WHO की चेतावनी, बच्चों के लिए खतरनाक है मोबाइल और टैबलेट, पढ़िए गाइडलाइंस

कई पेरेंट्स ये शिकायत लेकर भी आते हैं कि बच्चे बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो रहे हैं. पेरेंट्स बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी टीवी के सामने बैठा देते हैं.
WHO की चेतावनी, बच्चों के लिए खतरनाक है मोबाइल और टैबलेट, पढ़िए गाइडलाइंस

बच्चों का खेल-कूद, भाग-दौड़ कम हो रही है. बच्चे ज्यादा समय इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स के साथ बिताते हैं. (प्रतीकात्मक)

इलेक्ट्रोनिक डिवाइस, गैजेट्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. चाहे बड़े हों या बच्चे हर कोई इनसे घिरा रहता है. खासकर बच्चों को व्यस्त रखने के लिए खुद माता-पिता उनके हाथ में मोबाइल, टैबलेट थमा देते हैं या फिर उन्हें TV के सामने बैठा देते हैं. माता-पिता इस बात पर भी ध्यान नहीं देते कि बच्चा क्या देख रहा है और कितनी देर से स्क्रीन के सामने है. बच्चों का खेल-कूद, भाग-दौड़ कम हो रही है. बच्चे ज्यादा से ज्यादा समय इलेक्ट्रोनिक गैजेट्स के साथ बिताते हैं. लेकिन, अब जो चेतावनी आई है उसे जानकर आप चौंक जाएंगे. बच्चों की इन आदतों का प्रभाव लंबे समय के बाद देखने को मिलता है.

WHO ने जारी की है चेतावनी
2 साल की राबिया को कार्टून देखना पसंद है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो. राबिया की मां फौज़िया बताती हैं कि राबिया हिन्दी, इंगलिश और स्पैनिश के कार्टून देखती है और उसी भाषा में बात करने की कोशिश करती है. वह दिन में 2 से 3 घंटे स्क्रीन के सामने रहती है. फौज़िया के मुताबिक, जब घर में मेहमान आते हैं या फिर काम ज्यादा है, तब वो राबिया को फोन में कार्टून लगाकर दे देती हैं.

बदलनी होंगी आदतें
फौज़िया के मुताबिक, शुरुआत में वह ज्यादा समय के लिए राबिया को फोन दे देती थीं, लेकिन जब उन्होंने देखा कि राबिया बिना फोन के खाना नहीं खा रही है. तो उन्होंने धीरे-धीरे उसके स्क्रीन टाइम को कम कर दिया. वह कोशिश करती हैं कि राबिया को स्क्रीन से ज्यादा समय प्लेग्राउंड में बिताए. फौज़िया कहती हैं बच्चों को पूरी तरह से मोबाइल फोन से दूर नहीं रखा जा सकता. लेकिन, अगर बच्चों को फोन से दूर करना है तो उसके लिए पेरेंट्स को बच्चों को दूसरे खेलों में व्यस्त रखना चाहिए.

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क्या है WHO की चेतावनी?
विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) की जारी रिपोर्ट में 5 साल से कम उम्र के बच्चों का स्क्रीन टाइम निर्धारित कर दिया है. अब तक लोगों का सिर्फ ये मानना था कि स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से आंखें खराब होती हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के मुताबिक, इसके परिणाम कहीं ज्यादा खतरनाक हैं. 5 साल से कम उम्र के बच्चों का निर्धारित समय से ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके शारिरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालता है. इस रिपोर्ट के जरिए WHO ने माता-पिता या अभिभावक को बच्चों को मोबाइल फोन, टीवी स्क्रीन, लैपटॉप और अन्य इलैक्ट्रोनिक उपकरणों से दूर रखने की हिदायत दी है.

WHO की गाइडलाइन-
1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए :
एक साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जीरो स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है. यानी उन्हें बिलकुल भी स्क्रीन के सामने नहीं रखना है. इसके अलावा उन्हें दिन में आधा घंटे पेट के बल लिटाना चाहिए. फर्श पर तरह-तरह के खेल खिलाना भी बच्चे के शारिरिक विकास के लिए बेहतर है.

1 से 2 साल के बच्चों के लिए : इस उम्र के बच्चों के लिए दिनभर में स्क्रीन टाइम 1 घण्टे से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही 3 घण्टे फिजिकल एक्टिविटी करने की सलाह दी गई है. इस उम्र में बच्चों को कहानी सुनाना उनके मानसिक विकास के लिए फाएदेमंद साबित होगा.

3 से 4 साल तक के बच्चों के लिए : 3 से 4 साल की उम्र के बच्चों के लिए भी दिनभर में ज्यादा से ज्यादा समय 1 घण्टा निर्घारित किया गया है. लेकिन इनको 2 से 3 साल के बच्चों के मुकाबले ज्यादा फिजिकल एक्टिविटीस करने की सलाह दी गई है.

डॉक्टर भी सही मानते हैं WHO की गाइडलाइंस
मैक्स अस्पताल के मेन्टल हेल्थ एंड बिहेविरल सांइस डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ समीर मल्होत्रा के मुताबिक, बच्चों के मानसिक और शारिरिक विकास के लिए बातचीत बहुत जरुरी है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों कॉगनिटिव स्किल विकसित नहीं हो पाती है. इसका मतलब ये है कि बच्चे सही और गलत में फर्क नहीं कर सकते. वे जो देखते हैं वही सीखते हैं.

कई पेरेंट्स ये शिकायत लेकर भी आते हैं कि बच्चे बहुत ज्यादा एग्रेसिव हो रहे हैं. पेरेंट्स बच्चों को खाना खिलाने के लिए भी टीवी के सामने बैठा देते हैं. ये बहुत ही गलत प्रेक्टिस है. ऐसे में बच्चों का ध्यान बंट जाता है और वे भूख से ज्यादा खाना खा लेते हैं. इस उम्र में बच्चों की इमेजिनेशन तेज होती है. इसलिए पहले लोग बच्चों को कहानियां सुनाया करते थे. लेकिन, अब पेरेंट्स कहानियां सुनाने के बजाय बच्चों को फोन पकड़ाते हैं.

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