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Wipro Share Price: दिग्गज आईटी स्टॉक Wipro Ltd के शेयरों में सोमवार को जोरदार बिकवाली दिखी. विप्रो ने शुक्रवार को दिसंबर तिमाही के नतीजे जारी किए थे. नंबर्स अनुमान से कमजोर आए थे. कंपनी के मुनाफे और मार्जिन में गिरावट आई है. वहीं, रेवेन्यू 7% बढ़ा. कंपनी का चौथी तिमाही के लिए गाइडेंस बहुत मजबूत भी नहीं था, जिसके बाद ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से काफी बेयरिश रुख आया, जिसके चलते शेयर में आज बड़ी बिकवाली दिखी.
Wipro के शेयरों में नतीजों के बाद तेज दबाव देखने को मिला और स्टॉक करीब 10 फीसदी तक टूट गया. शेयर 9.5% तक टूटकर 241.75 के निचले स्तर पर गया था.
कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹3,119 करोड़ रहा, जबकि बाजार अनुमान करीब ₹3,435 करोड़ का था. यानी मुनाफा उम्मीद से कम आया. पिछली तिमाही के मुकाबले भी मुनाफा घटकर ₹3,246 करोड़ से ₹3,119 करोड़ रह गया. रेवेन्यू की बात करें तो Wipro की कंसो आय ₹23,556 करोड़ रही, जो अनुमानित ₹23,621 करोड़ से हल्की कम है. हालांकि QoQ आधार पर आय में सुधार दिखा और यह ₹22,697 करोड़ से बढ़कर करीब ₹23,556 करोड़ पहुंची.
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ब्रोकरेज हाउस भी कंपनी के आउटलुक को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं. ऐसा अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में IT सेक्टर में रिकवरी धीमी रह सकती है और Wipro की कमाई पर दबाव बना रह सकता है. कमजोर मार्जिन, डील बुकिंग में गिरावट और सीमित ग्रोथ गाइडेंस की वजह से ज्यादातर ब्रोकर्स ने टारगेट घटाए हैं.
CLSA ने Wipro पर Hold की रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 237 रुपये से घटाकर 231 रुपये कर दिया है.
Morgan Stanley ने Wipro को Equalweight से डाउनग्रेड कर Underweight कर दिया है. साथ ही टारगेट प्राइस 270 रुपये से घटाकर 242 रुपये कर दिया गया है.
Goldman Sachs ने भी Sell की रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस 255 रुपये से घटाकर 249 रुपये कर दिया है.
हालांकि UBS ने थोड़ा संतुलित नजरिया रखा है. UBS ने Neutral रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट 285 रुपये से बढ़ाकर 290 रुपये कर दिया है. UBS का कहना है कि Q3FY26 में नतीजे मामूली तौर पर उम्मीद से बेहतर रहे और मैनेजमेंट का फोकस अब ग्रोथ पर ज्यादा है. BFSI वर्टिकल में अच्छी ट्रैक्शन दिख रही है, यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट में मोमेंटम है और Capco को एनर्जी कंसल्टिंग बिजनेस में मजबूत मांग मिल रही है.
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Wipro की कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू दिसंबर तिमाही में 23,556 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के 22,697 करोड़ रुपये से करीब 3.8 फीसदी ज्यादा है, लेकिन यह बाजार अनुमान 23,621 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा. डॉलर टर्म्स में IT सर्विसेज रेवेन्यू 263 करोड़ डॉलर रहा, जो तिमाही आधार पर 1.2 फीसदी बढ़ा, हालांकि यह भी अनुमान से कम रहा. ऑपरेटिंग प्रॉफिट यानी EBIT 3,492 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के 3,680 करोड़ रुपये से करीब 5 फीसदी घटा और यह बाजार अनुमान से नीचे रहा. मार्जिन भी दबाव में रहे और 16.2 फीसदी से घटकर 14.8 फीसदी पर आ गए. इसका असर सीधे मुनाफे पर पड़ा. PAT 3,145 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के 3,262 करोड़ रुपये से करीब 3.6 फीसदी कम है. यानी रेवेन्यू में हल्की बढ़त के बावजूद प्रॉफिटेबिलिटी कमजोर रही.
कंपनी की कुल बुकिंग 3,335 मिलियन डॉलर रही, जो कॉन्स्टेंट करेंसी में सालाना आधार पर करीब 5.7 फीसदी घटी है. बड़ी डील्स की बुकिंग 871 मिलियन डॉलर रही, जिसमें सालाना आधार पर करीब 8.4 फीसदी की गिरावट आई है. इससे साफ है कि नए बड़े प्रोजेक्ट्स के फ्लो में फिलहाल कमजोरी बनी हुई है. कर्मचारियों का वॉलंटरी एट्रिशन 14.2 फीसदी रहा, जो IT कंपनियों के लिए एक अहम मैट्रिक होता है और कॉस्ट कंट्रोल के लिहाज से इसे लगातार मॉनिटर किया जाता है.
Wipro ने Q4 के लिए बहुत आक्रामक गाइडेंस नहीं दिया है. कंपनी का कहना है कि मार्च तिमाही में IT सर्विसेज रेवेन्यू में कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर 0 से 2 फीसदी तक ही सीक्वेंशियल ग्रोथ रह सकती है. इसका मतलब है कि निकट अवधि में तेज रिकवरी की उम्मीद कम है और बिजनेस धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा.
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