EXCLUSIVE: सेबी के रेगुलेशन में आ सकती हैं इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियां, वर्किंग ग्रुप बनाने पर कमिटी में चर्चा 

मार्केट रेगुलेटर सेबी की कमेटी में इंडेक्स प्रोवाइडर्स के रेगुलेशन पर चर्चा की गई. रेगुलेशन बनाने के लिए वर्किंग ग्रुप बनाने पर विचार किया गया, जिसमें एक्‍सचेंजेज, इंडेक्स प्रोवाइडर्स, एक्सपर्ट मेंबर रहेंगे.
EXCLUSIVE: सेबी के रेगुलेशन में आ सकती हैं इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियां, वर्किंग ग्रुप बनाने पर कमिटी में चर्चा 

(Image: Reuters) 

आम निवेशक बाजार का मूड सेंसेक्स और निफ्टी जैसे इंडेक्स को देखकर भांपते हैं. लेकिन, इन सेंसेक्स और निफ्टी को बनाने वाली इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियां पर मार्केट रेगुलेटर सेबी का कोई सीधा रेगुलेशन नहीं है. हालांकि, आगे ये कंपनियां सेबी रेगुलेशन के दायरे में आ सकती हैं. ज़ी बिजनेस को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब इन इंडेक्स प्रोवाइडर कंपनियों के रेगुलेशन की फिर से चर्चा हो रही है. इससे पहले अब तक सेबी ने चर्चा के लिए एक बार डिस्कशन पेपर और दूसरी बार कंसल्टेशन पेपर जारी किया था. अब पुराने कंसल्टेशन पेपर के साथ नए सिरे से नियमों को बनाने की चर्चा शुरू हुई है.

सेबी कमिटी में हुई चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, सेबी की कमेटी में इंडेक्स प्रोवाइडर्स के रेगुलेशन पर चर्चा हुई. रेगुलेशन बनाने के लिए वर्किंग ग्रुप बनाने पर विचार किया गया, जिसमें एक्‍सचेंजेज, इंडेक्स प्रोवाइडर्स, एक्सपर्ट मेंबर रहेंगे. ट्रांसपैरेंसी, गवर्नेंस, जिम्मेदारी और इंडिपेंडेंस के लिए रेगुलेशन को जरूरी बताया गया है. अभी इंडेक्स प्रोवाइडर्स सेबी रेगुलेशन से लगभग बाहर हैं.

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मौजूदा नियमों के मुताबिक, केवल इंडेक्स फंड, ETF में अधिकतम एक्सपोजर लिमिट है. अभी किसी एक इंडेक्स में मिनिमम 10 शेयर की शर्त लागू है. सिंगल स्टॉक पर 25%, टॉप 3 का अधिकतम वेटेज 65% लागू है. 2017 और 2020 में सेबी कंसल्टेशन पेपर पर नियम नहीं आए थे. अभी इंडेक्स प्रोवाइडर एक्सचेंजेज की ही सब्सिडियरीज हैं. NSE Indices और Asia Index Private Limited मुख्य सब्सिडियरीज हैं. निवेश के लिए इक्विटी, डेट, ETF के इंडेक्स काफी अहम हैं.

बाकी देशों में क्या है हाल

यूरोपियन यूनियन और सिंगापुर में रेगुलेशन की शुरुआत हुई. मार्केट रेगुलेटर्स का संगठन इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशंस (IOSCO) के प्रिंसिपल इसके आधार हैं. ऑस्‍ट्रेलिया में केवल सिग्निफिकेंट बेंचमार्क के लिए रेगुलेशन है. US में अलग नियम नहीं पर मैनिपुलेशन रोकने का नियम लागू है. जापान में IOSCO के सिद्धांतों के आधार पर बेसिक रेगुलेशन है.

IOSCO के सिद्धांत क्या हैं?

  • 2013 में IOSCO ने फाइनेंशियल बेंचमार्क का सिद्धांत जारी किया, ताकि गवर्नेंस हितों का टकराव न हो.
  • बेंचमार्क की क्वालिटी, इंटिग्रिटी
  • इंडेक्स बनाने के तरीके की क्वालिटी
  • अकाउंटिबिलिटी

दुनिया भर में बेंचमार्क ( इंडेक्स) मुख्य पैमाना क्या है

  • लिक्विडिटी
  • फ्री फ्लोट
  • मार्केट कैपिटल
  • कितनी बार इंडेक्स का रिव्यू

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2020 के सेबी के कंसल्टेशन पेपर में क्या था?

  • मार्केट रेगुलेटर्स की अंतरराष्ट्रीय संस्था IOSCO के नियम मानें
  • फाइनेंशियल बेंचमार्क के IOSCO नियमों का पालन किया जाए
  • अगर किसी वजह से कंप्लायंस नहीं तो उसकी जानकारी दी जाए
  • विदेशी एक्सचेंज में भारतीय इंडेक्स के कारोबार का बुरा असर न हो
  • भारतीय बाजार में बुरा असर होने पर एग्रीमेंट को खत्म किया जाए
  • डिस्कशन पेपर में ये पूछा गया कि क्या वाकई में रेगुलेशन जरूरी है

2017 के सेबी के डिस्कशन पेपर में क्या था?

  • इंडेक्स के बनाने के तरीके से जुड़ी जानकारी पब्लिक होनी चाहिए
  • हितों के टकराव की निगरानी व्यवस्था पर्याप्त मजबूत होनी चाहिए
  • इंडेक्स एडमिनिस्ट्रेशन-कमर्शियलाइजेशन में हित का टकराव न हो
  • इंडेक्स की रोजाना निगरानी और इंडेक्स गणना का काम अलग हो
  • इंडेक्स बनाने के तरीके से जुड़े ऑडिट का दस्तावेज 5 साल तक रखें
  • कोड ऑफ कंडक्ट के पालन की सूचना हर माह/तिमाही सेबी को मिले
  • देश के बाहर इंडेक्स लॉन्च करने की जानकारी सेबी को दी जाए
  • विदेशी मार्केट में इंडेक्स लॉन्च करने पर सेबी को तुरंत सूचना दें
  • केवल FATF कंप्लायंस वाले देशों में ही भारतीय इंडेक्स लॉन्च
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