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आजकल हम सब अपनी ही धुन में रहते हैं, चाहे मेट्रो हो, बस हो, या घर. और इस धुन का म्यूजिकल डायरेक्टर कौन है? हमारे ईयरबड्स! ये छोटे से डिवाइस हमारे सफर में साथ बनकर चलते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि ये 24x7 आपके कानों में क्या-क्या समस्याएं पैदा कर सकते हैं? नहीं? तो चलिए, हम आपको बताते हैं कि ये म्यूजिक सुनने के साथ-साथ कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं.
ये छोटे, हल्के-फुल्के ईयरबड्स दिखने में भले ही बड़े क्यूट लगें, पर इनके साइड इफेक्ट्स उतने ही बड़े हो सकते हैं. म्यूजिक सुनने से लेकर कॉल पर घंटों बतियाने तक, ये हर जगह साथ होते हैं. इनकी पॉपुलैरिटी की वजह? कोई तार का झंझट नहीं, कहीं भी ले जाओ. पब्लिक प्लेस पर तो ये एकदम बेस्ट लगते हैं, क्योंकि 'नॉइज़ कैंसिलेशन' फीचर आसपास के शोर को गायब कर देता है. बस यही तो है जो हमें सबसे ज़्यादा खींचता है, है ना?
लेकिन क्या आपको पता है कि इन वायरलेस ईयरबड्स का आइडिया कहां से आया? इसका क्रेडिट जाता है एक कमाल के इंडियन-अमेरिकन इंजीनियर, अमर बोस को. इन्होंने 1970 में ही वायर-फ्री ईयरबड्स का कॉन्सेप्ट सोचा था. उनकी इस सोच ने हमारी लाइफ को इतना आसान बना दिया कि अब जिम में वर्कआउट हो या घर पर आराम, ईयरबड्स हमेशा हमारे साथ होते हैं. पर इस आसानी के पीछे छिपे हैं कुछ बड़े खतरे, जिनके बारे में जानना बहुत ज़रूरी है.
तो अब बात करते हैं उन खतरों की, जो आपके कानों में बैठे हैं. अगर आप पूरा दिन ईयरबड्स लगाकर गाने सुनते या बात करते हैं, तो ये लिस्ट आपके लिए है:
धीरे-धीरे बहरापन (Hearing Loss): WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) की एक रिपोर्ट के हिसाब से, बहुत सारे लोग सिर्फ इसलिए कम सुनने लगे हैं क्योंकि वो लगातार ईयरबड्स यूज करते हैं. सोचो, आपकी फेवरेट धुनें कहीं आपकी सुनने की शक्ति न छीन लें!
तेज़ आवाज़, बड़ा नुकसान (Noise-Induced Hearing Loss - NIHL): अगर आप वॉल्यूम फुल करके गाने सुनते हो, तो समझ लो आप अपने कान के अंदरूनी हिस्से (Inner Ear) को सीधा डैमेज कर रहे हो. इसी को NIHL कहते हैं. ये ऐसा है जैसे कोई आपके कान के पर्दे पर जोर-जोर से ड्रम बजा रहा हो!
चक्कर आना (Dizziness): कभी-कभी तेज़ आवाज़ से कान की नसें बहुत स्ट्रेस में आ जाती हैं, जिससे कान के अंदर दबाव पड़ता है. इस दबाव के कारण आपको चक्कर भी आ सकते हैं. आपका पसंदीदा गाना आपको 'गोल-गोल घुमा' सकता है!
सिरदर्द और माइग्रेन (Headache & Migraine): कानों पर लगातार दबाव और तेज़ आवाज़ से सिर्फ कान ही नहीं, सिर भी दर्द करने लगता है. कुछ लोगों को तो इसकी वजह से माइग्रेन जैसी बड़ी दिक्कत भी हो सकती है.
म्यूजिक मूड फ्रेश करता है, पर इतना नहीं कि सिर ही फाड़ दे!
कान में गंदगी का ढेर (Ear Wax Buildup): ईयरबड्स लगाने से कान के अंदर हवा नहीं जाती, जिससे मैल (Ear Wax) सूखने लगता है और जम जाता है. ये मैल कान की नली में गहराई तक चला जाता है और ब्लॉक कर सकता है. फिर आपको डॉक्टर के पास भागना पड़ेगा. गंदे कान किसी को पसंद नहीं!
ब्लड सर्कुलेशन की प्रॉब्लम (Blood Flow Issues): ईयरबड्स से कानों का ब्लड फ्लो भी बिगड़ सकता है. खासकर रात में सोते समय तो इन्हें बिल्कुल भी कान में नहीं लगाना चाहिए. इससे कानों में बहुत बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. आराम करते टाइम कानों को भी आराम दो, भाई!
अरे नहीं! ईयरबड्स छोड़ना क्यों है? बस कुछ स्मार्ट टिप्स फॉलो करो और सेफ रहो:
याद रखे, लाइफ में म्यूजिक ज़रूरी है, पर उससे भी ज़रूरी हैं आपके कान. उन्हें सेफ रखो ताकि लाइफटाइम अपनी फेवरेट धुनें सुन सको.
हां, बिल्कुल हो सकता है. WHO की रिपोर्ट भी बताती है कि लंबे समय तक हाई वॉल्यूम पर ईयरबड्स यूज करने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुँच सकता है. इसे NIHL (Noise-Induced Hearing Loss) कहते हैं.
अपने फोन का वॉल्यूम हमेशा 60% से नीचे रखें. कोशिश करें कि आप म्यूजिक सुनते हुए आसपास की थोड़ी बहुत आवाज़ें भी सुन सकें.
लगातार एक घंटे से ज़्यादा ईयरबड्स यूज न करें. हर घंटे 10-15 मिनट का ब्रेक जरूर लें ताकि आपके कानों को आराम मिले.
हां, तेज़ आवाज़ या लगातार कानों पर दबाव पड़ने से सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या हो सकती है. कुछ लोगों को इससे माइग्रेन भी ट्रिगर हो सकता है.
जब आप ईयरबड्स लगाते हैं, तो कान के अंदर हवा नहीं जा पाती. इससे कान का मैल सूख जाता है और जमने लगता है, जिससे ब्लॉकेज या इन्फेक्शन हो सकता है.
हां, सोते समय ईयरबड्स बिल्कुल नहीं लगाने चाहिए. इससे कानों का ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है और अंदरूनी हिस्से में बड़ी दिक्कतें आ सकती हैं.
अपने ईयरबड्स को हल्के हाथों से साफ कपड़े या कॉटन बड से नियमित रूप से साफ करते रहें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया जमा न हों.
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