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शेयर बाजार में हर कोई ऐसे मौके तलाशता है जहां पैसा सुरक्षित भी रहे और ग्रोथ भी शानदार मिले. साल 2026 को ध्यान में रखते हुए दिग्गज ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दो ऐसे शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दी है, जो आने वाले समय में पोर्टफोलियो की चमक बढ़ा सकते हैं.
इनमें से एक शेयर तो ऐसा है जो अपने मौजूदा भाव से करीब 49% तक उछल सकता है. अगर आप भी नए साल और उससे आगे के लिए निवेश की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इन दो कंपनियों के बिजनेस मॉडल और भविष्य के प्लान को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है.
आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Coforge इस समय चर्चा का केंद्र बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी कंपनी 'एनकोरा' (Encora) का अधिग्रहण. यह कोई छोटा-मोटा सौदा नहीं है, बल्कि यह Coforge के रेवेन्यू बेस को करीब 26% तक बढ़ा सकता है. एनकोरा एक ऐसी कंपनी है जो इंजीनियरिंग और एआई (AI) आधारित सर्विसेज में माहिर है.
इस डील की खास बात यह है कि एनकोरा में प्रति कर्मचारी कमाई Coforge के मुकाबले ज्यादा है. जहां Coforge हर कर्मचारी पर करीब 69 हजार डॉलर कमाता है, वहीं एनकोरा में यह आंकड़ा 74 हजार डॉलर के आसपास है. इसके साथ ही एनकोरा का मार्जिन भी काफी बेहतर है.
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जानकारों का मानना है कि इस डील के बाद Coforge का दबदबा हाई-टेक और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर में बहुत बढ़ जाएगा. मोतीलाल ओसवाल ने इस स्टॉक के लिए 2,500 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा भाव से 49% ऊपर है.

Coforge ने एनकोरा को 2.35 अरब डॉलर की एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदने का फैसला किया है. यह पूरा सौदा शेयर-स्वैप एग्रीमेंट के जरिए होगा. हालांकि, इतने बड़े अधिग्रहण के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं. मैनेजमेंट के लिए सबसे बड़ा टास्क होगा टैलेंट को रोक कर रखना और दोनों कंपनियों के कामकाज को सही तरीके से मिलाना.
चूंकि यह डील काफी बड़ी है, इसलिए बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इसे कैसे लागू करती है. लेकिन Coforge का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो उन्होंने पहले भी एसएलके ग्लोबल (SLK Global) जैसी कंपनियों को बखूबी संभाला है. कंपनी के पास ऑर्डर्स की कोई कमी नहीं है, जो इसके बिजनेस को मजबूती देता है.
लिस्ट में दूसरा नाम है अपोलो टायर्स का. टायर सेक्टर की यह कंपनी भारत में अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है. पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर और लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में टायर की डिमांड काफी तगड़ी बनी हुई है. राहत की बात यह है कि कंपनी का एक्सपोर्ट बिजनेस भी अच्छी रफ्तार पकड़ रहा है और आने वाले समय में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है.
मोतीलाल ओसवाल ने अपोलो टायर्स के लिए 600 रुपये का लक्ष्य रखा है. फिलहाल यह शेयर 506 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिसका मतलब है कि इसमें 19% की बढ़त की गुंजाइश है. कंपनी ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के साथ स्पॉन्सरशिप डील की है, जिसका फायदा आने वाले समय में ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में मिलेगा.

अपोलो टायर्स के लिए यूरोप का बाजार फिलहाल थोड़ा सुस्त है, लेकिन कंपनी वहां बड़े बदलाव कर रही है. कंपनी अपने नीदरलैंड्स (Enschede) वाले प्लांट को रिस्ट्रक्चर कर रही है और कुछ ऑपरेशंस को भारत शिफ्ट कर रही है. इस कदम से कंपनी की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा. हालांकि, इन बदलावों का पूरा फायदा साल 2027 और 2028 तक देखने को मिलेगा.
भारत में कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता और एक्सपोर्ट में डबल डिजिट ग्रोथ कंपनी के लिए अच्छे संकेत हैं. ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि अपोलो टायर्स का वैल्यूएशन अपने कॉम्पिटिटर्स के मुकाबले काफी आकर्षक है, जो इसे निवेश के लिए एक मुफीद शेयर बनाता है.
निवेश की दुनिया में सही समय पर सही स्टॉक चुनना ही मुनाफे की चाबी है. Coforge जहां एआई और बड़े अधिग्रहण के दम पर लंबी छलांग लगाने को तैयार दिख रहा है, वहीं अपोलो टायर्स अपने ऑपरेशंस को बेहतर बनाकर और भारतीय बाजार की डिमांड का फायदा उठाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. हालांकि, किसी भी निवेश से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि आईटी सेक्टर में अधिग्रहण को लागू करना और टायर सेक्टर में ग्लोबल डिमांड जैसे फैक्टर्स पर नजर रखना जरूरी होगा.
Q: Coforge के शेयर में 49% की तेजी की मुख्य वजह क्या है?
A: इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी एनकोरा (Encora) का अधिग्रहण है. इससे कंपनी का रेवेन्यू बेस 26% बढ़ जाएगा और हाई-टेक व हेल्थकेयर सेक्टर में इसकी पहुंच काफी मजबूत होगी.
Q: अपोलो टायर्स के लिए ब्रोकरेज ने क्या टारगेट दिया है?
A: मोतीलाल ओसवाल ने अपोलो टायर्स के लिए 600 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है. कंपनी के मौजूदा भाव को देखते हुए इसमें करीब 19% की बढ़त की उम्मीद जताई गई है.
Q: एनकोरा अधिग्रहण के बाद Coforge के कामकाज में क्या बड़े बदलाव आएंगे?
A: इस डील के बाद एनकोरा के 9,300 कर्मचारी ग्रुप का हिस्सा बनेंगे. खास बात यह है कि एनकोरा की प्रति कर्मचारी आय Coforge से बेहतर है, जिससे कंपनी के ओवरऑल मार्जिन में सुधार होने की संभावना है.
Q: अपोलो टायर्स के यूरोपीय बिजनेस में अभी क्या चुनौतियां हैं?
A: यूरोप के बाजार में अभी टायर्स की डिमांड काफी सुस्त है. हालांकि, कंपनी वहां अपने प्लांट का रिस्ट्रक्चरिंग कर रही है और कुछ काम भारत शिफ्ट कर रही है, जिसका आर्थिक फायदा 2027 से दिखना शुरू होगा.
Q: क्या इन दोनों शेयरों में निवेश का यह सही समय है?
A: ब्रोकरेज फर्म ने इन दोनों कंपनियों के मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य के विस्तार प्लान को देखते हुए 'Buy' रेटिंग दी है. हालांकि, बड़े अधिग्रहणों को लागू करने और ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव जैसे जोखिमों पर नजर रखना भी जरूरी है.