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भारत हमेशा से दूसरे देशों से डिवाइस असेंबल करता रहा है, यानी चीज़ों को जोड़कर उत्पाद बनाना. लेकिन अब हम इससे आगे बढ़ रहे हैं! हमारी सरकार का कहना है कि भारत अब खुद ही एडवांस्ड डिज़ाइन और चिप बनाने की ओर बढ़ रहा है. आने वाले समय में 2 नैनोमीटर (nm) चिप का उत्पादन भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.
2nm चिप का मतलब है एक बहुत ही छोटी और शक्तिशाली चिप. इसे ऐसे समझिए कि एक बाल जितना पतला होता है, उससे भी कई गुना छोटा. जितनी छोटी चिप होती है, उतनी ही ज़्यादा चीज़ें उसमें फिट हो सकती हैं और वह उतनी ही तेज़ी से काम कर सकती है.
हाल ही में, हमारे केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में एआरएम (ARM) के नए सेमीकंडक्टर डिज़ाइन ऑफिस का उद्घाटन किया. ये ऑफिस अगली पीढ़ी की 2 नैनोमीटर चिप टेक्नोलॉजी पर काम करेगा, जो भारत के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है.
भारत सरकार 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत चिप बनाने के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है. अब तक, छह राज्यों में कुल 10 परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली है, जिसमें 1.6 लाख करोड़ रुपए का भारी-भरकम निवेश किया गया है. सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (चिप बनाने से जुड़ी सभी चीज़ों का तंत्र) को मज़बूत करने के लिए इस मिशन में 76,000 करोड़ रुपए का प्रावधान है.
मई 2025 में, केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने नोएडा और बेंगलुरु में दो अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन सेंटर का उद्घाटन किया था. ये भारत के पहले ऐसे सेंटर हैं जो 3-नैनोमीटर चिप डिज़ाइन पर केंद्रित हैं.
मंत्री जी ने बताया कि भारत ने पहले 7nm और 5nm डिज़ाइन हासिल कर लिए थे, लेकिन 3nm तक पहुंचना इनोवेशन में एक नया मोड़ था. और अब, हम 2nm चिप तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं. ये दिखाता है कि भारत कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.
पूरी दुनिया में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री (चिप उद्योग) के 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 82 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, भारत का घरेलू बाज़ार भी 2030 तक 100-110 बिलियन डॉलर (लगभग 8.2 से 9 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने की उम्मीद है. ये भारत के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक अवसर है.
स्टार्टअप का योगदान: 'डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना' के तहत घरेलू स्टार्टअप्स को चिप डिज़ाइन में मदद मिल रही है. अब तक कम से कम 23 चिप डिज़ाइन परियोजनाओं को मंज़ूरी मिली है और 72 कंपनियां एडवांस्ड डिज़ाइन टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं.
छात्रों का इनोवेशन: छात्र भी इस क्षेत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. 25 संस्थानों की टीमों ने 28 चिप्स का टेप आउट (चिप डिज़ाइन को अंतिम रूप देना) किया है.
प्रतिभा का निर्माण: लगभग 278 संस्थान और विश्वविद्यालय सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और रिसर्च में लगे हुए हैं, जिससे प्रतिभाशाली लोगों का एक बड़ा समूह बन रहा है जो भविष्य में इस उद्योग को आगे बढ़ाएगा.
संक्षेप में कहें तो, भारत में 2nm चिप का उत्पादन सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि ये आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास और भविष्य के लिए एक मज़बूत नींव रखने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है. ये हमारे देश को वैश्विक तकनीक के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा.
2nm चिप का मतलब 2 नैनोमीटर की तकनीक पर बनी हुई चिप. नैनोमीटर चिप के अंदर के छोटे-छोटे घटकों का आकार बताता है. जितनी कम संख्या होती है, चिप उतनी ही छोटी, तेज़ और बिजली बचाने वाली होती है.
ये भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा. हमें उन्नत चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. ये हमें AI, 5G और अन्य उन्नत तकनीकों में नेतृत्व करने में मदद करेगा.
ये भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है. इसमें निवेश, प्रोत्साहन और प्रतिभा विकास शामिल है.
ये एक सरकारी योजना है जो भारतीय स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs) और कंपनियों को सेमीकंडक्टर डिज़ाइन और उत्पादन में मदद करती है. इसका उद्देश्य घरेलू डिज़ाइन क्षमताओं को बढ़ाना है.
इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से अगली पीढ़ी के स्मार्टफोन, हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग (HPC), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम, डेटा सेंटर, सैन्य उपकरण और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में होगा.
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