भारतीय फार्मा सेक्टर पर कितना होगा अमेरिका के 100% टैरिफ का असर, जानिए बड़े शेयरों का हाल

US Tariff Pharma: भारतीय फार्मा शेयरों में शुक्रवार को 7% तक गिरावट आई. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. जेनेरिक दवाएं फिलहाल इस दायरे से बाहर हैं, लेकिन भविष्य में इन पर असर की आशंका से निवेशकों में घबराहट बढ़ी है.
भारतीय फार्मा सेक्टर पर कितना होगा अमेरिका के 100% टैरिफ का असर, जानिए बड़े शेयरों का हाल

शुक्रवार को भारतीय फार्मा शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. निवेशकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाने की बात कही. यह टैरिफ उन कंपनियों पर लागू होगा जिनकी अमेरिका में कोई सक्रिय या निर्माणाधीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट नहीं है. यह नियम 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा.

हालांकि भारत की दवा कंपनियों पर इसका फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारी ज्यादातर निर्यात जेनेरिक दवाओं में होता है, जो इस टैरिफ से बाहर रखी गई हैं. इसके बावजूद, बाजार में घबराहट का माहौल बन गया और निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.14% गिर गया.

भारत का फार्मा निर्यात और अमेरिका की भूमिका

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भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है. यह भारत के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 34.5% हिस्सा है. अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और यहां ज्यादातर जेनेरिक दवाएं तथा नॉन-पेटेंटेड बायोसिमिलर दवाएं बेची जाती हैं.

देश की बड़ी कंपनियां जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, ज़ाइडस, सिप्ला, ल्यूपिन, बायोकॉन और औरोबिंदो फार्मा अमेरिका को प्रमुख निर्यातक हैं. इन कंपनियों ने साफ कहा है कि वे पेटेंटेड या ब्रांडेड दवाएं अमेरिका को नहीं बेचते, बल्कि जेनेरिक पर ही उनका फोकस है.

क्यों हुआ इतना हंगामा?

ट्रंप का यह कदम दरअसल एक राजनीतिक संदेश भी है. अमेरिका के राष्ट्रपति को Section 232 of the US Trade Expansion Act, 1962 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ लगाने का अधिकार है. इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए यह निर्णय लिया गया है.

फिलहाल टैरिफ केवल ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर है, लेकिन बाजार को डर है कि आने वाले समय में यह नियम जेनेरिक दवाओं पर भी लागू हो सकता है. यही आशंका निवेशकों को परेशान कर रही है और इस वजह से शेयरों में बिकवाली बढ़ी.

बड़ी कंपनियों के लिए राहत

बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियों जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और ल्यूपिन की अमेरिका में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं. ये कंपनियां वहां पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन करती हैं, जिससे उनके ऊपर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा.

इसके अलावा, कई कंपनियां अमेरिका में नए अधिग्रहण भी कर रही हैं, ताकि संभावित टैरिफ जोखिम को कम किया जा सके. ऐसे में कहा जा सकता है कि बड़ी कंपनियां इस संकट से खुद को बचाने की स्थिति में हैं.

छोटी कंपनियों पर असर की चिंता

समस्या उन छोटी कंपनियों के लिए हो सकती है जिनकी अमेरिका में अपनी फैक्ट्री नहीं है. चूंकि जेनेरिक दवाओं पर भी निर्माता का नाम और लेबल होता है, इसलिए अमेरिकी कस्टम्स उन्हें ब्रांडेड उत्पाद मान सकता है. इससे इन कंपनियों को अतिरिक्त सवाल-जवाब और क्लियरेंस की दिक्कत हो सकती है.

इसके अलावा, कुछ भारतीय कंपनियां उन यूरोपीय कंपनियों को भी API (Active Pharmaceutical Ingredients) यानी कच्चा माल सप्लाई करती हैं जो अमेरिका को ब्रांडेड दवाएं निर्यात करती हैं. ऐसे मामलों में अप्रत्यक्ष असर जरूर देखने को मिल सकता है.

निवेशकों की चिंता और स्टॉक्स में गिरावट

शुक्रवार को फार्मा सेक्टर के ज्यादातर शेयर लाल निशान में बंद हुए. लॉरस लैब्स 7.15% टूटा, बायोकॉन 4.78% गिरा, ज़ाइडस 4.35% नीचे गया, डिविस लैब्स 3.76% टूटा और ग्लेनमार्क फार्मा 2.89% गिरा.

इस साल अब तक निफ्टी फार्मा इंडेक्स 8.14% नीचे आ चुका है, जबकि पिछले एक साल में इसमें 8.55% की गिरावट रही है. इसके मुकाबले निफ्टी इंडेक्स ने इस साल 4.27% की बढ़त दर्ज की है.

अमेरिका और भारतीय उपभोक्ताओं पर असर

अगर जेनेरिक दवाओं पर भी टैरिफ लगाया गया, तो इसका नुकसान सिर्फ भारतीय कंपनियों को ही नहीं बल्कि अमेरिकी मरीजों को भी उठाना पड़ेगा. क्योंकि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं. ऐसे में दवाओं की कीमतें अमेरिका में काफी बढ़ जाएंगी, जिससे वहां के मरीजों की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा. दूसरी ओर भारतीय कंपनियों की आय पर भी दबाव बढ़ेगा.

खबर से जुड़े FAQs

Q1. अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय फार्मा पर क्यों पड़ा?

निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में जेनेरिक दवाओं पर भी टैरिफ लगाया जा सकता है.

Q2. भारतीय कंपनियां अमेरिका को किस तरह की दवाएं निर्यात करती हैं?

ज्यादातर कंपनियां जेनेरिक और नॉन-पेटेंटेड बायोसिमिलर दवाएं निर्यात करती हैं.

Q3. निफ्टी फार्मा इंडेक्स कितना गिरा?

शुक्रवार को निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.14% टूटा और लॉरस लैब्स जैसे शेयरों में 7% तक गिरावट आई.

Q4. कौन सी भारतीय कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग करती हैं?

सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और ल्यूपिन जैसी कंपनियों की अमेरिका में अपनी यूनिट्स हैं.

Q5. अगर जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगा तो असर क्या होगा?

इससे भारतीय कंपनियों की आय घटेगी और अमेरिकी मरीजों को दवाएं महंगी मिलेंगी.

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