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मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर (Jio World Centre) में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 (Global Fintech Fest 2025) में देश के वित्तीय और तकनीकी क्षेत्र के बड़े नेता शामिल हुए. इस कार्यक्रम का आयोजन पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (FCC) द्वारा किया जा रहा है.
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने कुछ ही सालों में ऐसे नतीजे दिए हैं, जो पहले नामुमकिन लगते थे. उन्होंने कहा कि एआई दक्षता (Efficiency), नवाचार (Innovation) और समावेशन (Inclusion) को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अगर इस पर कंट्रोल न रहा, तो यह वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) के लिए खतरा बन सकता है.
टी. रबी शंकर ने कहा कि फाइनेंस की दुनिया भरोसे पर टिकी है, इसलिए यहां गलती की गुंजाइश बेहद कम है. उन्होंने कहा कि एआई को वित्तीय प्रणाली में शामिल करते समय गहरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा.
उन्होंने कहा, “एआई सिस्टम्स में कठोर निगरानी (Rigorous Oversight) और सुरक्षा की परतें जरूरी हैं. इन्हें ऐसा डिजाइन करना चाहिए कि वे बाजार या भुगतान प्रणाली (Payment Systems) को अस्थिर न करें.” रबी शंकर ने कहा कि सुरक्षा को डिजाइन के साथ जोड़ा जाना चाहिए, बाद में सुधार से जोखिम और बढ़ सकता है.
डिप्टी गवर्नर ने बताया कि आरबीआई ने अपने Innovation Hub के तहत कई कदम उठाए हैं. इनमें से एक खास परियोजना है MuleHunter.ai, जो म्यूल अकाउंट्स यानी फर्जी खातों की पहचान करने के लिए बनाई गई है. यह पारंपरिक सिस्टम से अधिक सटीक और कम गलत अलर्ट देने वाला मॉडल है. वर्तमान में इसे करीब 20 कमर्शियल बैंकों (Commercial Banks) में लागू किया जा चुका है.
रबी शंकर ने कहा कि इतिहास बताता है कि हर नई तकनीक के आने से कामकाज में बदलाव आता है. औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) और बिजली (Electricity) के आविष्कार की तरह, एआई भी काम के स्वरूप को बदल सकता है, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि हम इसे कैसे अपनाते हैं.
उन्होंने कहा कि एआई को “अच्छाई की ताकत” के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जो लोगों को सशक्त बनाए, संस्थानों को मजबूत करे और वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बढ़ाए.
फेस्ट में नीति आयोग के सीईओ बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने कहा, “एआई समाज को अभूतपूर्व पैमाने पर बदल रहा है.” उन्होंने कहा कि भारत अपने स्केल (Scale), टैलेंट (Talent) और डिजिटल डेप्थ (Digital Depth) की वजह से दुनिया में एआई और फिनटेक (Fintech) दोनों में लीड कर सकता है. उन्होंने बताया कि एआई 3 स्तरों पर असर डालता है-
सुब्रमण्यम ने कहा कि टेक्नोलॉजी और फाइनेंस का मिलन भारत की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) को नई दिशा देगा. उन्होंने कहा कि “रेगुलेशन को अब संस्था आधारित नहीं, बल्कि एक्टिविटी आधारित बनाना होगा.” उन्होंने सुझाव दिया कि रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox) यानी नियंत्रित प्रयोगशाला जैसी व्यवस्था बनाई जाए, जहां नई तकनीकों को छोटे स्तर पर टेस्ट किया जा सके.
सुब्रमण्यम ने कहा कि महिलाओं की श्रम भागीदारी (Women Labour Participation) बढ़ाने से देश की जीडीपी (GDP) में बड़ा उछाल आ सकता है. उन्होंने कहा, “महिलाएं देश की आधी आबादी हैं. अगर उनकी भागीदारी 10% भी बढ़े तो जीडीपी में 1.5% तक की वृद्धि संभव है.” उन्होंने यह भी बताया कि Account Aggregator Framework जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से महिलाओं, MSME और युवाओं को कर्ज (Credit Access) में आसानी हो रही है.
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 ने साफ कर दिया कि भारत एआई और फिनटेक के मेल से आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. लेकिन साथ ही, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तकनीक जितनी शक्तिशाली होगी, उतनी ही जिम्मेदारी से उसका उपयोग भी जरूरी होगा.
एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देता है.
यह दक्षता बढ़ाता है और काम को तेज और सटीक बनाता है.
जरूरी नहीं, लेकिन काम के स्वरूप को जरूर बदल देगा.
धोखाधड़ी रोकने, डेटा एनालिसिस और ग्राहक सेवा में.
एक नियंत्रित माहौल जहां नई तकनीकों का परीक्षण किया जाता है.
डेटा प्राइवेसी, गलत निर्णय और साइबर सुरक्षा जोखिम.
आरबीआई का एआई आधारित सिस्टम जो फर्जी बैंक खातों की पहचान करता है.
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