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आपने बार-बार आईपीओ (IPO) से पैसे जुटाने के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या प्री-आईपीओ (Pre-IPO) से पैसे जुटाने के बारे में सुना है? अक्सर कंपनियां अपना आईपीओ लाने से पहले प्री-आईपीओ के लिए जाती हैं. दरअसल, इसके जरिए कंपनी बाजार में लिस्ट होने से पहले पैसे जुटाना चाहती है. आइए जानते हैं क्या होता है प्री-आईपीओ फंडिंग राउंड और इसके लिए कंपनियां क्यों जाती हैं. साथ ही समझते हैं इसमें पैसे लगाना फायदे का सौदा है या नुकसान का.
जैसा कि नाम से ही समझ आ रहा है कि इस फंडिंग राउंड में आईपीओ से पहले ही पैसा जुटाया जाता है. बता दें कि आईपीओ के जरिए तमाम कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होती हैं, ताकि वह पब्लिक से पैसे जुटा सकें. प्री-आईपीओ फंडिंग राउंड में पैसे लगाने वाले निवेशकों पर कुछ दिन का लॉक-इन पीरियड भी लागू होता है. अगर आप कंपनी के प्रमोटर्स में से कोई हैं तो आमतौर पर ये लॉक-इन पीरियड 18 महीनों का होगा, जबकि नॉन-प्रमोटर्स के लिए यह लॉक-इन पीरियड 6 महीनों का होता है. हालांकि, यह लॉक-इन पीरियड कम-ज्यादा भी हो सकता है.
प्री-आईपीओ के जरिए पैसे जुटाने से कंपनी को अक्सर ये फायदा होता है कि उसे बेहतर वैल्युएशन मिल जाती है. ऐसे में कंपनी के लिए आगे का सफर और अच्छा हो जाता है. आईपीओ लाने तक कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल कर के अपने बिजनेस ऑपेरशन्स को बेहतर कर सकती है, जिससे आईपीओ को अच्छा रेस्पॉन्स मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आने और आईपीओ के सब्स्क्राइब होने, लिस्ट होने तमाम चीजों पर बाजार के सेंटिमेंट का बहुत असर पड़ता है.
स्टॉक ब्रोकिंग फर्म अपस्टॉक्स के अनुसार प्री-आईपीओ में कोई भी व्यक्ति पैसा लगा सकता है. हालांकि, पहले यह सिर्फ हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल तक के लिए ही सीमित था. आज के वक्त में भले ही आप छोटे निवेशक हैं या बड़े, भले ही आप रिटेल निवेशक हैं, आप प्री-आईपीओ में पैसे लगा सकते हैं. अगर आप भी आईपीओ में पैसा लगाना चाहते हैं तो आपके पास एक बैंक खाता होना चाहिए और साथ ही एक डीमैट अकाउंट होना चाहिए. प्री-आईपीओ में पैसे लगाने के लिए आपको जरूरत होगी एक ब्रोकर की. ब्रोकर आपके और कपंनी के बीच में एक कड़ी की तरह काम करेगा. आप ब्रोकर को पैसे देंगे, वह कंपनी को पैसे ट्रांसफर करेगा, कंपनी से शेयर आपके डीमेट खाते में आ जाएंगे. हालांकि, ब्रोकर की मदद लेने के लिए आपको उसे कुछ ब्रोकरेज फीस चुकानी होगी. कौन सी कंपनी प्री-आईपीओ ला रही है, ये जानने के लिए आपको डेली न्यूज पर नजर रखनी होगी.
अगर आप प्री-आईपीओ में पैसे लगाते हैं तो इसका बड़ा फायदा ये है कि आपको अपने निवेश पर तगड़ा रिटर्न मिल सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्री-आईपीओ राउंड में आईपीओ की तुलना में सस्ती कीमत पर शेयर मिलते हैं. यानी आईपीओ आने के बाद जब आप शेयर बेचेंगे तो आपको बहुत ही शानदार रिटर्न मिल सकता है. यानी एक तो आपको शेयर सस्ता मिलेगा, दूसरा आपको रिटर्न ज्यादा मिलेगा. वहीं रिटेल निवेशकों के लिए आईपीओ में सिर्फ 2 लाख रुपये तक का निवेश सीमित रहता है, जबकि प्री-आईपीओ में आप ज्यादा भी निवेश कर सकते हैं. अगर किसी कंपनी का आईपीओ ओवरसब्सक्राइब हो जाता है तो ड्रॉ होता है और जरूरी नहीं कि उसमें आपका भी नंबर लगे और आपको शेयर मिले. वहीं प्री-आईपीओ से आपको शेयर मिलना तय होता है.
अगर आप किसी कंपनी के प्री-आईपीओ में पैसा लगाते हैं तो इसका सबसे बड़ा नुकसान ये हो सकता है कि आपको भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. हो सकता है कि आईपीओ आने के बाद कंपनी का शेयर उम्मीद के मुताबिक ना चढ़े और आपको नुकसान झेलना पड़े. यह भी हो सकता है कि आईपीओ आने तक कंपनी किसी रेगुलेशन पर खरी ना उतर पाने की वजह से उसके आईपीओ को रोकते हुए आगे बढ़ाना पड़े. ऐसे में निवेशक को नुकसान झेलना पड़ सकता है. हालांकि, किसी स्टार्टअप या कंपनी के शुरुआती दौर में निवेश की तुलना में प्री-आईपीओ में निवेश काफी कम रिस्की होता है. वहीं आईपीओ की तुलना में अक्सर ही प्री-आईपीओ में निवेश करना फायदेमंद रहता है.