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शेयर बाजार में भारी-भरकम गिरावट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Why is Market Down Today: शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर से तेज गिरावट लौटती नजर आई. ग्लोबल अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने निवेशकों के सेंटीमेंट को झटका दिया. है. पिछले दो सत्रों की तेज रैली के बाद बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिली, जिससे शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए.
इंट्राडे में सेंसेक्स 1300 अंकों से ज्यादा गिरकर 73,895 के स्तर पर और निफ्टी 400 अंकों से ज्यादा टूटकर 22,882 के आसपास आ गया था. मार्केट ब्रेड्थ भी कमजोर रही. जहां केवल 764 शेयरों में तेजी रही, जबकि 3000 से ज्यादा शेयर गिरावट में रहे. बाजार में कुछ ही घंटों में 6 लाख करोड़ का मार्केट कैप साफ होता दिखा.
पिछले दो दिनों में बाजार करीब 3.5% चढ़ चुका था. ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया. NSE पर 16 में से 15 सेक्टर गिरावट में दिखे. सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट के बीच आज फिर से मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी प्रेशर में आ गए और इंट्राडे में करीब 1.5% फिसल गए.
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर बाजार की नजरें बनी हुई हैं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों को कुछ समय के लिए टालने की बात कही, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. ईरान की तरफ से सीजफायर प्रस्ताव को खारिज किए जाने से बाजार में यह डर बना हुआ है कि तनाव जल्दी खत्म नहीं होगा.
ब्रेंट क्रूड की कीमतें अभी भी $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं. इस महीने दूसरी बार इंट्रा डे में इसकी कीमत $119 के ऊपर निकली हैं. ऊंचे तेल दाम भारत जैसे आयातक देश के लिए नकारात्मक माने जाते हैं, क्योंकि इससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव बढ़ता है. तेल कीमतों में हर $10 की बढ़त से भारत का CAD GDP के करीब 0.5% से बढ़ता है.
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो के करीब पहुंच गया है. रुपया 94.44 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है. युद्ध और महंगे कच्चे तेल के कारण रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है. युद्ध की शुरुआत से अबतक डॉलर के सामने 3 रुपये फिसल चुका है. FY 2025-26 (April-March) के बीच रुपया 9.5% फिसला है. .FY 2013-14 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन (-10.5%) दिख रहा है.
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विदेशी ब्रोकरेज फर्म्स और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बाजार का सेंटीमेंट लगातार निगेटिव दिख रहा है. FIIs ने बुधवार को जब बाजार चढ़े थे, तब भी 1805 करोड़ के आसपास की बिकवाली की थी. FIIs की कैश इक्विटी में इस महीने 1.07 लाख करोड़ की बिकवाली आ चुकी है, ये अप्रैल 2006 के बाद सबसे बड़ी बिकवाली है. इसके साथ लगातार 9वें महीने विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है. Nomura, CITI और Goldman Sachs ने निफ्टी के टारगेट घटा दिए हैं.
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मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, बाजार में गिरावट की बड़ी वजह “अनिश्चितता” है. उनका कहना है कि निवेशक अभी यह नहीं समझ पा रहे कि जियोपॉलिटिकल स्थिति किस दिशा में जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि पर्शियन गल्फ में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से “इवेंट रिस्क” बढ़ गया है, खासकर वीकेंड से पहले निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं. साथ ही, ग्लोबल ब्रोकरेज द्वारा GDP और अर्निंग्स अनुमान घटाने से भी बाजार पर दबाव बना है.
कुल मिलाकर, यह समय “रिस्क मैनेजमेंट” और “डिसिप्लिन” का है, न कि आक्रामक दांव लगाने का.
1. बाजार में गिरावट की मुख्य वजह क्या है?
ग्लोबल टेंशन, मुनाफावसूली, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये ने बाजार पर दबाव बनाया है.
2. क्या यह गिरावट लंबी चल सकती है?
यह काफी हद तक जियोपॉलिटिकल स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा.
3. क्या अभी निवेश करना सही है?
लॉन्ग टर्म निवेशक गिरावट में चरणबद्ध तरीके से निवेश कर सकते हैं.
4. रुपये की गिरावट का बाजार पर क्या असर है?
कमजोर रुपया विदेशी निवेश को प्रभावित करता है और महंगाई बढ़ा सकता है, जिससे बाजार पर दबाव आता है.
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