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ट्रंप के दावे और ईरान के इनकार ने गिरा दिया अमेरिकी बाज़ार.
दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट से आज अच्छी खबर नहीं आई है. मंगलवार की सुबह जैसे ही अमेरिकी बाजार खुले, निवेशकों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं. जो बाजार सोमवार को जोश में दिख रहा था, वह मंगलवार को औंधे मुंह गिर पड़ा. डॉव जोन्स (Dow Jones) में जहां 100 अंकों से ज्यादा की गिरावट दिखी, वहीं नैस्डैक (Nasdaq) और S&P 500 भी 1 फीसदी तक टूट गए.
बाजार की इस गिरावट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब तक दुनिया के नक्शे पर युद्ध के बादल मंडराते रहेंगे, तब तक निवेशकों का पैसा सुरक्षित नहीं है. हर सुबह एक नई अनिश्चितता के साथ शुरू हो रही है. कल तक जो उम्मीदें आसमान छू रही थीं, आज वे जमीन पर आ गिरी हैं. आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि मुनाफे की हरियाली मातम में बदल गई? चलिए समझते हैं बाजार की इस उथल-पुथल की असली वजह.
बाजार की इस गिरावट के पीछे एक बड़ी कूटनीतिक 'उलटफेर' छिपी है. सोमवार को बाजार इसलिए उछला था क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए बहुत ही सकारात्मक बातचीत हुई है. निवेशकों को लगा कि अब युद्ध थम जाएगा और कारोबार पटरी पर लौट आएगा.
लेकिन मंगलवार की सुबह होते-होते सारी उम्मीदें टूट गईं. ईरान ने साफ कह दिया कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है. जैसे ही यह खबर आई, बाजार का मूड बिगड़ गया. ऊपर से इजरायल और ईरान के बीच फिर से हमले शुरू होने की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया. अब निवेशकों को लग रहा है कि वे एक ऐसी भूलभुलैया में फंस गए हैं जहां से निकलने का रास्ता फिलहाल नहीं दिख रहा.
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शेयर बाजार के गिरने की दूसरी बड़ी वजह है कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आया अचानक उछाल. मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. वहीं वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) में भी 4 फीसदी की तेजी आई और यह 92 डॉलर के ऊपर ट्रेड करने लगा.
जब भी तेल महंगा होता है, तो उसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. निवेशकों को डर है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी. इसी डर की वजह से लोगों ने शेयरों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों पर लगाना शुरू कर दिया है.
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बाजार को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है टेक्नोलॉजी सेक्टर से. नैस्डैक, जिसमें ज्यादातर टेक कंपनियां हैं, सबसे ज्यादा गिरावट का शिकार हुआ. दिग्गज टेक कंपनियों के शेयर कुछ इस तरह टूटे:
हालांकि, इस अंधेरे के बीच एप्पल (Apple) और वेरिज़ोन (Verizon) जैसे कुछ शेयर मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहने में कामयाब रहे, लेकिन वे पूरे बाजार का बोझ नहीं उठा सके.
अमेरिकी बाजार की इस गिरावट ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि ग्लोबल राजनीति और कच्चे तेल की कीमतें ही इस वक्त बाजार की दिशा तय कर रही हैं. जब तक मिडिल ईस्ट का संकट किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचता, तब तक वॉल स्ट्रीट पर इसी तरह की उथल-पुथल बनी रहेगी. निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे केवल अफवाहों पर ध्यान न दें और बाजार की हकीकत को समझकर ही अपना अगला कदम उठाएं. फिलहाल, शांति की खबरों पर संदेह और महंगे तेल ने बाजार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है.
Q: अमेरिकी बाजार में नैस्डैक और S&P 500 क्यों गिरे?
A: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ईरान द्वारा शांति वार्ता की खबरों को खारिज करने के बाद निवेशकों में असुरक्षा बढ़ गई, जिससे बाजार गिर गया.
Q: कच्चे तेल की कीमतों का बाजार पर क्या असर हुआ?
A: ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर के पार पहुंच गया. तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर पैदा होता है, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है.
Q: किस टेक कंपनी के शेयर में सबसे ज्यादा गिरावट आई?
A: दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के शेयर में 2.74% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे नैस्डैक इंडेक्स पर दबाव बढ़ा.
Q: क्या डोनाल्ड ट्रंप के बयान का असर बाजार पर पड़ा?
A: हां, सोमवार को ट्रंप के सकारात्मक बयान से बाजार चढ़ा था, लेकिन मंगलवार को जब ईरान ने इस दावे को गलत बताया, तो बाजार धड़ाम से गिर गया.
Q: क्या बाजार में गिरावट का दौर जारी रहेगा?
A: मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक जोखिम अभी भी ऊंचे बने हुए हैं. तेल की कीमतें और युद्ध के हालात ही तय करेंगे कि आगे बाजार किधर जाएगा.