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एक दशक पहले तक भारत मोबाइल फोन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, लेकिन अब कहानी पूरी तरह बदल चुकी है. भारत अब सिर्फ मोबाइल फोन का 'असेम्बलर' नहीं, बल्कि एक असली 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब' बन चुका है. एक नई स्टडी के अनुसार, अब देश में मोबाइल फोन का उत्पादन घरेलू मांग से नहीं, बल्कि विदेशी मांग (निर्यात) के कारण तेजी से बढ़ रहा है.
यह बदलाव सिर्फ कहने के लिए नहीं है, आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. रॉकेट बना निर्यात: 2017 18 में जहां भारत सिर्फ 0.2 बिलियन डॉलर के मोबाइल फोन निर्यात करता था, वहीं 2024 25 तक यह आंकड़ा बढ़कर 24.1 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है.
दुनिया में तीसरा स्थान: आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्यातक देश बन चुका है.
भारत अब सिर्फ बाहर से लाए गए पुर्जों को जोड़ने का काम नहीं कर रहा है. अब देश में ही मोबाइल के मुश्किल पुर्जे (जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले, बैटरी आदि) बनाए जा रहे हैं. इस सफलता के पीछे दो बड़े कारण हैं:
सरकारी नीतियां: सरकार की 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) जैसी योजनाओं ने विदेशी कंपनियों को भारत में फैक्ट्री लगाने और यहीं उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया.
ग्लोबल पार्टनरशिप: भारत ने दुनिया की बड़ी सप्लाई चेन्स के साथ मिलकर काम किया, जिससे उसे टेक्नोलॉजी और बाजार दोनों मिले.
इस क्रांति का सीधा फायदा देश के युवाओं को मिला है.
प्रोफेसर सी. वीरमणि (निदेशक, CDS): उन्होंने कहा, "भारत ने वही रास्ता अपनाया है जो एशिया के दूसरे सफल देशों ने अपनाया पहले बड़ी संख्या में उत्पादन करो, फिर धीरे धीरे वैल्यू एडिशन (पुर्जे बनाना) बढ़ाओ. सरकार का साथ बना रहा तो यह तरक्की जारी रहेगी."
पंकज मोहिंद्रू (अध्यक्ष, ICEA): उन्होंने कहा, "यह स्टडी हमारी बात को सही साबित करती है कि दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर काम करना ही निर्यात बढ़ाने, देश में उत्पादन बढ़ाने और रोजगार पैदा करने का सबसे अच्छा तरीका है."
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