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अमेरिका-ईरान जंग के बीच IT इंडस्ट्री पर आई मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट. (Image Source-AI)
जब दो बड़े देशों के बीच युद्ध के बादल मंडराते हैं, तो उसका असर सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं रहता. आज अमेरिका और ईरान के बीच जो तनाव दिख रहा है, उसने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है. लेकिन इस बार खतरा सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक नहीं है. भारतीय IT इंडस्ट्री, जो दुनिया का 'बैकएंड' संभालती है, एक दोहरी मार झेल रही है, एक तरफ युद्ध का डर और दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत.
दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि IT सेक्टर के लिए आने वाला समय बड़े बदलावों वाला होगा. रिपोर्ट में एंथ्रोपिक (Anthropic) के डेटा का हवाला देते हुए बताया गया है कि कैसे AI अब थ्योरी से निकलकर असल दुनिया में कोडिंग और कस्टमर सर्विस जैसी नौकरियों को अपने कब्जे में ले रहा है.
युद्ध के हालातों ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है. पिछले कुछ समय में निफ्टी IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट देखी गई है. मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ युद्ध की वजह से नहीं है, बल्कि यह उस 'डर' का नतीजा है जिसे रिपोर्ट में 'Narrative Shock' कहा गया है. यानी लोगों को लग रहा है कि अब AI वाकई में इंसानी नौकरियों की जगह लेने लगा है.
| निफ्टी IT इंडेक्स गिरावट | करीब 15% (महीने भर में) |
| रेवेन्यू पर संभावित खतरा | 9-12% (अगले 4 साल में) |
| कोडिंग में AI का असर | 75% टास्क प्रभावित |
| कस्टमर सर्विस में असर | 70% टास्क प्रभावित |
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में सबसे बड़ी बात यह कही गई है कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग अब AI के हमले का मुख्य केंद्र (Ground Zero) बन गई है.
API कॉल्स का सच: रिपोर्ट बताती है कि AI प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली कुल 'API कॉल्स' में से 50% सिर्फ सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से जुड़ी हैं.
कोडिंग का बदलता स्वरूप: क्लाउड-नेटिव और नई कंपनियां अब पुराने तरीके से कोडिंग करने के बजाय AI एजेंट्स (जैसे Devin और Claude) का इस्तेमाल कर रही हैं.
एंट्री लेवल पर संकट: नई भर्तियों, खासकर जूनियर डेवलपर्स और ट्रेनीज के लिए दरवाजे धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं क्योंकि उनके हिस्से का बेसिक काम अब AI आसानी से कर लेता है.
रिपोर्ट में 'Greenfield' और 'Brownfield' कंपनियों के बीच का अंतर समझाया गया है.
नई कंपनियां (Greenfield): ये कंपनियां नई तकनीक पर बनी हैं, इसलिए ये AI को तुरंत अपना लेती हैं. OpenAI के टॉप 20 ग्राहकों में 90% ऐसी ही नई कंपनियां हैं.
पुरानी कंपनियां (Brownfield): भारतीय दिग्गज IT कंपनियां इसी श्रेणी में आती हैं. इनके पास 20-30 साल पुराने 'Legacy Systems' हैं. इन सिस्टम्स में AI फिट करना बहुत जटिल और खर्चीला काम है. इनके IT बजट का 60-80% हिस्सा तो सिर्फ पुराने सॉफ्टवेयर को चालू रखने (Maintenance) में खर्च हो जाता है.
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से क्लाइंट्स (विशेषकर अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियां) अपने बजट को लेकर सतर्क हो गई हैं.
डिस्क्रीशनरी खर्च में कटौती: कंपनियां नए और बड़े प्रोजेक्ट्स को फिलहाल टाल रही हैं.
लागत कम करने का दबाव: युद्ध की वजह से महंगाई बढ़ने के डर से क्लाइंट्स अब IT कंपनियों से भारी डिस्काउंट मांग सकते हैं, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आएगा.
अमेरिका-ईरान जंग ने जहां मार्केट में अस्थिरता पैदा की है, वहीं मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट ने IT सेक्टर की असली चुनौती यानी AI को बेनकाब कर दिया है. आने वाले 3-4 सालों में IT कंपनियों को न सिर्फ युद्ध के आर्थिक प्रभावों से निपटना होगा, बल्कि अपने रेवेन्यू मॉडल को भी पूरी तरह बदलना होगा.
कोडिंग अब सिर्फ हाथ से लिखने का काम नहीं रह गया है. जो कंपनियां अपने 'Legacy' बोझ को छोड़कर AI के साथ कदम मिलाएंगी, वही इस वैश्विक संकट में अपनी जगह सुरक्षित रख पाएंगी.