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आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है. बैंकिंग हो, ऑनलाइन शॉपिंग हो, फूड डिलीवरी या फिर कोई सरकारी सर्विस हर जगह मोबाइल नंबर डालना जरूरी हो गया है. लेकिन इसी के साथ एक बड़ी परेशानी भी बढ़ी है, और वो है स्पैम और फेक कॉल्स की बाढ़. दिन हो या रात, ऑफिस टाइम हो या छुट्टी का दिन, अचानक आने वाली अंजान कॉल्स लोगों को परेशान कर देती हैं.
सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें से कई कॉल्स सिर्फ परेशान करने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि धोखाधड़ी और आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकती हैं.
जब भी आप किसी वेबसाइट, ऐप या सर्विस में अपना मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं, तो कई बार वह नंबर आपकी जानकारी के बिना थर्ड पार्टी कंपनियों तक पहुंच जाता है. यही नंबर आगे जाकर टेलीमार्केटिंग कंपनियों या स्कैमर्स के पास चला जाता है. इसके बाद आपको लोन, बीमा, फर्जी केवाईसी या इनाम जीतने जैसी कॉल्स आने लगती हैं. बार-बार फोन बजने से न सिर्फ काम में बाधा आती है, बल्कि हर कॉल को उठाकर यह जांचना पड़ता है कि कहीं कोई जरूरी कॉल तो नहीं.
स्पैम कॉल से बचने की शुरुआत यहीं से होती है कि आप हर अंजान कॉल पर भरोसा न करें. अगर किसी अनजान नंबर से लगातार कॉल आ रही है या कॉल करने वाला बिना किसी सही जानकारी के ऑफर दे रहा है, तो सतर्क हो जाना चाहिए. ऐसे नंबरों को नजरअंदाज करना या तुरंत पहचान कर लेना ही सबसे अच्छा तरीका है.

अगर आपको बार-बार किसी खास नंबर से कॉल आ रही है, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर देना समझदारी भरा फैसला है. स्मार्टफोन्स में कॉल ब्लॉक करने का विकल्प मौजूद होता है. एक बार नंबर ब्लॉक हो जाने के बाद उस नंबर से न तो कॉल आएगी और न ही कोई मैसेज.
आज के समय में कॉलर आईडी और स्पैम डिटेक्शन ऐप्स काफी काम के साबित हो रहे हैं. ये ऐप्स कॉल आने से पहले ही बता देते हैं कि कॉल स्पैम है या नहीं. इससे आपको फोन उठाने से पहले ही अंदाजा हो जाता है कि कॉल जरूरी है या नहीं. ऐसे ऐप्स पहले से रिपोर्ट किए गए स्पैम नंबरों का डेटा रखते हैं, जिससे फर्जी कॉल्स को रोका जा सकता है.
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अगर आप टेलीमार्केटिंग कॉल्स से परेशान हैं, तो डू नॉट डिस्टर्ब यानी DND सर्विस एक्टिवेट कराना एक अच्छा विकल्प है. यह सर्विस खास तौर पर प्रमोशनल कॉल्स और मैसेज को रोकने में मदद करती है. DND एक्टिव होने के बाद भी जरूरी कॉल्स आती रहती हैं, लेकिन अनचाहे प्रचार वाले फोन और मैसेज काफी हद तक बंद हो जाते हैं.
अब टेलीकॉम कंपनियां भी स्पैम कॉल्स के खिलाफ कदम उठा रही हैं. कई नेटवर्क प्रोवाइडर अपनी ऐप्स के जरिए स्पैम नंबर की पहचान और ऑटोमैटिक ब्लॉक की सुविधा दे रहे हैं. इनमें कॉल वेरिफिकेशन, स्पैम अलर्ट और रिपोर्टिंग जैसे फीचर शामिल होते हैं. इन सुविधाओं को ऑन करके आप काफी हद तक फालतू कॉल्स से बच सकते हैं.
स्पैम कॉल से बचने का सबसे अहम नियम यह है कि फोन पर कभी भी अपनी निजी जानकारी साझा न करें. चाहे कॉल करने वाला खुद को बैंक कर्मचारी बताए, सरकारी अधिकारी कहे या किसी नामी कंपनी से जुड़ा होने का दावा करे OTP, बैंक डिटेल, पैन नंबर या आधार नंबर शेयर करना बेहद खतरनाक हो सकता है. कोई भी असली संस्था कभी फोन पर OTP या गोपनीय जानकारी नहीं मांगती.
अगर आपको किसी कॉल पर शक होता है, तो उस नंबर को सिर्फ ब्लॉक ही न करें बल्कि रिपोर्ट भी करें. इससे न सिर्फ आपकी सुरक्षा होगी, बल्कि दूसरे लोग भी ऐसे फ्रॉड से बच पाएंगे. याद रखें, थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है.
ज्यादातर स्पैम कॉल तब आती हैं जब आपका नंबर किसी वेबसाइट, ऐप या सर्विस के जरिए तीसरे पक्ष तक पहुंच जाता है.
नहीं, लेकिन अगर कॉल करने वाला आपको जल्दी फैसला लेने को कहे या निजी जानकारी मांगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए.
पूरी तरह नहीं, लेकिन इससे बार-बार परेशान करने वाले नंबरों से काफी राहत मिलती है.
नहीं, DND का असर मुख्य रूप से टेलीमार्केटिंग कॉल्स और मैसेज पर होता है, जरूरी कॉल्स आती रहती हैं.
सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान है, OTP या बैंक जानकारी साझा करने से अकाउंट खाली हो सकता है.