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अहमदाबाद / केतन जोशी
हम अक्सर सुनते है की किसानों को उनकी पैदावार के अच्छे दाम नहीं मिलते और ग्राहकों को सस्ता नहीं मिलता. दशकों से इस समस्या पर हो-हल्ला होता है लेकिन किसान तो वहीं का वहीं है. लेकिन सभी जगह ऐसा नहीं है, किसानों में जागरुकता आई है और प्रगतिशील किसान खेत की मिट्टी में ही मजबूत भविष्य के अवसर गढ़ रहे हैं.
गुजरात के एक छोटे से गांव के किसानों ने तो एक ट्रेडिंग कंपनी खोलकर उसमें अपने उत्पादों को सीधे रिटेल में बेच रहे हैं. इन किसानों ने अपने साथ अन्य किसानों को भी जोड़ा है. गिर सोमनाथ के छोटे से जामवाला गांव के किसान अपनी ही कंपनी के माध्यम से खुद ही जैविक गुड़ बनाकर बाजार में बेच रहे हैं और नफा कमा रहे हैं.
सोमनाथ जिले के जामवाला गांव के सभी किसान खेती करते हैं. इस गांव में आम और गन्ने की खेती होती है. गन्ने से बनता है गुड़. यहां के किसान गन्ने को चीन मिल न भेजकर उसका गुड़ तैयार करते हैं. खेत में कोल्हू लगा होता है, जहां गुड़ तैयार होता है. अभी तक तो यह होता था कि किसान गन्ना उगाकर गुड़ तैयार करते फिर उसे बाजार ले जाकर आढ़तियों को बेचते थे. और आढ़ती उसे फुटकर विक्रेता बेचता और फुटकर विक्रेता ग्राहक को.

इस तरह किसान के गुड़ की मिठास का असली मजा तो आढ़ती और फुटकर व्यापारी उठा रहे हैं. बाजार में इस समय गुड़ 50 रुपये किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है, जबकि किसान को उसका 25 रुपया भी नहीं मिल रहा है.

लेकिन जामवाला के किसानों ने अपना गुड़ खुद ही सीधे ग्राहकों को बेचने का फैसला किया और जो मुनाफा बिचौलिए खा रहे थे उसका फायदा उठ ही उठाने लगे. गांव के राजेश भाई पाघडाल को विचार आया कि क्यों न किसान गुड़ खुद ही गुड़ को रिटेल में बेचें? इसके लिए उन्होंने दो साल पहले 'गिर कृषि वसंत प्रोड्यूज कंपनी' खोली.

शुरू में कंपनी से सिर्फ 10 किसान ही जुड़े. लेकिन आज 132 किसान इसके सदस्य बन चुके हैं. कंपनी ने अपने कारोबार की शुरूआत आम की बिक्री से की. पहले आम को यहां के किसान व्यापारी को 400 रुपये प्रति बॉक्स के हिसाब से बेचते थे, वही इस कंपनी के माध्यम से शहर में बेचा तो प्रति बॉक्स 650 से 700 रुपये मिलने लगे.

अब इस साल से किसान गुड़ का रिटेल व्यापार कर रहे हैं. बड़े व्यापारी जहां गुड़ का प्रति किलो सिर्फ 25 से 30 रुपये देते थे, शहर में वही गुड़ किसान 65 से 70 रुपये प्रति किलो बेच रहे हैं.

गिर कृषि वसंत प्रोड्यूस कंपनी के निदेशक राजेश पाघडाल ने बताया कि जब से किसान अपना उत्पाद खुद ही बेचने लगे हैं, तब से किसानों को दोगुना फायदा होने लगा है. उन्होंने बताया कि अब किसान मिलकर अपने उत्पाद की ब्रांडिंग भी कर रहे हैं.

राजेश ने बताया कि अगर कोई किसान उनकी कंपनी का सदस्य नहीं है फिर भी, कोई भी किसान उनके पास आता है तो वह उनका उत्पाद रिटेल में बेचने की जिम्मेदारी लेते हैं. उसमें से 15 फीसदी मुनाफा वे कंपनी को देते हैं ताकि, भविष्य में मार्केटिंग और दूसरे खर्च आसानी से हो पाएं.
उन्होंने बताया कि हम जो गुड़ तैयार करते हैं, वह पूरी तरह से शुद्ध है, उसमें किसी तरह की कोई मिलावट नहीं है. ऐसे गुड़ को वह ऑर्गेनिक गुड़ कहते हैं. इस तरह जहां किसानों को उनके उत्पाद के अच्छे दाम मिल रहे हैं, वहीं ग्राहकों को भी शुद्ध चीज मिल रही है.
अब तो कई व्यापारी भी उनसे गुड़ खरीद रहे हैं.