&format=webp&quality=medium)
दिमागी पैरालेसिस बीमारी या ब्रेन इंज्यूरी जैसी घातक बीमारी से उबारने के लिए Google रिसर्चर्स के साथ नई पहल करने जा रहा है. Google एक खास तरह का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एल्गोरिदम डिवाइस डेवलप करने में लगा हुआ है, जो ब्रेन इंज्यूरी और ब्रेन पैरालेसिस स्ट्रोक से बीमार लोगों के दीमाग को स्टिमलेट करने में मदद करेगा. इसके लिए Google ने मेयो क्लिनिक के रिसर्चर्स के साथ टाइ-अप भी किया है. इस रिसर्च में अनुसंधानकर्ता इलेक्ट्रिकल स्टिमलेशन का दीमाग में होनेवाले असर का अध्ययन करेंगे.
इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक नए तरह के एल्गोरिदम 'बेसिस प्रोफाइल कर्व आइडेंटिफिकेशन' को विकसित किया है. मेयो क्लिनिक के न्यूरोसर्जन काइ मिल्लर बताते हैं कि ये एल्गोरिदम ये बताने में मदद करेगा कि दिमाग का कौन सा हिस्सा दूसरे हिस्से से सीधे संवाद करता है. एक बार ये पता लग जाने पर ये उस जगह स्टिमलेटिंग डिवाइस के इलेक्ट्रोड का प्लेसमेंट कर ब्रेन नेटवर्क की बीमारी को ठीक करने में मदद करेगा. वे ये भी कहते हैं कि जैसे-जैसे नई तकनीक आते जा रही है, वैसे वैसे इस प्रकार के एल्गोरिदम हमें मिर्गी के रोगियों, पार्किंसंस रोग जैसे मूवमेंट डिसऑर्डर और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों को ठीक करने के इलाज में मदद कर सकता है.
दरअसल इस नई तकनीक को एक ऐसे मरीज के दीमाग के सीजर और दीमाग के क्रियाकलापों की स्थिति को पता लगाने के लिए इस्तेमाल में लाया गया जिसकी सर्जरी ब्रेन ट्यूमर निकालने के लिए की जानी थी. प्रत्येक इलेक्ट्रोड इंटरैक्शन के परिणामस्वरूप नए एल्गोरिदम का उपयोग करके सैकड़ों से हजारों समय बिंदुओं का अध्ययन किया गया.
शोधकर्ताओं ने PLOS Computational Biology में प्रकाशित अध्ययन में बताया कि फ्रेमवर्क सिंगल-पल्स ब्रेन स्टिमलेशन डेटा की सीधी व्याख्या को सक्षम बनाता है साथ ही कनेक्टोम को शामिल करने वाले इंटरैक्शन के विविध परिवेश का पता लगाने के लिए सामान्य रूप से लागू किया जा सकता है.