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(Image: Reuters)
आम निवेशक बाजार का मूड सेंसेक्स और निफ्टी जैसे इंडेक्स को देखकर भांपते हैं. लेकिन, इन सेंसेक्स और निफ्टी को बनाने वाली इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियां पर मार्केट रेगुलेटर सेबी का कोई सीधा रेगुलेशन नहीं है. हालांकि, आगे ये कंपनियां सेबी रेगुलेशन के दायरे में आ सकती हैं. ज़ी बिजनेस को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब इन इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियों के रेगुलेशन की फिर से चर्चा हो रही है. इससे पहले अब तक सेबी ने चर्चा के लिए एक बार डिस्कशन पेपर और दूसरी बार कंसल्टेशन पेपर जारी किया था. अब पुराने कंसल्टेशन पेपर के साथ नए सिरे से नियमों को बनाने की चर्चा शुरू हुई है.
सूत्रों के मुताबिक, सेबी की कमेटी में इंडेक्स प्रोवाइडर्स के रेगुलेशन पर चर्चा हुई. रेगुलेशन बनाने के लिए वर्किंग ग्रुप बनाने पर विचार किया गया, जिसमें एक्सचेंजेज, इंडेक्स प्रोवाइडर्स, एक्सपर्ट मेंबर रहेंगे. ट्रांसपैरेंसी, गवर्नेंस, जिम्मेदारी और इंडिपेंडेंस के लिए रेगुलेशन को जरूरी बताया गया है. अभी इंडेक्स प्रोवाइडर्स सेबी रेगुलेशन से लगभग बाहर हैं.
मौजूदा नियमों के मुताबिक, केवल इंडेक्स फंड, ETF में अधिकतम एक्सपोजर लिमिट है. अभी किसी एक इंडेक्स में मिनिमम 10 शेयर की शर्त लागू है. सिंगल स्टॉक पर 25%, टॉप 3 का अधिकतम वेटेज 65% लागू है. 2017 और 2020 में सेबी कंसल्टेशन पेपर पर नियम नहीं आए थे. अभी इंडेक्स प्रोवाइडर एक्सचेंजेज की ही सब्सिडियरीज हैं. NSE Indices और Asia Index Private Limited मुख्य सब्सिडियरीज हैं. निवेश के लिए इक्विटी, डेट, ETF के इंडेक्स काफी अहम हैं.
यूरोपियन यूनियन और सिंगापुर में रेगुलेशन की शुरुआत हुई. मार्केट रेगुलेटर्स का संगठन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशंस (IOSCO) के प्रिंसिपल इसके आधार हैं. ऑस्ट्रेलिया में केवल सिग्निफिकेंट बेंचमार्क के लिए रेगुलेशन है. US में अलग नियम नहीं पर मैनिपुलेशन रोकने का नियम लागू है. जापान में IOSCO के सिद्धांतों के आधार पर बेसिक रेगुलेशन है.
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