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Vodafone Idea (Vi) के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली है. इस तेजी के पीछे की वजह सरकार के तरफ से आई एक खबर है, जिसमें बताया गया है कि सरकार ने कंपनी के स्पेक्ट्रम बकाया को इक्विटी में बदलने का फैसला किया है. यह ट्रांसफर ₹10 प्रति शेयर के मूल्य पर होगा, जो कि हालिया बंद भाव से 47% अधिक है. इस खबर के बाद, Vi के शेयर 20% बढ़कर ₹8.17 के स्तर पर पहुंच गए.
सरकार के इस फैसले के बाद Vodafone Idea लगभग PSU (Public Sector Undertaking) स्टॉक बनने के करीब आ गई है. अभी तक सरकार की हिस्सेदारी 22.6% थी, लेकिन इस इक्विटी कन्वर्जन के बाद यह बढ़कर 49% हो जाएगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भविष्य में सरकार और अधिक इक्विटी में कन्वर्जन करती है, तो उसकी हिस्सेदारी 50% से अधिक हो सकती है, जिससे कंपनी एक पब्लिक सेक्टर की इकाई बन सकती है.
इस कन्वर्जन से Vodafone Idea को कैश फ्लो में भारी राहत मिलेगी. Citi के विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे Vi के कुल कर्ज में 18% की कमी आएगी. मोतिलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026-28 के बीच देय स्पेक्ट्रम बकाया में भी भारी गिरावट आएगी. यह राशि ₹110,000 करोड़, ₹250,000 करोड़ और ₹250,000 करोड़ से घटकर क्रमशः ₹5,000 करोड़, ₹50,000 करोड़ और ₹150,000 करोड़ रह जाएगी. इससे अगले तीन वर्षों में Vi को लगभग ₹40,000 करोड़ की नकदी राहत मिलेगी.
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Vodafone Idea को स्पेक्ट्रम बकाया पर राहत मिल गई है, लेकिन उसके ऊपर ₹16,500 करोड़ के AGR (Adjusted Gross Revenue) बकाया की देनदारी अभी भी बनी हुई है, जिसकी अदायगी 26 मार्च से शुरू होगी. यह राशि इस कन्वर्जन का हिस्सा नहीं है, जिससे कंपनी पर वित्तीय दबाव बना रहेगा. Motilal Oswal के अनुसार, Vi के पास अपने कैपेक्स को पूरा करने और AGR देनदारियों की अदायगी के लिए पर्याप्त कैश फ्लो नहीं है. हालांकि, सरकार के 3+1 बाजार स्ट्रक्चर को बनाए रखने के दृष्टिकोण से आगे और राहत संभव है.
इसका मतलब ये हुआ कि Vodafone Idea के शेयरों में हालिया तेजी के बावजूद, इसके वित्तीय संकट अभी खत्म नहीं हुए हैं. हालांकि, सरकार की हिस्सेदारी बढ़ने से निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन कंपनी को बाजार में स्थिरता लाने और ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे.