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भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Supreme Industries Ltd. पर तीन बड़े विदेशी ब्रोकरेज हाउस- JP Morgan, CLSA और Jefferies ने अपनी रिपोर्ट जारी की है. हालांकि कंपनी के तिमाही नतीजे थोड़े कमजोर रहे, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी भी बरकरार है.
JP Morgan ने Supreme Industries पर अपना “Overweight” रेटिंग बरकरार रखा है. हालांकि, उन्होंने टारगेट प्राइस को घटाकर ₹4760 कर दिया है, जो पहले ₹4930 था. मौजूदा बाजार भाव ₹4000 के करीब है, यानी अब भी लगभग 19% की संभावित बढ़त देखी जा रही है.
JP Morgan का कहना है कि कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत है और FY26 में भी अच्छी रिकवरी की उम्मीद है. हालांकि, EBITDA मार्जिन उम्मीद से थोड़ा कम रहा, जिससे टारगेट में हल्की कटौती की गई है.
CLSA ने Supreme Industries पर Hold रेटिंग बनाए रखी है. उन्होंने टारगेट प्राइस ₹4275 रखा है, जो पहले ₹4400 था. इसका मतलब है कि CLSA का नजरिया संतुलित (Neutral) है, यानी वे अब बड़ी तेजी या गिरावट नहीं देख रहे.
CLSA का कहना है कि कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 12.4% पर आ गया है, जो पिछले साल से 170 बेसिस पॉइंट्स कम है. हालांकि रेवेन्यू में 5% की बढ़त और पाइप्स बिज़नेस में 17% वॉल्यूम ग्रोथ भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करती है.
Jefferies ने Supreme Industries पर Buy रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस ₹5100 दिया है - यानी CMP से करीब 27% अपसाइड की संभावना. Jefferies का कहना है कि कंपनी का Pipes Volume Growth 17% रहा, जो बेहद मजबूत है. हालांकि मार्जिन थोड़ा कमजोर रहा, लेकिन मैनेजमेंट ने FY26 के लिए 15-16% वॉल्यूम ग्रोथ और 14.5-15% ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस दोहराई है. Jefferies के अनुसार, अगर यह ट्रेंड बरकरार रहा तो Supreme Industries आने वाले क्वार्टरों में EBITDA रिकवरी और बेहतर फ्री कैश फ्लो दिखा सकती है.
कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹11 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड घोषित किया है. इसका रिकॉर्ड डेट 3 नवंबर 2025 तय किया गया है. यह निवेशकों के लिए एक पॉजिटिव संकेत है कि कंपनी अभी भी कैश फ्लो स्ट्रॉन्ग बनाए हुए है.
27 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम इंडस्ट्रीज का शेयर लगभग 1.84% गिरकर ₹3,929.90 पर बंद हुआ. साल 2025 की शुरुआत से अब तक स्टॉक में लगभग 16% की गिरावट आई है. हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि लोअर लेवल्स पर वैल्यू बायिंग संभव है, खासकर लॉन्ग टर्म के निवेशकों के लिए.
Supreme Industries का पाइप्स और फर्नीचर सेगमेंट दोनों ही तेजी से बढ़ रहे हैं. कंपनी का ध्यान अब कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग सेक्टर पर भी है, जहां प्लास्टिक प्रोडक्ट्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है. अगर FY26 में मैनेजमेंट का वॉल्यूम ग्रोथ 15%+ और मार्जिन गाइडेंस 15% बरकरार रहती है, तो कंपनी दोबारा ₹4800-₹5000 के ज़ोन में पहुंच सकती है.
Q1. Supreme Industries किस सेक्टर की कंपनी है?
यह प्लास्टिक प्रोडक्ट्स और पाइप्स बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है.
Q2. तीनों ब्रोकरेज के टारगेट क्या हैं?
JP Morgan: ₹4760, CLSA: ₹4275, Jefferies: ₹5100.
Q3. कंपनी का तिमाही मुनाफा कितना घटा?
Q2FY26 में नेट प्रॉफिट 20% घटकर ₹165 करोड़ रहा.
Q4. कंपनी ने कितना डिविडेंड घोषित किया है?
₹11 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड, रिकॉर्ड डेट 3 नवंबर 2025.
Q5. क्या स्टॉक में खरीदारी करनी चाहिए?
लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह आकर्षक वैल्यू स्टॉक है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)