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सांकेतिक
शेयर बाजार में जब भी गर्मियों की दस्तक होती है, तो निवेशकों की नजरें सबसे पहले सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों पर टिक जाती हैं. इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम है वरुण बेवरेजेज (Varun Beverages). पिछले कुछ समय से यह स्टॉक चर्चा में है, क्योंकि पिछला साल कंपनी के लिए उम्मीद से थोड़ा सुस्त रहा.
लेकिन दिग्गज ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि यह सुस्ती सिर्फ एक छोटा सा ब्रेक है. असली फिल्म तो अब शुरू होने वाली है. ब्रोकरेज ने इस स्टॉक पर 550 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा भाव से करीब 35% ऊपर है.
साल 2025 वरुण बेवरेजेज के लिए थोड़ा मिला-जुला रहा. बेमौसम बारिश ने कोल्ड ड्रिंक्स की डिमांड पर ब्रेक लगा दिया था. आंकड़ों की बात करें तो भारत में वॉल्यूम ग्रोथ सिर्फ 2% रही, जबकि ग्लोबल लेवल पर यह 8% तक ही पहुंच पाई.
लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि कंपनी कमजोर पड़ गई है? बिल्कुल नहीं. मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट कहती है कि यह गिरावट सिर्फ अस्थायी थी. असल में, गांव-गांव तक पहुंचती बिजली, बढ़ते रिटेल स्टोर्स और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर आज भी कंपनी की ग्रोथ की मजबूत बुनियाद बने हुए हैं.
वरुण बेवरेजेज को लेकर सबसे बड़ा बदलाव जो देखने को मिल रहा है, वो है इसका 'ट्रांसफॉर्मेशन'. कंपनी अब खुद को सिर्फ एक बॉटलर (पेप्सिको के लिए ड्रिंक्स बनाने वाली) से बदलकर एक बड़ा 'कंज्यूमर प्लेटफॉर्म' बना रही है.
सरल शब्दों में कहें तो कंपनी अपने तगड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का इस्तेमाल अब स्नैक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और डेयरी प्रोडक्ट्स बेचने के लिए कर रही है. यहां तक कि अफ्रीकी बाजारों में कार्लसबर्ग के साथ पार्टनरशिप के जरिए यह कंपनी बीयर मार्केट में भी कदम रखने की तैयारी में है. सप्लाई चेन पर कंट्रोल रखने के लिए कंपनी ने खुद के विजी-कूलर (Visi-cooler) बनाने के प्लांट भी लगा लिए हैं.
आने वाले समय में मौसम भी कंपनी के लिए मददगार साबित हो सकता है. अल नीनो (El Nino) की वजह से गर्मी ज्यादा पड़ने की संभावना है, जिसका सीधा फायदा बेवरेज सेक्टर को मिलता है.
इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी ने पिछले दो सालों में अपनी उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ाया है. भारत में ही चार नए प्लांट लगाए गए हैं. साथ ही, कंपनी अब 'हेल्थ' पर भी फोकस कर रही है. कम शुगर वाले और बिना शुगर वाले ड्रिंक्स लॉन्च किए जा रहे हैं, जो प्रीमियम कैटेगरी में आते हैं और कंपनी का मुनाफा बढ़ाते हैं.
भारत के बाहर भी वरुण बेवरेजेज का जलवा बढ़ रहा है. अफ्रीका और अन्य इंटरनेशनल मार्केट में कंपनी ने अधिग्रहण और नई साझेदारियों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है. दिलचस्प बात यह है कि विदेशी बाजारों में वॉल्यूम ग्रोथ भारत के मुकाबले ज्यादा तेज है. इससे कंपनी की भारत के बाजार पर निर्भरता कम हो रही है और कमाई के नए रास्ते खुल रहे हैं. सुस्त साल के बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत बना हुआ है, जो इसके बिजनेस की ताकत को दिखाता है.
मोतीलाल ओसवाल को उम्मीद है कि साल 2025 से 2027 के बीच कंपनी की कमाई और मुनाफे में 13% से 16% की सालाना बढ़त (CAGR) देखने को मिल सकती है. ब्रोकरेज ने इसे साल 2027 की अनुमानित कमाई के 45 गुना पर वैल्यु किया है. 550 रुपये का टारगेट यह साफ करता है कि वरुण बेवरेजेज अब एक लंबी रेस का घोड़ा बन चुकी है, जो सिर्फ कोल्ड ड्रिंक तक सीमित नहीं है.
कुल मिलाकर, वरुण बेवरेजेज के लिए खराब मौसम का दौर अब पीछे छूटता नजर आ रहा है. नए प्रोडक्ट्स, विदेशी विस्तार और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता इसे एक दमदार कंज्यूमर कंपनी बना रही है. अगर आप अपने पोर्टफोलियो में एक ऐसी कंपनी चाहते हैं जो हर घर की जरूरत बन चुकी है और लगातार नए प्रयोग कर रही है, तो 35% की संभावित तेजी वाला यह स्टॉक एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)