भारत बनेगा दुनिया का नया सेमीकंडक्टर चिप हब, 85 हजार इंजीनियरों की फौज हो रही तैयार! पढ़िए क्या है सरकार का नया प्लान?

भारत अब दुनिया का चिप हब बनने की राह पर है. Chips to Startups (C2S) स्कीम के तहत 85,000 इंजीनियरों को ट्रेनिंग दी जा रही है. जानिए अश्विनी वैष्णव ने क्या बड़े एलान किए.
भारत बनेगा दुनिया का नया सेमीकंडक्टर चिप हब, 85 हजार इंजीनियरों की फौज हो रही तैयार! पढ़िए क्या है सरकार का नया प्लान?

भारत बनेगा दुनिया का नया सेमीकंडक्टर चिप हब. (Image Source- Zee Business)

आने वाला समय डेटा और तकनीक का है और इस तकनीक का दिल है 'सेमीकंडक्टर चिप'. भारत ने इस ग्लोबल रेस में खुद को सबसे आगे खड़ा करने के लिए कमर कस ली है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़ी खुशखबरी साझा की है कि भारत अपने 10 साल के लक्ष्य यानी 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को तैयार करने की दिशा में उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है.

यह सिर्फ एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य का रास्ता है. कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से असम तक, देश का हर कोना अब चिप डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग की गूंज सुन रहा है. सरकार का मिशन साफ है- भारत को दुनिया का सेमीकंडक्टर हब बनाना.

315 संस्थानों में स्टूडेंट्स सीख रहे चिप की A-B-C-D

Add Zee Business as a Preferred Source

वर्तमान में देश के 315 शैक्षणिक संस्थानों में स्टूडेंट्स को वह सब कुछ सिखाया जा रहा है जो एक चिप बनाने के लिए जरूरी होता है. इसमें चिप की डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग शामिल है. सबसे बड़ी बात यह है कि स्टूडेंट्स को सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं दिया जा रहा, बल्कि उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन टूल्स पर काम करने का मौका मिल रहा है.

Synopsys, Cadence, Siemens, Renesas, Ansys और AMD जैसी दिग्गज कंपनियों के EDA (Electronic Design Automation) टूल्स अब हमारे कॉलेजों की लैब में मौजूद हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एक्सेस EDA प्रोग्राम बन चुका है. अब तक स्टूडेंट्स इन टूल्स पर 1.85 करोड़ घंटों से ज्यादा की ट्रेनिंग ले चुके हैं और यह आंकड़ा हर पल बढ़ रहा है.

मोहाली की लैब में असली चिप बनाने का अनुभव

डिजाइनिंग तो कंप्यूटर पर हो जाती है, लेकिन उसे हकीकत में बदलना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए सरकार ने मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (SCL) के दरवाजे स्टूडेंट्स के लिए खोल दिए हैं.

यहां छात्र अपनी डिजाइन की हुई चिप को खुद तैयार (Fabricate) और टेस्ट कर सकते हैं. यानी डिजाइन से लेकर फाइनल प्रोडक्ट तक का पूरा 'हैंड्स-ऑन' एक्सपीरियंस भारतीय छात्रों को मिल रहा है. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा और ठोस कदम है.

अब 500 कॉलेजों तक पहुंचेगा ये नेटवर्क

अश्विनी वैष्णव ने एक और बड़ा एलान करते हुए बताया कि 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के तहत इस प्रोग्राम का दायरा और बढ़ाया जाएगा. अभी जो ट्रेनिंग 315 संस्थानों में चल रही है, उसे बढ़ाकर अब 500 संस्थानों तक ले जाया जाएगा. इसका मतलब यह है कि देश के हर राज्य के पास अपनी एक ऐसी वर्कफोर्स होगी जो दुनिया की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी पर काम करने में माहिर होगी.

2 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट और नौकरियों की भरमार

दुनिया भर में सेमीकंडक्टर का बाजार फिलहाल 800 से 900 अरब डॉलर का है, लेकिन आने वाले समय में इसके 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. जब बाजार इतना बड़ा होगा, तो काम करने वालों की जरूरत भी बढ़ेगी.

एक अनुमान के मुताबिक, पूरी दुनिया में करीब 20 लाख (2 मिलियन) कुशल पेशेवरों की मांग होगी. भारत की नजर इसी मौके पर है. अगर हमारे पास प्रशिक्षित युवा होंगे, तो पूरी दुनिया की कंपनियां भारत की तरफ ही देखेंगी.

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6