, लक्ष्मी नगर, शाहदरा, बुराड़ी, लाजपतनगर और सरोजिनी नगर, आज भारी भीड़ से गुलज़ार हैं. श्रद्धालु छठ पूजा की पारंपरिक सामग्री खरीदने में व्यस्त हैं. श्री खंडेलवाल के अनुसार, छठ पूजा केवल धार्मिक आस्था नहीं है, बल्कि ये स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, आत्मसंयम और सामाजिक एकता का पर्व है. ये पर्व भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है.
A1: कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, इस वर्ष छठ पूजा के अवसर पर देशभर में लगभग ₹38,000 करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है.
A2: पिछले वर्ष ये आंकड़ा लगभग ₹31,000 करोड़ रुपये था और 2023 में लगभग ₹27,000 करोड़ रुपये था, जिससे व्यापार में हर साल उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.
A3: दिल्ली में छठ पूजा पर लगभग 6 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार होने की उम्मीद है.
A4: छठ पूजा में स्थानीय और हस्तनिर्मित स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी बड़े पैमाने पर होती है, जिससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को बल मिलता है.
A5: दिल्ली सरकार द्वारा इस वर्ष छठ पूजा के लिए लगभग 1500 घाटों का निर्माण किया गया है.
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