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Trent or Vishal Mega Mart.
Stocks to BUY: भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. मिडिल क्लास के उदय के कारण रीटेल सेक्टर का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा है. यंग पॉपुलेशन, अर्बनाइजेशन, डिजिटलाइजेशन और डायनामिक कंजप्शन के कारण अपॉर्च्युनिटी बहुत बड़ी है, लेकिन चैलेंजिंग भी है. खासकर लाइफस्टाइल, फैशन, फूड, ग्रोसरी रीटेल में अपार संभवनाएं हैं. भारत का रीटेल सेक्टर 2025 में 1 ट्रिलियन डॉलर का था जो 2034 तक 2.2 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद है. टाटा ग्रुप का Trent और Vishal Mega Mart इस स्पेस की दो दिग्गज कंपनी है. आइए जानते हैं कि निवेश के लिहाज से ये दोनों स्टॉक्स कैसे हैं.
तीन जुलाई को Trent की एनुअल जनरल मीटिंग थी, जिसके बाद ग्लोबल ऐनालिस्ट Macquarie ने शेयर को लेकर ओवरवेट की रेटिंग और 7200 रुपए का टारगेट दिया गया है. Morgan Stanley ने भी ओवरवेट की रेटिंग और 6359 रुपए का टारगेट दिया है. शेयर में आज 4% की गिरावट है और यह 5700 रुपए के नीचे कारोबार कर रहा है. अक्टूबर 2024 में शेयर ने 8345 रुपए का लाइफ हाई बनाया था. 2025 में इस शेयर ने 4488 रुपए का लो बनाया, 2024 का लो 2940 रुपए और 2023 का लो 1155 रुपए का है. यह एक मल्टीबैगर स्टॉक रहा है जिसने इस साल अब तक -20% का रिटर्न दिया है. पिछले एक साल का रिटर्न 2%, दो साल का रिटर्न 230%, तीन साल का रिटर्न 410% और पांच साल का रिटर्न 820% है.
Trent एक ब्लूचिप कंपनी है जिसका मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक है. 62.99% का फ्री-फ्लोट है जिसका मार्केट कैप 1.26 लाख करोड़ रुपए है. 383921 रीटेल निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है और इनके पास कंपनी की 13.42% हिस्सेदारी है. FII की हिस्सेदारी मार्च तिमाही में घटकर 19.65% पर आ गई जो दिसंबर तिमाही में 21.68% और एक साल पहले समान तिमाही में 26.81% थी. DII की हिस्सेदारी मार्च 2025 के आधार पर 17.20% है जो दिसंबर तिमाही में 15.25% और एक साल पहले 13.89% थी. इस कैटिगरी में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 11.89% है और 45 स्कीम्स का पैसा लगा है. साफ है कि FII लगातार हिस्सेदारी घटा रहे हैं जबकि DII अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
एनुअल जनरल मीटिंग में मैनेजमेंट ने FY26 में 250+ नए स्टोर्स खोलने और 25-30% ग्रोथ का लक्ष्य रखा है. अगले कई सालों तक इसी रफ्तार से स्टोर्स एक्सपैंशन का प्लान है. FY25 के आधार पर कुल 1043 स्टोर्स हैं और पूरे फिस्कल में 295 स्टोर्स एडिशन किया गया. FY23 के मुकाबले 10x का रेवेन्यू ग्रोथ बहुत दूर की बात नहीं है. अगले 5 सालों का ग्रोथ 25-30% CAGR रह सकता है. कॉम्पिटिशन बड़ी समस्या नहीं है, क्योंकि रीटेल स्पेस में अपॉर्च्युनिटी बहुत बड़ी है. मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि तिमाही प्रदर्शन के मुकाबले सालाना प्रदर्शन कंपनी के परफॉर्मेंस को बेहतर बताता है.
बीते 5 सालों के प्रदर्शन की बात करें तो FY20-FY25 के बीच कंपनी का सेल्स ग्रोथ 39% CAGR, प्रॉफिट बिफोर टैक्स का औसत ग्रोथ 53% CAGR, हर शेयर पर कमाई का ग्रोथ 59% CAGR और ग्रॉस फिक्स्ड असेट्स ग्रोथ 22% CAGR रहा है. ऑपरेटिंग ROE 30.6% पर पहुंच गया जो FY21 में -0.5% था. वहीं, ROCE 37.2% पर पहुंच गया जो 0.3% था.
रीटेल स्पेस की दूसरी कंपनी Vishal Mega Mart को लेकर जेपी मॉर्गन ने ओवरवेट की रेटिंग और 133 रुपए का टारगेट दिया है. HSBC ने HOLD की रेटिंग और 138 रुपए का टारगेट दिया है. यह शेयर 130 रुपए की रेंज में कारोबार कर रहा है. दिसंबर 2024 में 78 रुपए पर इसका आईपीओ आया था. BSE पर 110 रुपए पर लिस्टिंग हुई थी और इसने 138 रुपए का लाइफ हाई और 96 रुपए का लो बनाया है.
कंपनी का मार्केट कैप 60600 करोड़ रुपए है जिसमें फ्री-फ्लोट 25.45% यानी 14750 करोड़ रुपए है. 722967 रीटेल निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है और इनकी हिस्सेदारी केवल 3.48% है. मार्च तिमाही के आधार पर FII की हिस्सेदारी 7.03% और DII की हिस्सेदारी 12.22% है जो दिसंबर तिमाही में 6.58%/9.90% थी. डीआईआई कैटिगरी में म्यूचुअल फंड्स के पास 11.35% हिस्सेदारी है और 28 स्कीम्स का पैसा इसमें लगा है.
मार्च 2025 के आधार पर विशाल मेगा मार्ट के 696 स्टोर्स हैं और पूरे फिस्कल में 90 नए स्टोर्स खोले गए. कंपनी मिडिल और लोअर मिडिल इनकम इंडिया को टारगेट करती है और इसका फोकस टायर-2,3 शहरों पर है. 500 से अधिक स्टोर्स तो टायर-2,3 शहरों में हैं और 28% स्टोर्स टायर-1 सिटी में है. सेल्स में 44% अपैरल, 28% जनरल मर्चेंडाइज और 28% एफएमसीजी है. कंपनी का 95% रेवेन्यू लॉयल कस्टमर्स से आता है और इनकी संख्या 145 मिलियन है.
अब तक का एग्जीक्यूशन शानदार रहा है. 19 महीने का ऐवरेज स्टोर पेबैक है और 15 दिनों का वर्किंग कैपिटल साइकिल है. FY24 में कंपनी का ROE और ROCE 13%/9% रहा. विशाल मेगा मार्ट ने ग्रोथ के लिए अफोर्डेबल फैशन विद जनरल मर्चेंडाइज, अपैरल एंड FMCG प्रोड्क्टस फॉर्मट पर फोकस किया और इसका बड़ा फायदा भी मिला. ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिए कंपनी ने सेंट्रलाइज्ड प्रोक्योरमेंट सिस्टम को अपनाया और सप्लाई चेन मैनेजमेंट को स्ट्रीमलाइन की गई. नतीजन, प्रोक्योरमेंट कॉस्ट काफी घट गया और मार्जिन्स बेहतर हो गए.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)