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पिछले कुछ समय में भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने कई बदलाव देखे हैं. जहां एक तरफ कॉरपोरेट लोन में PSU कंपनियों द्वारा तेजी से कर्ज चुकाने का ट्रेंड दिखा, वहीं दूसरी तरफ रिटेल बैंकिंग ने सेक्टर को संभालकर रखा. इसी बैकग्राउंड में Citi की यह रिपोर्ट आई है, जो बताती है कि आगे चलकर बैंकिंग सेक्टर की ग्रोथ किस दिशा में जा सकती है.
ब्रोकरेज फर्म Citi का मानना है कि अब बैंकों की असली ताकत सिर्फ बड़े कॉरपोरेट लोन नहीं, बल्कि मॉर्टगेज, अनसिक्योर्ड लोन और बिजनेस बैंकिंग जैसे सेगमेंट हैं. यही वजह है कि रिपोर्ट में ICICI और HDFC जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों पर खास फोकस किया गया है.
Citi ने ICICI Bank पर Buy रेटिंग बनाए रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1700 रुपये रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट ग्रोथ थोड़ी थमी जरूर, लेकिन इसकी वजह किसी तरह की कमजोरी नहीं थी. PSU कंपनियों ने अपने पुराने लोन तेजी से चुकाए, जिससे ग्रोथ नंबर दबे हुए दिखे.
असल मजबूती रिटेल साइड में नजर आती है. मॉर्टगेज, अनसिक्योर्ड लेंडिंग और बिजनेस बैंकिंग में ICICI Bank को अच्छी पकड़ बनती दिख रही है. Citi का कहना है कि बैंक के पास अभी भी कई ऐसे मौके हैं, जहां वह प्रॉफिटेबल ग्रोथ हासिल कर सकता है.
आपको बता दें, ICICI Bank भारत का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है. यह रिटेल, SME और कॉरपोरेट ग्राहकों को कई तरह के फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और सर्विस देता है. बैंक का ब्रांच और ATM नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है.
इसके अलावा ICICI ग्रुप लाइफ और जनरल इंश्योरेंस, हाउसिंग फाइनेंस जैसे बिजनेस में भी अपनी मौजूदगी रखता है. यही डायवर्सिफाइड मॉडल Citi को ICICI Bank के लिए ज्यादा कॉन्फिडेंस देता है.
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HDFC Bank पर भी Citi ने Buy रेटिंग बरकरार रखी है. ब्रोकरेज का मानना है कि बैंक ने अपने कॉस्ट ऑफ फंड्स को काफी समझदारी से मैनेज किया है. उधारी को रिफाइनेंस करना और टर्म डिपॉजिट की रीप्राइसिंग जैसे कदम बैंक को फायदा पहुंचा रहे हैं.
Citi को उम्मीद है कि CRR में कटौती से जो एक्स्ट्रा लिक्विडिटी सिस्टम में आएगी, वह सीधे लेंडिंग में जाएगी. मीडियम टर्म में डिपॉजिट ग्रोथ के क्रेडिट ग्रोथ से तेज रहने की संभावना जताई गई है. इससे बैंक की बैलेंस शीट और मजबूत हो सकती है.
HDFC Bank देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है. इसका हेडक्वार्टर मुंबई में है और यह एसेट्स के लिहाज से भारत में नंबर वन बैंक माना जाता है. अप्रैल 2024 तक इसका मार्केट कैप करीब 145 बिलियन डॉलर था, जिससे यह भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है. Citi का मानना है कि FY26 में बैंक की ग्रोथ इंडस्ट्री एवरेज के आसपास बनी रह सकती है.
Citi की रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर की कहानी अब ज्यादा बैलेंस्ड हो रही है. कॉरपोरेट लोन में भले ही शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन रिटेल और डिपॉजिट बेस बैंकों को मजबूत सपोर्ट दे रहा है.
PSU लोन रिपेमेंट से एसेट क्वालिटी बेहतर हुई है और बैंकों को नए, ज्यादा प्रॉफिटेबल सेगमेंट पर फोकस करने का मौका मिला है. Citi का नजरिया बताता है कि आने वाले समय में वही बैंक आगे रहेंगे, जिनका ग्रोथ मॉडल डायवर्सिफाइड और रिस्क कंट्रोल में होगा.
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इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा मैसेज यह है कि बैंकिंग सेक्टर में मौके अभी खत्म नहीं हुए हैं. ICICI Bank को Citi ने अग्रेसिव ग्रोथ स्टोरी के तौर पर देखा है, जबकि HDFC Bank को स्टेबल और लॉन्ग टर्म कंपाउंडर माना गया है.
निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सिर्फ शॉर्ट टर्म टारगेट प्राइस नहीं, बल्कि बैंक की स्ट्रेंथ, डिपॉजिट बेस और लोन मिक्स को समझकर फैसला लें. Citi की यह रिपोर्ट उसी सोच को मजबूत करती है.
Q1. Citi ने ICICI Bank पर कौन सी रेटिंग दी है?
Citi ने ICICI Bank पर Buy रेटिंग दी है और 1700 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है.
Q2. ICICI Bank की सबसे बड़ी ताकत क्या बताई गई है?
रिपोर्ट के मुताबिक मॉर्टगेज, अनसिक्योर्ड लेंडिंग और बिजनेस बैंकिंग में बैंक की मजबूत पकड़ इसकी बड़ी ताकत है.
Q3. HDFC Bank पर Citi का आउटलुक कैसा है?
Citi ने HDFC Bank को स्टेबल ग्रोथ वाला बैंक माना है और Buy रेटिंग बरकरार रखी है.
Q4. CRR कट से बैंकों को क्या फायदा हो सकता है?
CRR कट से सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जिससे लेंडिंग को सपोर्ट मिल सकता है.
Q5. क्या बैंकिंग सेक्टर में अभी निवेश के मौके हैं?
Citi की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्ग टर्म नजरिये से मजबूत प्राइवेट बैंकों में मौके बने हुए हैं.
(डिस्क्लेमर: यहां स्टॉक्स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)