Inverter Battery Maintenance: गर्मियों में लोड शेडिंग और पावर कट में इन्वर्टर की काफी ज्यादा जरूरत होती है. ऐसे में जरूरी है कि इन्वर्टर की बैटरी में सही वक्त में पानी डाला जाए.
1/6गर्मियों के मौसम में बिजली की कटौती, लोड शेडिंग एक आम समस्या है. यही वजह है कि एसी और कूलर के बाद इन्वर्टर गर्मियों में से सबसे अहम जरूरत बन जाता है.
2/6गर्मियों में इन्वर्टर की सही सर्विसिंग और सही टाइम में बैटरी में पानी डालने से इसकी लाइफ बढ़ जाती है. हालांकि, इन्वर्टर में कब पानी डालना चाहिए, इसकी टाइमिंग लोगों को पता नहीं होती है.
3/6इन्वर्टर की बैटरी में पानी न बदलने से बैटरी सूखने लगती है. इससे परफॉर्मेंस भी कमजोर होती है. इससे साफ है कि बैकअप कम और चार्जिंग भी धीमी हो जाती है.
4/6आपके इलाके में यदि लाइट कम जाती है और इन्वर्टर की जरूरत बहुत कम होती है तो हर 2 से 3 महीने में एख बार बैटरी का पानी का चेक करके उसे भरने की जरूरत है.
5/6आपके एरिया में यदि ज्यादा पावर कट होता है तो 1 से डेढ़ महीने के अंदर बैटरी के पानी के लेवल को चेक करना चाहिए. आपको बता दें कि हर बैटरी में ये अलग-अलग होती है. ऐसे में मैन्युअल को जरूर पढ़ लें.
6/6गौरतलब है कि बैटरी में Minimum और Maximum का लेवल होता है. यदि पानी मिनिमम से नीचे चले जाए तो तुरंत रीफिल कर दें. पानी को मिनिमम और मैक्सिमम के बीच में रखना चाहिए.