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दीपक वाधवा ने ट्रेडिंग की इसी चमक-धमक के पीछे का असली सच बताया है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
आज के इस समय में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ट्रेडिंग को लेकर काफी चर्चा होती है.असल में कई लोग इसे जल्दी पैसा कमाने का आसान तरीका समझ लेते हैं. लेकिन क्या वाकई ट्रेडिंग इतनी आसान है? ज़ी बिज़नेस के खास पॉडकास्ट शो ‘Bucks Talk’ में फाइनेंस एक्सपर्ट दीपक वाधवा ने ट्रेडिंग और स्टॉक मार्केट को लेकर कई अहम बातें बताईं और उन गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश की, जिनकी वजह से बड़ी संख्या में लोग नुकसान उठाते हैं.
जी हां शो ‘Bucks Talk’ में फाइनेंस एक्सपर्ट दीपक वाधवा ने ट्रेडिंग की इसी चमक-धमक के पीछे का असली सच बताया है.उन्होंने उन गलतियों पर रोशनी डाली है, जिनकी वजह से लोग अपना खून-पसीने का पैसा बाजार में डूबा देते हैं,
दीपक वाधवा के मुताबिक ट्रेडिंग अपने आप में एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, लेकिन इसमें सफलता तभी मिलती है जब इसे सही तरीके से सीखा और समझा जाए,उन्होंने कहा कि ट्रेडिंग कोई लॉटरी टिकट नहीं है, जहां आज पैसा लगाया और कल बड़ा मुनाफा मिल गया। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें ज्ञान, अनुभव और सही प्लानिंग की जरूरत होती है.
असल में उनका कहना है कि कई लोग यह सोचकर बाजार में आते हैं कि थोड़े पैसे से तुरंत बड़ी कमाई हो जाएगी.असल में यही सोच अक्सर उन्हें नुकसान की ओर ले जाती है.
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फाइनेंस एक्सपर्ट ने बताया है कि सेबी के आंकड़े भी यह दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में ट्रेडर्स नुकसान उठाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह जानकारी की कमी और गलत उम्मीदें हैं.असल में कई लोग बिना सीखे और बिना बाजार को समझे ट्रेडिंग शुरू कर देते हैं.
दीपक के अनुसार ट्रेडिंग से पैसा तो खूब बनता है, लेकिन शर्त यह है कि आपको इसे अच्छी तरह सीखना पड़ेगा. सेबी (SEBI) का डेटा कहता है कि 90% ट्रेडर्स यहां नुकसान उठाते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह अज्ञानता है.असल में ज्यादातर लोग इसे 'लॉटरी की टिकट' समझ लेते हैं और सोचते हैं कि आज ₹100 लगाएंगे तो कल ₹500 बन जाएंगे.असल में बिना जानकारी के शॉर्टकट ढूंढने वाले ही यहां मात खाते हैं, जबकि जो इसे गंभीरता से सीखकर करते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है.
दीपक वाधवा ने बताया कि अगर किसी ने अपना एक व्यापार शुरू किया और उसे एक्सपेंड करने के लिए और पैसे की जरूरत है, तो वह पब्लिक से पैसा इकट्ठा करने के लिए स्टॉक मार्केट में अपनी इक्विटी यानी शेयर्स इशू करता है, ये शेयर्स हमें एक तय प्राइस पर मिल जाते हैं और इन्हीं शेयर्स की खरीद-बेच को हम ट्रेडिंग कहते हैं,ये स्टॉक्स किसी कंपनी के भी हो सकते हैं और इंडेक्स के भी हो सकते हैं,
सिंपल शब्दों में कहें तो जब किसी कंपनी को अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए एक्स्ट्रा पूंजी की जरूरत होती है, तो वह आम लोगों से पैसा जुटाने का रास्ता चुन सकती है, इसके लिए कंपनी अपने शेयर जारी करती है,
जब ये शेयर बाजार में मौजूद हो जाते हैं, तो निवेशक और ट्रेडर्स इन्हें खरीदते और बेचते हैं. इसी प्रक्रिया के जरिए स्टॉक मार्केट काम करता है.असल में शेयरों की कीमत समय-समय पर बदलती रहती है और इसी बदलाव के आधार पर खरीद-बिक्री होती है.
आपको बता दें कि ट्रेडिंग का सीधा मतलब है खरीदना और बेचना. जिस तरह एक दुकानदार सामान खरीदकर बेचता है, उसी तरह बाजार में शेयरों या इंडेक्स की खरीद-बिक्री की जाती है. ट्रेडर्स कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं.
एक बात तो साफ है कि ट्रेडिंग कोई खेल नहीं, बल्कि एक कला है. दीपक वाधवा की सलाह यही है कि बाजार में उतरने से पहले खुद को शिक्षित करें,तो बिना तैयारी के मैदान में उतरना केवल रिस्क को दावत देना है.
जी हां दीपक वाधवा का मानना है कि ट्रेडिंग को कभी भी आसान कमाई का जरिया नहीं समझना चाहिए.असल में यह एक स्किल है, जिसे सीखने, समझने और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है। जो लोग बिना तैयारी के बाजार में आते हैं, उनके लिए जोखिम बढ़ जाता है. वहीं सही जानकारी और समझ के साथ ट्रेडिंग की जाए, तो यह एक बेहतर वित्तीय अवसर बन सकती है
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