भारत कैसे बन रहा है टेक सुपरपावर? बेंगलुरु और हैदराबाद हैं पहली पसंद- पढ़ें पूरी रिपोर्ट

कंपनी की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के छह बड़े शहर पहले से ही एशिया में टेक टैलेंट (तकनीकी प्रतिभा) को काम पर रखने के लिए टॉप 10 की लिस्ट में हैं. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
भारत कैसे बन रहा है टेक सुपरपावर? बेंगलुरु और हैदराबाद हैं पहली पसंद- पढ़ें पूरी रिपोर्ट

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025 तक टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया के टॉप 10 बाजारों में शामिल हो जाएगा. इसकी सबसे बड़ी वजह भारत में मौजूद Skilled और Talented लोग हैं. 'कोलियर्स' नाम की एक कंपनी की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के छह बड़े शहर पहले से ही एशिया में टेक टैलेंट (तकनीकी प्रतिभा) को काम पर रखने के लिए टॉप 10 की लिस्ट में हैं.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पूरी दुनिया में एशिया तकनीकी प्रतिभा का एक बड़ा केंद्र बन रहा है. दुनिया के टॉप 10 टेक हब में से तीन एशिया में हैं - भारत का बेंगलुरु, जापान का टोक्यो और चीन का बीजिंग.

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास कुशल लोगों की कोई कमी नहीं है, जिससे ये दुनिया भर की कंपनियों के लिए एक पसंदीदा जगह बन गया है.

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2025 तक भारत बनेगा टॉप 10 टेक मार्केट

कोलियर्स की एक रिपोर्ट ने ये अनुमान लगाया है कि भारत जल्द ही दुनिया के टॉप 10 तकनीकी बाजारों में अपनी जगह बना लेगा. इसकी मुख्य वजह देश के टियर-1 और टियर-2 शहरों में कुशल लोगों की बड़ी संख्या और रोजगार के अच्छे अवसर हैं.

बेंगलुरु और हैदराबाद हैं पहली पसंद

रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु और हैदराबाद भारत में टेक्नोलॉजी कंपनियों की पहली पसंद बने हुए हैं. एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुल टेक टैलेंट में से 69% अकेले भारत में है. ये दोनों शहर ऑफिस स्पेस किराए पर लेने में भी सबसे आगे हैं. अनुमान है कि 2025 की पहली छमाही तक, ऑफिस स्पेस की लगभग 50% मांग इन्हीं दो शहरों से आएगी.

ऑफिस स्पेस की भारी मांग

भारत में अच्छी क्वालिटी वाले ऑफिस स्पेस, मजबूत आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और कम लागत की वजह से बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियां येां आ रही हैं. 2025 की पहली छमाही में, टेक कंपनियों ने देश के सात बड़े शहरों में 1 करोड़ वर्ग फुट से ज्यादा ऑफिस स्पेस किराए पर लिया है. इसमें रेगुलर और फ्लेक्सिबल (को-वर्किंग) दोनों तरह के स्पेस शामिल हैं.

क्या हैं GCCs और क्यों आ रही हैं भारत?

भारत की इस ग्रोथ में 'वैश्विक क्षमता केंद्रों' (Global Capability Centers - GCCs) का बड़ा हाथ है. ये बड़ी-बड़ी विदेशी कंपनियों के अपने ऑफिस होते हैं, जो अब सिर्फ बैक-ऑफिस काम नहीं करते, बल्कि इनोवेशन और रिसर्च के बड़े सेंटर बन रहे हैं. टेक कंपनियों के GCCs ने ही कुल लीजिंग में 41% (लगभग 52 लाख वर्ग फुट) का योगदान दिया, जिसमें से 85% हिस्सेदारी बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद की रही.

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