&format=webp&quality=medium)
ABSL AMC के CEO ए. बालासुब्रमण्यम ने कहा टाइमिंग नहीं टाइम इन मार्केट पर करें फोकस.
US-Iran War Impact: अमेरिका-ईरान तनाव, महंगे क्रूड और FII बिकवाली के बीच बाजार दबाव में है. लेकिन इसी कमजोरी में निवेश का मौका भी छिपा है- आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड के MD & CEO ए. बालासुब्रमण्यम का मानना है कि यह समय डरने का नहीं, बल्कि समझदारी से पोजिशन बनाने का है.
वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष ने बाजार में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है. ट्रंप की बदलती नीतियों और “tit-for-tat” हालात के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाया है. अगर यह तनाव लंबा चलता है, तो दुनिया स्टैगफ्लेशन के दौर में जा सकती है- जहां ग्रोथ धीमी और महंगाई तेज होती है. इसका असर सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा. उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित होने से फूड इंफ्लेशन भी बढ़ सकता है, जो सीधे आम आदमी और इकोनॉमी पर दबाव डालेगा.
बढ़ती अस्थिरता के बीच RBI एक्टिव मोड में है. बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बनाए रखने और रुपये को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.
ये भी पढ़ें: अप्रैल में बाजार देगा मौका या धोखा? 10 साल की रिसर्च कहती है- मार्च में खरीदो, दिसंबर में कमाओ! क्या करें निवेशक?
| कदम | उद्देश्य | असर |
| ओवरनाइट डॉलर पोजीशन पर $100 मिलियन कैप | रुपये को स्थिर करना | डॉलर आउटफ्लो पर कंट्रोल |
| लिक्विडिटी सपोर्ट | बैंकिंग सिस्टम मजबूत रखना | बॉन्ड मार्केट को सहारा |
| करेंट अकाउंट मैनेजमेंट | तेल कीमतों के असर को सीमित करना | मैक्रो स्थिरता बनाए रखना |
हालांकि, तेल की ऊंची कीमतें और FII आउटफ्लो अभी भी भारत के भुगतान संतुलन (BoP) पर दबाव बनाए हुए हैं.
Watch Video:
यही इस कहानी का ट्विस्ट है. जहां एक तरफ डर है, वहीं दूसरी तरफ वैल्यूएशन आकर्षक हो गए हैं. निफ्टी का वैल्यूएशन पहले के मुकाबले सस्ता हुआ है, जो लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अवसर बन सकता है. बालासुब्रमण्यम के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं. ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस जैसे सेक्टर में ग्रोथ बनी हुई है.
डायरेक्ट स्टॉक्स की बजाय इस समय डायवर्सिफाइड अप्रोच ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है.
| निवेश विकल्प | क्यों पसंद? |
| फ्लेक्सी कैप फंड | मार्केट के हिसाब से एसेट अलोकेशन |
| मल्टी कैप फंड | सभी कैप सेगमेंट में एक्सपोजर |
| बैलेंस एडवांटेज फंड | इक्विटी-डेट बैलेंस, कम रिस्क |
| बैंकिंग सेक्टर | वैल्यूएशन आकर्षक, लॉन्ग टर्म थीम |
इस समय बाजार में डर ज्यादा है, लेकिन यही डर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए मौका बन सकता है. अगर आप डिसिप्लिन्ड तरीके से SIP या स्टैगर्ड निवेश करते हैं, तो गिरावट का फायदा उठाया जा सकता है.
शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रहेगी, लेकिन भारत की ग्रोथ स्टोरी बरकरार है. इसलिए फोकस “टाइमिंग” पर नहीं, “टाइम इन मार्केट” पर होना चाहिए.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Q1. क्या अभी बाजार में निवेश करना सही है?
हां, लेकिन एकमुश्त नहीं, चरणबद्ध (SIP/स्टैगर्ड) तरीके से.
Q2 Q2. सबसे बड़ा जोखिम क्या है?
लंबा युद्ध, ऊंचा क्रूड और लगातार FII बिकवाली.
Q3 Q3. कौन से सेक्टर मजबूत दिख रहे हैं?
ऑटो, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग.
Q4 Q4. क्या बैंकिंग सेक्टर में मौका है?
हां, वैल्यूएशन सस्ते हैं, लेकिन शॉर्ट टर्म अनिश्चितता बनी है.
Q5 Q5. डायरेक्ट स्टॉक्स या म्यूचुअल फंड?
इस समय म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जा रही है.