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NSE New Circular: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने शेयर बाजार में लिस्टेड ट्रेडर्स और ब्रोकर्स के लिए जरूरी सर्कुलर जारी किया है. इस सर्कुलर में ट्रेडर्स और ब्रोकर्स को 60 से ज्यादा शब्दों को इस्तेमाल ना करने की सलाह दी है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने सर्कुलर में कहा है कि सेबी या दूसरे रेगुलेटर्स के तहत ट्रेडर्स या ब्रोकर्स जिस भी कैटेगरी में लिस्टेड हैं, वो एंटिटी वही काम करें. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई शख्स सेबी के तहत ब्रोकर के तौर पर लिस्टेड है तो वो खुद को सलाहकार या एसेट मैनेजमेंट पर्सन के तौर पर ना दिखाए. ऐसे में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने 61 शब्दों को वर्गीकृत किया है, जिनके इस्तेमाल पर रोक है. यानी कि कोई भी शख्स जो सेबी से ब्रोकर या ट्रेडर के तौर पर रजिस्टर्ड है वो इन शब्दों को अपने नाम में इस्तेमाल नहीं कर सकता.
एक्सचेंज ने पाया कि ट्रेडिंग मेंबर्स/ऑथराइज्ड लोग एडवाइजर, एसेट/वेल्थ/पोर्टफोलियो मैनेजमेंट जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपने नाम के आगे कर रहे हैं. एक्सचेंज का कहना है कि ये भ्रामक है क्योंकि इससे क्लाइंट्स या इन्वेस्टर्स को गलत इशारा मिल सकता है.
इन्वेस्टर को ये लग सकता है कि उनका ट्रेडर या ब्रोकर इन्वेस्टमेंट की सलाह भी देता है. इन्वेस्टर को लग सकता है कि ट्रेडर ब्रोकिंग सर्विस के अलावा दूसरी सेवाएं भी दे रहा है और सेबी के तहत रजिस्टर्ड है. NSE ने एक लिस्ट जारी की है, जिन शब्दों के इस्तेमाल करने पर रोक लगी है. हालांकि एक्सचेंज ने कहा कि ये लिस्ट उदाहरण के तौर पर है और संपूर्ण नहीं है.
सर्कुलर में ये भी कहा गया है कि इस संबंध में, ट्रेडर्स या ब्रोकर्स को इस लिस्ट का पालन करने की सलाह दी जाती है. अगर, उनका नाम या उनकी कंपनी का नाम इस सूची में दिए गए शब्दों का इस्तेमाल करता है तो उसे रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और रेगुलेटर्स के रिकॉर्ड्स में खुद का नाम बदलवाना होगा.