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Jackson Hole Meeting: पूरी दुनिया के शेयर बाजार में इस समय उठा-पटक देखा जा रहा है. ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी के संकेत साफ-साफ दिख रहे हैं. दूसरी तरफ महंगाई आसमानी स्तर पर है. अभी तक फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपियन सेंट्रल बैंक जैसे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तरफ से इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी को लेकर जो फैसले लिए गए हैं, उसका महंगाई पर आंशिक असर दिख रहा है. इन तमाम परिस्थितियों के बीच इस सप्ताह अमेरिका में एक बहुत बड़ा इवेंट होने जा रहा है जिसका शेयर बाजार और ग्लोबल इकोनॉमी पर बड़ा असर दिखाई देगा.
26 अगस्त को जैक्सन होल मीटिंग (Jackson Hole Meeting) होने वाली है. यह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आर्थिक संगोष्ठी (US Federal economic symposium) है. इस बैठक में अपने संबोधन के दौरान फेडरल चीफ जेरोम पॉवेल क्या बयान देते हैं, उसका बाजार पर गंभीर असर होगा. शुक्रवार को वे महंगाई, जीडीपी डेटा समेत अन्य आर्थिक कारकों पर खुलकर अपनी बात सामने रखेंगे.
जैक्सन होल मीटिंग को लेकर आनंद राठी वेल्थ के डिप्टी सीईओ फिरोज अजीज (Feroze Azeez, Deputy CEO, Anand Rathi Wealth)का कहना है कि महंगाई को लेकर जेरोम पॉवेल क्या बयान देते हैं, वह काफी महत्वपूर्ण होगा. पिछले सप्ताह जारी फेडरल रिजर्व मिनट्स में साफ-साफ कहा गया था कि जब तक महंगाई पर काबू नहीं पा लिया जाता है, तब तक इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी जारी रहेगी. हालांकि, इसका रुख थोड़ा नरम हो सकता है. इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी को लेकर अग्रेसिव रुख से मंदी का खतरा बढ़ रहा है. ऐसे में फेडरल रिजर्व किस दिशा में आगे बढ़ेगा इसपर बाजार की नजर होगी.
दूसरा महत्वपूर्ण फैक्टर डॉलर मूवमेंट है. इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी के कारण दुनिया की अन्य करेंसी के मुकाबले डॉलर मजबूत हो रहा है. डॉलर इंडेक्स फिर से 109 के करीब पहुंच गया है. ऐसे में जैक्सन होल मीटिंग में इंट्रेस्ट रेट को लेकर जो कमेंटरी होगी, उसका असर डॉलर पर होगा. बाजार इस समय इंट्रेस्ट रेट में 50 बेसिस प्वाइंट्स और 75 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी को लेकर बंटा हुआ है.
डॉलर मजबूत होने के कारण बॉन्ड यील्ड में तेजी आने लगती है. वर्तमान में यह 3 फीसदी के पार पहुंच चुका है. अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड मजबूत होने से डोमेस्टिक मार्केट से कैपिटल आउटफ्लो होगा.
फिरोज अजीज का कहना है कि अगर इंट्रेस्ट रेट को लेकर फेडरल रिजर्व की तरफ से अग्रेसिव कमेंटरी की जाती है तो शेयर बाजार पर नकारात्मक असर होगा. डॉलर में और मजबूती आएगी और डोमेस्टिक मार्केट से कैपिटल आउटफ्लो देखने को मिल सकता है.