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क्या आपने कभी सोचा है कि चश्मा पहनने वालों की तादाद इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की मानें तो 2030 तक दुनिया की 55% आबादी यानी करीब 470 करोड़ लोगों को चश्मे की जरूरत होगी. इसी बड़े मौके को भांपते हुए दिग्गज ब्रोकरेज फर्म एवेन्डस स्पार्क ने लेंसकार्ट पर अपनी रिपोर्ट जारी की है.
रिपोर्ट के मुताबिक, लेंसकार्ट सिर्फ एक चश्मा बेचने वाली दुकान नहीं है, बल्कि एक ऐसी कंपनी है जिसने टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के दम पर पूरे बाजार को हिला कर रख दिया है. ब्रोकरेज ने इस शेयर पर खरीदारी की राय देते हुए इसे 490 रुपये के लक्ष्य तक जाते हुए देखा है.
लेंसकार्ट की सबसे बड़ी ताकत उसका बिजनेस मॉडल है, जिसे 'मैन्युफैक्चरर-टू-कंज्यूमर' (M2C) कहा जाता है. आम तौर पर चश्मा फैक्ट्री से निकलकर कई हाथों से होता हुआ आप तक पहुंचता है, जिससे उसकी कीमत बढ़ जाती है. लेकिन लेंसकार्ट खुद चश्मे बनाता है और सीधे अपने स्टोर या ऐप के जरिए ग्राहकों को बेचता है.
इससे दो बड़े फायदे होते हैं. पहला, कंपनी कम कीमत पर अच्छे क्वालिटी के प्रोडक्ट दे पाती है. दूसरा, सप्लाई चेन पर कंपनी का पूरा कंट्रोल रहता है. ब्रोकरेज का कहना है कि इसी वजह से लेंसकार्ट ने चश्मे की दुनिया में जागरूकता, किफायती दाम और हर जगह उपलब्धता की समस्या को हल कर दिया है.
भारत का आईवियर मार्केट किसी रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहा है. आंकड़ों के हिसाब से, वित्त वर्ष 2025 में यह बाजार 78,800 करोड़ रुपये का था, जो 2030 तक बढ़कर 1.48 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है. यह ग्रोथ दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है.
सिर्फ भारत ही नहीं, लेंसकार्ट अब जापान, दक्षिण पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपना झंडा गाड़ रहा है. इन देशों में बुजुर्ग आबादी का बढ़ना और इंश्योरेंस के जरिए चश्मे की मांग बढ़ना कंपनी के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है. ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया है कि अगले तीन सालों में कंपनी का कुल रेवेन्यू 21% की रफ्तार से बढ़ सकता है.
लेंसकार्ट ने ग्राहकों को जोड़ने के लिए कई नए तरीके अपनाए हैं. मुफ्त में आंखों की जांच करना, घर बैठे चश्मा ट्राई करने की सुविधा और 2,200 से ज्यादा स्टोर्स का नेटवर्क इसे दूसरों से अलग बनाता है. इसके अलावा, कंपनी ने चश्मे को सिर्फ एक जरूरत नहीं बल्कि एक 'फैशन' बना दिया है.
नए-नए डिजाइन और बड़े ब्रांड्स के साथ तालमेल बिठाकर कंपनी युवाओं को अपनी तरफ खींच रही है. डिलीवरी के मामले में भी कंपनी बहुत आगे निकल चुकी है. आज 59 शहरों में लेंसकार्ट अगले ही दिन चश्मा डिलीवर करने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि एक बार चश्मा खरीदने वाला ग्राहक बार-बार लेंसकार्ट के पास ही आता है.
एवेन्डस स्पार्क की रिपोर्ट कहती है कि लेंसकार्ट का भारतीय बिजनेस 23% और अंतरराष्ट्रीय बिजनेस 18% की सालाना ग्रोथ दिखा सकता है. कंपनी ने जिस तरह से टेक्नोलॉजी और अपने कारखानों का इस्तेमाल किया है, वह इसे लंबे समय तक रेस में आगे रखेगा. हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो रहते ही हैं, लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स और बढ़ते मार्केट शेयर को देखते हुए ब्रोकरेज इस पर काफी भरोसा जता रहा है.
लेंसकार्ट ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और आधुनिक तकनीक के दम पर चश्मे के बाजार में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. भारत में बढ़ते बाजार और विदेशों में विस्तार की योजना इसे एक मजबूत खिलाड़ी बनाती है. अगर आप लंबी अवधि के लिए एक ऐसी कंपनी की तलाश में हैं जो लगातार इनोवेशन कर रही है, तो लेंसकार्ट का यह सफर देखने लायक होगा. ब्रोकरेज का 490 रुपये का टारगेट इसके ऑल-टाइम हाई के बेहद करीब है, जो निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है.
Q: एवेन्डस स्पार्क ने लेंसकार्ट के लिए क्या टारगेट प्राइस दिया है?
A: ब्रोकरेज फर्म एवेन्डस स्पार्क ने लेंसकार्ट के शेयर पर 'Add' रेटिंग देते हुए 490 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है.
Q: लेंसकार्ट का M2C बिजनेस मॉडल क्या है?
A: M2C का मतलब है 'मैन्युफैक्चरर-टू-कंज्यूमर'. इसमें कंपनी खुद चश्मे बनाती है और बिना किसी बिचौलिए के सीधे ग्राहकों को बेचती है, जिससे लागत कम आती है.
Q: भारत में आईवियर मार्केट की ग्रोथ की क्या संभावना है?
A: भारत का आईवियर मार्केट वित्त वर्ष 2030 तक 1.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो करीब 13% की सालाना ग्रोथ (CAGR) को दर्शाता है.
Q: लेंसकार्ट का स्टोर नेटवर्क कितना बड़ा है?
A: लेंसकार्ट के पास फिलहाल 2,200 से ज्यादा स्टोर्स का एक विशाल ओमनी-चैनल नेटवर्क है, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से ग्राहकों को सेवा देता है.
Q: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लेंसकार्ट किन देशों में विस्तार कर रहा है?
A: लेंसकार्ट भारत के बाहर जापान, दक्षिण पूर्व एशिया और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)