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समझिए स्टॉक मार्केट की पूरी ABCD. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
नीदरलैंड में समुद्र के किनारे बसे एक शहर की मामूली सी गली में कुछ लोग एक व्यापार करने वाले नाविक दल से बात कर रहे हैं. शायद वो प्रॉफिट और लॉस का हिसाब-किताब लगा रहे हैं. तभी पीछे से आवाज़ आती है कि नाव निकलने को तैयार है, जिसे जितना निवेश करना है अभी कर दे, मौका दोबारा नहीं मिलेगा...
कुछ अमीर दिखने वाले लोगों ने थैलियों में भरे सिक्के, नाविक दल के मुखिया के हाथों में देते हुए कहा कि मुनाफे के साथ लौटना... थोड़ी देर बाद एक बड़ी सी नाव में व्यापार के लिए सामान लदने लगा और फिर जो समुद्र के जरिए व्यापार का सफर शुरू हुआ और उससे प्रॉफिट और लॉस का जो गेम बना...उसी ने बाद में शेयर बाजार की शक्ल अख्तियार की.
आसान भाषा में समझाएं तो उस दौर में जब कोई व्यापार करने वाला दल अपने शहर से या देश से दूसरे किसी देश या शहर जाता था, तो उसे उस व्यापारिक यात्रा के लिए बहुत सारे पैसों की जरूरत पड़ती थी. इसी पैसों के लिए व्यापार करने वाला दल शहर के कई बड़े रईस लोगों को एक ऑफर देता था, कि आज आप हमारी व्यापारिक यात्रा के लिए निवेश कीजिए और जब हम यात्रा से बड़े मुनाफे के साथ लौटेंगे तो उसमें आपका भी एक हिस्सा होगा. हालांकि, तब ये गेम सिर्फ अमीर लोगों के लिए ही था, क्योंकि निवेश के लिए मोटी रकम चाहिए होती थी, जो सिर्फ उन्हीं के पास होती थी.
लेकिन...फिर एक तारीख आती है 20 मार्च 1602. जो दुनिया को आधिकारिक रूप से बताती है कि शेयर बाजार जैसी कोई चीज अब समुद्री रास्तों और अमीरों की सिक्के वाली थैलियों से निकलकर आम लोगों के बीच पहुंचने को तैयार है.
इसी दिन दुनिया ने पहली बार शेयर बाजार को जाना था. दरअसल, आज जिस शेयर बाजार में लोग मोबाइल से एक क्लिक में पैसा लगाते हैं, उसकी शुरुआत करीब 400 साल पहले एक डच कंपनी से हुई थी. 20 मार्च 1602 को डच ईस्ट इंडिया कंपनी यानी VOC ने दुनिया का पहला IPO लॉन्च किया.
यही कदम आगे चलकर आधुनिक शेयर बाजार की नींव बना. कंपनी के नियमों में साफ लिखा गया था कि देश का कोई भी नागरिक इस कंपनी के शेयर खरीद सकता है. इसके अलावा, निवेश की कोई तय न्यूनतम राशि नहीं थी. दूसरा, इन शेयरों को खरीदा और बेचा भी जा सकता था.
बाद में कंपनी के नियमों में एक और प्रावधान जोड़ा गया, जिसमें कहा गया कि शेयरों का ट्रांसफर कंपनी के बुककीपर के जरिए किया जा सकता है. यहीं से सेकेंडरी मार्केट की शुरुआत हुई. यानी निवेशकों को अब कई साल तक पैसा फंसा कर रखने की जरूरत नहीं थी. वे चाहें तो अपने शेयर किसी और को बेच सकते थे. उस समय शेयरों की खरीद-बिक्री तीन मुख्य जगहों पर होती थी.
पहली जगह थी न्यू ब्रिज, जहां खुले में दुनिया की पहली शेयर ट्रेडिंग हुई.
दूसरी थी Hendrick de Keyser Exchange, जो शेयर और कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए खास तौर पर बनाई गई थी.
तीसरी जगह थी Dam Square, जहां बाजार बंद होने के बाद भी लोग खबरों और अफवाहों के आधार पर सौदे करते थे.
IPO में निवेश के लिए अगस्त महीने तक रजिस्ट्रेशन खुला रहा. इस दौरान 1,143 निवेशकों से करीब 36.7 लाख गिल्डर जुटाए गए. इन निवेशकों में Neeltgen Cornelis नाम की एक घरेलू कामगार भी शामिल थी. वह VOC के एक मालिक के यहां काम करती थी. उसने 100 गिल्डर निवेश किए, जबकि उसकी रोज की कमाई सिर्फ 50 सेंट थी. इससे पता चलता है कि उस दौर में भी आम लोग शेयर बाजार में हिस्सा लेने लगे थे.
अब चलते हैं... भारत की ओर और समझते हैं कि वहां कैसे शुरू हुआ आज का शेयर बाजार.
भारत में कई लोगों के लिए शेयर बाजार आज भी किसी रहस्यमयी दुनिया से कम नहीं है. कुछ लोग इसे पैसे छापने की मशीन समझते हैं, तो कुछ को लगता है कि यहां आते ही पैसा डूब जाता है. छोटे शहरों के ज्यादातर घरों में आज भी शेयर बाजार को एक जुआ की तरह देखा जाता है.
लेकिन, 1850 में एक बरगद के पेड़ के नीचे खड़े कुछ लोगों के लिए शेयर बाजार ऐसा नहीं था. बल्कि, वो लोग इस मार्केट को एक ऐसे फलदार पेड़ के तौर पर देख रहे थे, जिसके फल पर हर उस शख्स का अधिकार होता, जिसने इसे थोड़े से भी पानी से सींचा हो.
आशीष कुमार चौहान और अर्चना जैन की लिखी किताब The Temple of Wealth Creation के मुताबिक, भारत के शेयर बाजार की शुरुआत किसी बड़ी इमारत या आधुनिक ट्रेडिंग सिस्टम से नहीं हुई थी. इसकी शुरुआत मुंबई में एक बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी. इसी पेड़ के नीचे, 1850 के दशक में कपास के कारोबार से जुड़े Chapparia बनिया समुदाय के 6 ब्रोकर नियमित तौर से मिलने लगे थे.
धीरे-धीरे इस जगह पर ब्रोकरों की संख्या बढ़ने लगी. अलग-अलग समुदायों से जुड़े लोग इस कारोबार का हिस्सा बनने लगे, जिनमें पारसी, मारवाड़ी, गुजराती, मुस्लिम, जैन, मराठी और ब्राह्मण समुदाय के लोग शामिल थे. बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए 1875 तक ट्रेडिंग के लिए एक अलग ऑफिस लिया गया. यह इलाका आज हॉर्निमैन सर्कल के नाम से जाना जाता है.
बाद में इन ब्रोकरों ने मिलकर The Native Share & Stock Brokers Association नाम का संगठन बनाया, जिसे आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE के रूप में जाना जाता है. इस संगठन की शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई थी. करीब 318 लोगों ने एक-एक रुपये का योगदान देकर इसे बनाया था.
शुरुआती दौर में एसोसिएशन की सदस्यता लेने के लिए सिर्फ 1 रुपये फीस देनी पड़ती थी. लेकिन जैसे-जैसे शेयर बाजार का विस्तार हुआ, वैसे-वैसे मेंबरशिप फीस भी बढ़ती गई. 1896 तक सदस्यों की संख्या 333 हो गई और फीस बढ़कर 1,000 रुपये तक पहुंच गई. 1916 तक यह शुल्क 2,500 रुपये हो गया, जबकि 1920 तक सदस्य संख्या 478 और फीस करीब 48 हजार रुपये तक पहुंच चुकी थी.
इसी दौरान दलाल स्ट्रीट का भी विकास हुआ. 1895 में स्टॉक एक्सचेंज ने दलाल स्ट्रीट पर जमीन खरीदी और 1899 में वहां नए भवन का उद्घाटन किया गया. उस समय शेयर बाजार में ट्रेडिंग दोपहर 1 बजे के बाद शुरू होती थी.
इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में नए स्टॉक एक्सचेंज खुलने लगे. 1894 में अहमदाबाद स्टॉक एक्सचेंज शुरू हुआ, जहां मुख्य रूप से टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों की ट्रेडिंग होती थी. 1908 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज अस्तित्व में आया, जहां जूट और प्लांटेशन कंपनियों के शेयरों का कारोबार होता था. इसके बाद 1920 में मद्रास स्टॉक एक्सचेंज, 1930 में इंदौर स्टॉक एक्सचेंज, 1943 में हैदराबाद और 1947 में दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई.
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा बदलाव 1986 में आया, जब सेंसेक्स लॉन्च किया गया. 30 प्रमुख कंपनियों पर आधारित इस इंडेक्स का बेस लेवल 100 अंक रखा गया था. बाद में यही इंडेक्स भारतीय बाजार की दिशा बताने वाला सबसे बड़ा पैमाना बन गया.
इसके दो साल बाद 1988 में Securities and Exchange Board of India यानी SEBI की स्थापना हुई. शुरुआत में यह केवल एक गैर-वैधानिक संस्था थी, लेकिन 1992 में इसे कानूनी अधिकार दिए गए और बाजार की निगरानी की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई.
1994 में National Stock Exchange of India यानी NSE की शुरुआत हुई. इसे शेयर बाजार में ज्यादा पारदर्शिता और आधुनिक ट्रेडिंग सिस्टम लाने के उद्देश्य से बनाया गया था. NSE ने शुरुआत में इक्विटी और होलसेल डेट मार्केट में कारोबार शुरू किया, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग 2000 से शुरू हुई.
ये था शेयर बाजार का इतिहास. अब जानते हैं कि मौजूदा दौर के लोगों के लिए आखिर शेयर बाजार का मतलब क्या है और इसमें निवेश कैसे किया जाता है. चलिए अब समझते हैं स्टॉक मार्केट की पूरी ABCD...
शेयर बाजार ऐसी जगह है जहां रोज कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. यहां वही कंपनियां शामिल होती हैं जो स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होती हैं. जब कोई कंपनी पहली बार जनता को अपने शेयर बेचती है, तो उसे IPO कहा जाता है. इसी के जरिए कंपनी बाजार से पैसा जुटाती है.
शेयरों की खरीद-बिक्री सीधे नहीं होती, बल्कि स्टॉक ब्रोकर के जरिए की जाती है. कोई भी शेयर तभी खरीदा या बेचा जा सकता है जब वह स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो.
आसान भाषा में समझें तो शेयर बाजार एक ऐसी जगह है जहां लोग बड़ी-बड़ी कंपनियों में छोटा-छोटा हिस्सा खरीदते और बेचते हैं. मान लीजिए कोई कंपनी अपना बिजनेस बड़ा करना चाहती है और उसे पैसों की जरूरत है. ऐसे में वह कंपनी लोगों से पैसा लेने के बदले उन्हें अपने बिजनेस में थोड़ा हिस्सा दे देती है. इसी हिस्से को शेयर कहा जाता है.
अब अगर कंपनी आगे चलकर अच्छा काम करती है, तो उसके शेयर की कीमत बढ़ सकती है और शेयर खरीदने वाले लोगों को फायदा हो सकता है. लेकिन अगर कंपनी का काम खराब होता है, तो शेयर की कीमत गिर भी सकती है और उससे लोगों को नुकसान हो सकता है.
स्टॉक एक्सचेंज ऐसी जगह होती है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. आसान भाषा में समझें तो यह शेयरों की मंडी होती है. जैसे लोग बाजार में जाकर सामान खरीदते और बेचते हैं, वैसे ही यहां लोग कंपनियों के शेयर खरीदते और बेचते हैं.
जब कोई इंसान किसी कंपनी का शेयर खरीदना चाहता है, तो उसका ऑर्डर स्टॉक एक्सचेंज तक पहुंचता है. वहां कोई दूसरा इंसान वही शेयर बेच रहा होता है, तब जाकर सौदा पूरा होता है. यानी स्टॉक एक्सचेंज खरीदार और बेचने वाले के बीच का प्लेटफॉर्म होता है.
भारत में सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज Bombay Stock Exchange और National Stock Exchange हैं. जिसे आप BSE और NSE के रूप में जानते हैं. देश में ज्यादातर शेयरों की खरीद-बिक्री यहीं पर होती है. आसान शब्दों में कहें तो अगर शेयर बाजार एक बड़ा शॉपिंग मॉल है, तो स्टॉक एक्सचेंज उस मॉल की दुकान की तरह है जहां असली खरीद-बिक्री होती है.
ऊपर आपने समझ लिया कि शेयर क्या होता है और स्टॉक एक्सचेंज क्या होता है. अब आते हैं बड़े सवाल पर कि आखिर स्टॉक एक्सचेंज के पास शेयर आते कहां से हैं. दरअसल, जब किसी कंपनी को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए पैसों की जरूरत होती है, तब वह फैसला करती है कि अब वह आम लोगों से पैसा जुटाएगी.
यही पैसा जुटाने के लिए कंपनियां सबसे पहले IPO (Initial public offering) लाती हैं. IPO यानी जब कंपनी पहली बार अपने शेयर जनता को बेचती है. उस समय लोग कंपनी से सीधे शेयर खरीदते हैं. IPO खुलने और बंद होने के लिए एक तारीख होती है. आम लोगों को इसी तय तारीख के बीच IPO खरीदना होता है. हालांकि, IPO की इस खरीद के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट का होना जरूरी होता है. IPO पूरा होने के बाद कंपनी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो जाती है.
फिर इसके बाद शेयर कंपनी के पास नहीं रहते, बल्कि जिन लोगों को IPO मिलता है उनके पास होते हैं. वे आपस में उन शेयरों की खरीद-बिक्री करते हैं. यानी स्टॉक एक्सचेंज पर ज्यादातर समय कंपनी नहीं, बल्कि निवेशक एक-दूसरे को शेयर बेच रहे होते हैं.
अब ये डीमैट अकाउंट क्या होता है और क्यों जरूरी होता है?
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है. आसान भाषा में समझें तो यह एक डिजिटल लॉकर की तरह होता है, जिसमें आपके खरीदे गए शेयर सुरक्षित रखे जाते हैं.
जैसे बैंक अकाउंट में पैसे रखे जाते हैं, वैसे ही डीमैट अकाउंट में शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड और सरकारी सिक्योरिटी रखी जाती हैं. बिना डीमैट अकाउंट के आप IPO में निवेश भी नहीं कर सकते.
आज के समय में शेयर बाजार में होने वाली सारी खरीद-बिक्री ऑनलाइन होती है. ऐसे में शेयरों को कागज के बजाय डिजिटल रूप में रखने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है.
इसके जरिए आप-
डीमैट अकाउंट किसी डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट यानी DP के जरिए खोला जाता है. यह DP कोई भी, बैंक, स्टॉक ब्रोकर या फाइनेंशियल कंपनी हो सकती है. हर DP के चार्ज अलग-अलग होते हैं. कहीं ब्रोकरेज कम होता है तो कहीं सालाना फीस ज्यादा हो सकती है. इसलिए अकाउंट खोलने से पहले चार्ज जरूर चेक कर लें.
डीमैट अकाउंट खोलने के लिए आपको कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट देने होते हैं.
इनमें शामिल हैं-
अगर आप बैंक या ब्रोकर के ऑफिस जाकर अकाउंट खोलना चाहते हैं तो यह प्रोसेस फॉलो करें-
Step 1: DP चुनें
सबसे पहले बैंक या ब्रोकर चुनें जहां आप अकाउंट खोलना चाहते हैं.
Step 2: फॉर्म भरें
इसके बाद डीमैट अकाउंट ओपनिंग फॉर्म भरकर जमा करें.
Step 3: डॉक्यूमेंट जमा करें
साथ में जरूरी डॉक्यूमेंट भी जमा करने होंगे.
Step 4: एग्रीमेंट साइन करें
DP आपको एक एग्रीमेंट देगा. इसे ध्यान से पढ़ने के बाद साइन करें.
Step 5: अकाउंट एक्टिव होगा
सारी जानकारी वेरिफाई होने के बाद आपका डीमैट अकाउंट खुल जाएगा.
अब घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप से भी डीमैट अकाउंट खोला जा सकता है.
ऑनलाइन प्रोसेस आसान भाषा में समझें-
1. वेबसाइट पर जाएं
जिस बैंक या ब्रोकर के साथ अकाउंट खोलना चाहते हैं उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या उसके ऐप को अपने फोन में इंस्टॉल कर लें.
2. Demat Account ऑप्शन चुनें
वेबसाइट से डीमैट अकाउंट खोल रहे हैं तो वेबसाइट पर जाकर Demat Account Open पर क्लिक करें. अगर ऐप से डीमैट अकाउंट खोलना चाह रहे हैं तो उसमें साइन-अप करें.
3. जानकारी भरें
अपना नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और बाकी जरूरी जानकारी भरें.
4. डॉक्यूमेंट अपलोड करें
आधार, पैन और फोटो अपलोड करें.
5. वीडियो KYC या वेरिफिकेशन करें
कंपनी आपकी जानकारी वेरिफाई करेगी. इसके लिए कॉल, OTP या वीडियो KYC हो सकती है.
6. अकाउंट एक्टिव होगा
सारी जानकारी सही मिलने के बाद आपका डीमैट अकाउंट एक्टिव कर दिया जाएगा.
अकाउंट खुलने के बाद आपको मिलेगा-
इसके जरिए आप अपने अकाउंट में लॉगिन करके शेयर खरीद और बेच सकते हैं.
अब शेयर खरीदना और बेचना कैसे है वो समझिए-
मान लीजिए आप SBI का शेयर खरीदना चाहते हैं.
Step 1: ट्रेडिंग ऐप खोलें
जैसे किसी ब्रोकर का ऐप या वेबसाइट.
Step 2: कंपनी सर्च करें
सर्च बॉक्स में SBI लिखें.
Step 3: शेयर प्राइस देखें
मान लीजिए एक शेयर की कीमत ₹1000 है.
Step 4: Quantity डालें
अगर आप 2 शेयर खरीदना चाहते हैं, तो कुल रकम होगी:
₹1000 × 2 = ₹2,000
Step 5: Buy बटन दबाएं
ऑर्डर कन्फर्म करते ही आपके बैंक अकाउंट से पैसा कट जाएगा.
Step 6: शेयर डीमैट अकाउंट में आ जाएंगे
कुछ समय बाद वे शेयर आपके डीमैट अकाउंट में दिखने लगेंगे. अब आप उस कंपनी के छोटे हिस्सेदार बन गए.
मान लीजिए कुछ महीनों बाद उसी शेयर की कीमत ₹1000 से बढ़कर ₹1,900 हो गई.
अब अगर आप अपने 2 शेयर बेच देते हैं तो-
₹1,900 × 2 = ₹3,800
यानी आपने ₹2,000 लगाए थे और ₹3,800 मिले.
आपका प्रॉफिट-
₹1800 (प्रॉफिट से ब्रोकरेज और टैक्स कटेगा, जो बेहद मामूली रकम होती है.)
1. Market Order
इसमें शेयर तुरंत उस समय चल रही कीमत पर खरीद या बेच दिया जाता है. उदाहरण के लिए इसे ऐसे समझिए कि अगर शेयर अभी ₹500 पर ट्रेड हो रहा है, तो आपका ऑर्डर लगभग उसी कीमत पर पूरा हो जाएगा.
2. Limit Order
इसमें आप अपनी पसंद की कीमत तय करते हैं. यानी कि अगर अभी शेयर ₹500 का है, लेकिन आप उसे ₹480 पर खरीदना चाहते हैं. तो आप ₹480 का लिमिट ऑर्डर लगा सकते हैं. अगर शेयर उस कीमत तक आया, तभी खरीदारी होगी. नहीं तो आपका ऑर्डर अपने आप कैंसल हो जाएगा और आपका होल्ड किया हुआ पैसा आपके डीमैट अकाउंट में वापिस आ जाएगा.
सबसे पहले एक बात समझ लीजिए- डीमैट अकाउंट में सीधे पैसा नहीं रखा जाता. पैसा आपके ट्रेडिंग अकाउंट में जाता है, जो आपके बैंक अकाउंट और डीमैट अकाउंट से जुड़ा होता है. डीमैट अकाउंट सिर्फ शेयर रखने का काम करता है.
पैसा डालने का आसान तरीका-
मान लीजिए आपके पास ₹10,000 हैं और आप शेयर खरीदना चाहते हैं.
Step 1: ट्रेडिंग ऐप खोलें
जिस ऐप से आप शेयर खरीदते हैं, उसे खोलें.
Step 2: Add Funds या Funds ऑप्शन चुनें
वहां “Add Money” या “Add Funds” का ऑप्शन मिलेगा.
Step 3: रकम डालें
जैसे ₹10,000 डालना है.
Step 4: बैंक अकाउंट चुनें
जो बैंक अकाउंट आपके ट्रेडिंग अकाउंट से लिंक है, उसे चुनें.
Step 5: पेमेंट करें
UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड से पेमेंट कर सकते हैं.
पैसा आपके ट्रेडिंग अकाउंट में आ जाएगा और अब आप शेयर खरीद सकते हैं.
शेयर बेचने के बाद पैसा पहले आपके ट्रेडिंग अकाउंट में आता है. यह पैसा आमतौर पर अगले कारोबारी दिन तक दिखने लगता है.
मुनाफा बैंक अकाउंट में कैसे निकालें?
इसके बाद पैसा आपके लिंक बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएगा.
यहां ये समझना जरूरी है कि अगर आपने आज शेयर बेचा है, तो कई बार पूरा पैसा तुरंत निकालने की अनुमति नहीं मिलती. सेटलमेंट प्रोसेस पूरा होने के बाद ही पैसा बैंक में भेजा जा सकता है. इसके लिए कम से कम एक कारोबारी दिन लगता है.
तो कुल मिलाकर ये है शेयर बाजार की पूरी कहानी. जहां आप सही एक्सपर्ट की सलाह से अपने पैसे का निवेश सही कंपनी के स्टॉक में कर के लॉन्ग टर्म में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. अगले अध्याय में हम आपको समझाएंगे कि आखिर स्टॉक की कीमत ऊपर-नीचे क्यों होती है, डिविडेंड क्या होता है, स्टॉक स्प्लिट का मतलब क्या होता है और कंपनियां अपने शेयरधारकों को बोनस शेयर क्यों देती हैं.