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आज आप एक सेकंड भी अपने मोबाइल फोन के बिना शायद ही रह पाते होंगे. क्योंकि टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी सातवें आसमान पर पहुंच चुकी है. आज से ठीक 30 साल पहले, 31 जुलाई 1995 को, भारत में कुछ ऐसा हुआ था जिसने हमारे बात करने, काम करने और जीने का पूरा तरीका हमेशा के लिए बदल दिया. आज ही के दिन मोबाइल से पहली कॉल की गई थी. ये वही ऐतिहासिक दिन था, जब भारत में पहली बार दो लोगों ने मोबाइल फोन पर बात की थी. यह सिर्फ एक कॉल नहीं थी, बल्कि उस रिवोल्यूशन की पहली घंटी थी, जिसने आज भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार बना दिया है.
आज भले ही हर हाथ में मोबाइल फोन है, लेकिन 90 के दशक की दुनिया बिल्कुल अलग थी. उस समय लैंडलाइन फोन होना ही एक बड़ी बात मानी जाती थी, जिसके लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था.
दूसरे शहर में किसी रिश्तेदार से बात करने के लिए ट्रंक कॉल (Trunk Call एक ऐसी टेलीफोन कॉल है जो एक स्थानीय कॉलिंग क्षेत्र से बाहर किसी अन्य स्थान पर की जाती है) बुक करानी पड़ती थी, जिसमें काफी समय और पैसा खर्च होता था. ऐसे में, बिना तार के कहीं से भी बात कर पाना किसी जादू से कम नहीं था.
31 जुलाई, 1995 में पहली बार कॉल की गई. पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग से दिल्ली में बैठे केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम को फोन मिलाया. जिस हैंडसेट से ये कॉल की गई थी, वो था उस समय का मशहूर नोकिया 2110 (Nokia 2110). ये कॉल मोदी टेल्स्ट्रा की 'मोबाइलनेट' सर्विस के जरिए पॉसीबल हो पाई थी, जिसने भारत में मोबाइल युग की नींव रखी.
आज हमें मुफ्त इनकमिंग कॉल्स (Free Incoming Calls) की आदत पड़ गई है, क्योंकि ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियों ने Unlimited Free Calls कर दी हैं. लेकिन उस समय ऐसा नहीं था. पहली मोबाइल कॉल (First Mobile Call) के दौर में कीमतें आसमान छू रही थीं, जो इसे केवल अमीरों का शौक बनाती थीं. उस समय एक मिनट की आउटगोइंग कॉल के लिए 16 रुपए और फोन पर घंटी बजने यानी इनकमिंग कॉल के लिए भी 8 रुपए प्रति मिनट देने पड़ते थे. आज के हिसाब से देखें तो ये बहुत बड़ी रकम थी.
महंगी रेट्स की वजह से, शुरुआती 5 सालों में मोबाइल फोन ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाया. देश में केवल कुछ लाख लोग ही इसे इस्तेमाल करते थे, जो इसे एक स्टेटस सिंबल के तौर पर रखते थे. लेकिन साल 2003 में एक बड़ा बदलाव आया, जब इनकमिंग कॉल्स को मुफ्त (Free) कर दिया गया. यहीं से भारत में 'मिस्ड कॉल' (Missed Call) के उस दौर की शुरुआत हुई, जो हम सभी को आज भी याद है.
2008 में 3G और 2012 में 4G आने से इंटरनेट की रफ्तार तो बढ़ी, लेकिन मोबाइल क्रांति का सबसे बड़ा धमाका 2016 में रिलायंस जियो (Reliance Jio) के आने के साथ हुआ. जियो ने मुफ्त कॉलिंग और बेहद सस्ते डेटा प्लान देकर पूरे टेलीकॉम बाजार का नक्शा ही बदल दिया. एक समय जहां एक मिनट की कॉल 16 रुपए की थी, वहीं आज हम दुनिया में सबसे सस्ता मोबाइल डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं.
आज 30 साल बाद, भारत में 120 करोड़ से ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं. 5G की तेज रफ्तार देश के कोने कोने में पहुंच रही है, जिससे हमारा जीवन और भी आसान हो गया है. मोबाइल फोन अब सिर्फ बात करने का जरिया नहीं रहा, बल्कि ये हमारा बैंक, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और क्लासरूम भी बन गया है. इसने शहर और गांव के बीच के फासले को कम कर दिया है.
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