मेक इन इंडिया का दम! ISRO ने बनाया अपना 'विक्रम' चिप, हाई टेंपरेचर में भी करेगा काम! जानिए और क्या है खास

First ‘Made in Bharat’ Chips: क्या आप जानते हैं कि ये 'विक्रम' चिप कोई साधारण चिप नहीं है? इसे खास तौर पर अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (Space Launch Vehicles) की कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. जानिए खासियत.
मेक इन इंडिया का दम! ISRO ने बनाया अपना 'विक्रम' चिप, हाई टेंपरेचर में भी करेगा काम! जानिए और क्या है खास

First ‘Made in Bharat’ Chips: भारत ने एक बार फिर दुनिया को दिखाया है कि जब बात टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की आती है, तो हम किसी से कम नहीं. हाल ही में, इसरो की सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL) ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसने देश को गर्व से भर दिया है. उन्होंने तैयार किया है भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर, जिसका नाम है 'विक्रम'.

अंतरिक्ष से मिली शक्ति

क्या आप जानते हैं कि ये 'विक्रम' चिप कोई साधारण चिप नहीं है? इसे खास तौर पर अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों (Space Launch Vehicles) की कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है. यानी, ये सिर्फ हमारे गैजेट्स को तेज नहीं बनाएगा, बल्कि हमारे रॉकेट्स को भी सुरक्षित और शक्तिशाली बनाएगा, जिससे अंतरिक्ष में हमारी पहुंच और मजबूत होगी.

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आत्मनिर्भर भारत का सपना

ये उपलब्धि सिर्फ एक चिप बनाने से कहीं बढ़कर है. ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अब हम महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी चिप्स पर निर्भर नहीं रहेंगे, जिससे हमारी सुरक्षा और संप्रभुता दोनों मजबूत होंगी.

एक नई सुबह की शुरुआत

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को 'मेड इन इंडिया' चिप्स कहकर सराहा है. उन्होंने कहा कि ये किसी भी देश के लिए गर्व का क्षण है और प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का परिणाम है. ये वाकई एक नई सुबह की शुरुआत है, जहां भारत खुद अपनी तकदीर लिख रहा है.

सेमीकॉन इंडिया: तेजी से बदलता परिदृश्य

भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा 'सेमीकॉन इंडिया' कार्यक्रम के तहत तेजी से आगे बढ़ रही है. कुछ साल पहले जहां इस क्षेत्र में कोई खास हलचल नहीं थी, वहीं आज दुनिया भारत की ओर विश्वास से देख रही है. पांच बड़ी सेमीकंडक्टर इकाइयां तेजी से बन रही हैं, जिससे आने वाले समय में चिप निर्माण में भारत की हिस्सेदारी और बढ़ेगी.

केवल चिप नहीं, एक पूरा इकोसिस्टम

ये सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है. सरकार हाई-वॉल्यूम फैब्रिकेशन यूनिट्स, 3डी हेटेरोजेनस पैकेजिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली जैसी 10 बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है. इसके अलावा, डिजाइन-केंद्रित पहलों ने 280 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों और 72 स्टार्ट-अप्स को सहायता दी है. 'डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव' (DLI) योजना के तहत 23 स्टार्ट-अप्स को मंजूरी भी मिल चुकी है, जो नए इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है.

भविष्य की ओर एक कदम

'सेमीकॉन इंडिया 2025' एक ऐसा मंच है जहां दुनिया की शीर्ष कंपनियां जैसे एप्लाइड मैटेरियल्स, एएसएमएल, आईबीएम और माइक्रोन एक साथ आ रही हैं. ये आयोजन भारत में
सेमीकंडक्टर इनोवेशन की अगली लहर को गति देगा और ग्लोबल वैल्यू चेन में हमारी स्थिति को मजबूत करेगा.

कौशल विकास पर जोर

इस कार्यक्रम में एक 'कार्यबल विकास मंडप' भी है, जो नई प्रतिभाओं को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में करियर के अवसरों के बारे में बताएगा. इसका मतलब है कि भारत सिर्फ चिप्स नहीं बना रहा, बल्कि भविष्य के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स भी तैयार कर रहा है. ये एक ऐसा निवेश है जो आने वाली पीढ़ियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा.

क्यों ये हमारे लिए महत्वपूर्ण है?

'विक्रम' चिप का विकास भारत की तकनीकी स्वतंत्रता का प्रतीक है. ये हमें न केवल अंतरिक्ष और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर ऑटोमोबाइल तक हर उद्योग को मजबूत करेगा. कल्पना कीजिए, जब आपके स्मार्टफोन, लैपटॉप और गाड़ियां 'मेड इन इंडिया' चिप्स से चलेंगी, तो कैसा लगेगा!

भारत का 'विक्रम' चिप सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि ये देश के आत्मविश्वास, दूरदर्शिता और अदम्य भावना का प्रतीक है. ये हमें याद दिलाता है कि सही दिशा और दृढ़ संकल्प के साथ, कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. ये एक ऐसा कदम है जो भारत को ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनाने की राह पर तेजी से आगे बढ़ाएगा.

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