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IMC 2025: इंडियन मोबाइल कॉन्ग्रेस 2025 में एरिक्सन (Ericsson) ने एक और शानदार 'मेड-इन-इंडिया' डिवाइस शोकेस किया, जिसका नाम है 'अन्नपूर्ती'. ये एक 5G-इनेबल्ड अनाज ATM है, जिसे वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के साथ मिलकर बनाया गया है. सोचिए जरा, अब आपको राशन लेने के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा. राशन लेने के लिए अभी आपको घंटों लाइन में लगना पड़ता है, नंबर आते-आते शाम हो जाती है. लेकिन अब सरकार द्वारा लॉन्च की गई इस मशीन के जरिए आप राशन आसानी से, रियल टाइम में और कम समय में निकाल सकेंगे.
ये 'अन्नपूर्ती' डिवाइस आधार-आधारित बायोमेट्रिक स्कैनिंग का उपयोग करता है. यानी, आपकी पहचान आधार से होगी, जिससे राशन वितरण में पूरी पारदर्शिता आएगी और कोई गड़बड़ी नहीं होगी. कंपनी का दावा है कि ये डिवाइस सिर्फ 30 सेकंड में 25 से 30 किलोग्राम अनाज बांट सकता है. फिलहाल ये भोपाल, गोरखपुर, लखनऊ, शिलांग और वाराणसी में लगे हैं, और 2026 के अंत तक 23 और शहरों में उपलब्ध होंगे.
एरिक्सन के एंड्रेस विन्सेंट (मार्केट एरिया साउथईस्ट एशिया, ओशिनिया और इंडिया के प्रमुख) ने बताया कि उनकी 'फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA)' सॉल्यूशन ने देश में 8.4 मिलियन ग्राहक बना लिए हैं. ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुंच 40% तक है. इसका मतलब है कि जहाँ फाइबर केबल नहीं पहुंच पाते, वहाँ भी ये वायरलेस तकनीक फाइबर जैसी तेज़ इंटरनेट स्पीड दे रही है. ये ग्रामीण भारत के डिजिटल सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा कदम है.
अन्नपूर्ती ग्रेन ATM कैसे काम करता है, इसकी प्रक्रिया नीचे दी गई है:
वितरण प्रक्रिया: ये मशीन 5 मिनट के अंदर 50 किलोग्राम तक चावल कुशलता से बांट देती है, जिसमें गलती की दर सिर्फ 0.01% होती है.
उपयोगकर्ता की पहुंच: लाभार्थी टचस्क्रीन पर अपना राशन कार्ड नंबर डालते हैं, बायोमेट्रिक पहचान (उंगली का निशान या आँखों की स्कैनिंग) करवाते हैं, और सफल पहचान के बाद उन्हें उनका आवंटित चावल (25 किलोग्राम तक) मिल जाता है.
इंतजार का समय कम: ये पारंपरिक राशन वितरण केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करता है.
बढ़ी हुई सुरक्षा: ये खाद्य वितरण प्रणाली में चोरी और कालाबाजारी को कम करता है.
बेहतर सटीकता और गति: ये सटीक वजन सुनिश्चित करता है और इंतजार के समय को 70% तक कम करता है.
24/7 उपलब्धता: ये लाभार्थियों को किसी भी समय चावल इकट्ठा करने की सुविधा देता है.
शुरुआती लॉन्च: इसे सबसे पहले भुवनेश्वर में लॉन्च किया गया था, और ओडिशा के सभी 30 जिलों में इसका विस्तार करने की योजना है.
भविष्य का एकीकरण: 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना के तहत देशव्यापी रोलआउट की संभावना है.
ऊर्जा बचाने वाला डिज़ाइन: ये प्रति घंटे केवल 0.6 वाट बिजली की खपत करता है और स्वचालित रूप से भरने के लिए सोलर पैनल कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है.
आसान इंस्टॉलेशन: इसे विभिन्न स्थानों पर आसानी से स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.
फर्जी राशन कार्ड हटाना: 16 लाख से अधिक फर्जी राशन कार्डधारियों की पहचान करके उन्हें हटा दिया गया है, जिससे ये सुनिश्चित हो रहा है कि असली लाभार्थियों पर कोई असर न पड़े.
आधार-आधारित सत्यापन: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) लागू किया गया है.
ओडिशा ने भुवनेश्वर के मंचेश्वर में भारत का पहला 24/7 ग्रेन ATM लॉन्च किया. इस पहल का उद्घाटन ओडिशा के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री, कृष्णा चंद्र पात्रा ने किया था.
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत कोई भी राशन कार्डधारक, चाहे वह किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का हो, ग्रेन ATM का उपयोग कर सकता है.
ये मशीन लाभार्थी के राशन हक के आधार पर चावल, गेहूं और दालें वितरित कर सकती है.
ग्रेन ATM प्रति घंटे केवल 0.6 वाट बिजली की खपत करता है और स्वचालित रूप से भरने के लिए सोलर पैनल से कनेक्ट किया जा सकता है, जिससे ये एक ऊर्जा-कुशल समाधान है.
हां, ओडिशा सभी 30 जिलों में ग्रेन ATM स्थापित करने की योजना बना रहा है, और 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना के तहत देशव्यापी विस्तार की संभावित योजनाएं भी हैं.
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