&format=webp&quality=medium)
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार आठवें सत्र में भी तेजी दिखाई और निफ्टी-50 ने 25,000 के अहम स्तर को फिर से हासिल कर लिया. सेंसेक्स करीब 82,000 के पार बंद हुआ जबकि बैंक निफ्टी भी मजबूती के साथ 54,809 अंकों पर बंद हुआ. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी मजबूती बनी रही, जिससे यह साफ संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अब भी कायम है.
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि सोमवार को जब बाजार खुलेगा तो क्या यह तेजी जारी रह पाएगी या कहीं रुकावट देखने को मिलेगी. चलिए, जानते हैं उन 5 फैक्टर्स के बारे में जो अगले हफ्ते की मार्केट मूव को प्रभावित करेंगे.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नवंबर 2025 में भारत आने की संभावना जताई जा रही है. इस साल भारत क्वाड समिट की मेजबानी कर रहा है और अमेरिका इसमें अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है. ऐसे में ट्रंप की भारत यात्रा की खबरों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है.
यह उम्मीद की जा रही है कि अगर ट्रंप भारत आते हैं तो व्यापारिक रिश्तों और टैरिफ से जुड़ी कई अड़चनें आसान हो सकती हैं. इससे विदेशी निवेशक भारत की ओर और आकर्षित होंगे और शुरुआती सत्रों में बाजार ऊंचाई पर खुल सकता है.
पिछले कुछ महीनों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसला बाजारों की सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है. इस हफ्ते होने वाली बैठक में 25 बेसिस प्वॉइंट की कटौती लगभग तय मानी जा रही है. लेकिन अगर फेड कोई बड़ा कदम उठाते हुए 50 बेसिस प्वॉइंट की कटौती कर देता है तो इसका सीधा असर वैश्विक लिक्विडिटी पर पड़ेगा.
ऐसी स्थिति में उभरते बाजारों में पूंजी का प्रवाह और तेज होगा और भारतीय बाजार को भी इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. साथ ही, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के फैसले भी अंतरराष्ट्रीय निवेश धारणा पर असर डालेंगे.
यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है. पिछले दिनों यह संकेत मिले कि दोनों पक्ष टैरिफ को लेकर सहमति के करीब हैं.
अगर यह डील जल्द पूरी होती है तो भारत के लिए निर्यात का बड़ा दरवाजा खुलेगा और कई सेक्टर्स को सीधा फायदा मिलेगा. इस उम्मीद ने पहले ही बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया है और सोमवार को इसका असर ट्रेडिंग में देखने को मिल सकता है.
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में रिश्तों में तेजी से सुधार हुआ है. दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग की बातें की हैं. निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में ट्रेड डील पर ठोस प्रगति होगी.
इससे न केवल भारतीय निर्यातकों को राहत मिलेगी बल्कि विदेशी निवेशक भी इसे सकारात्मक संकेत मानेंगे. यही कारण है कि पिछले सप्ताह इस खबर के बाद बाजार में खरीदारी का दबाव बढ़ा और सोमवार को भी इसका असर देखने की संभावना है.
भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भूमिका सबसे अहम होती है. हाल के महीनों में लगातार बिकवाली से बाजार दबाव में था. कमजोर रुपये और उभरते बाजारों में भारत की हिस्सेदारी घटने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई. अगस्त में एफआईआई ने 4 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की थी. हालांकि, पिछले हफ्ते आखिरकार इसमें बदलाव देखने को मिला जब एफआईआई ने कैश और फ्यूचर-ऑप्शन दोनों सेगमेंट में भारतीय शेयर खरीदे.
अगर सोमवार को भी एफआईआई की खरीदारी जारी रहती है तो यह बाजार को नई मजबूती दे सकता है. लेकिन अगर फिर से बिकवाली हावी होती है तो निवेशकों को सतर्क रहना होगा. इसलिए एफआईआई का रुख बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा.
सोमवार को जब बाजार खुलेगा तो निवेशक इन पांच बड़े ट्रिगर्स पर नजर रखेंगे. ट्रंप की संभावित भारत यात्रा और ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक खबरें बाजार को ऊंचाई पर ले जा सकती हैं. वहीं, फेड रेट कट और एफआईआई की गतिविधियां असली मूमेंटम तय करेंगी. अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो निफ्टी 25,300 का स्तर पार करके 25,800 तक जा सकता है.
लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर या बिकवाली के दबाव से बाजार में करेक्शन का खतरा भी बना रहेगा. यानी सोमवार को दलाल स्ट्रीट का मूड पूरी तरह से घरेलू-वैश्विक घटनाओं और विदेशी निवेशकों की चाल पर निर्भर करेगा. निवेशकों को चाहिए कि वे इन फैक्टर्स पर पैनी नजर रखें और उसी हिसाब से अपनी रणनीति तय करें.
1. सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल किन फैक्टर्स पर निर्भर करेगी?
भारतीय बाजार सोमवार को ट्रंप की संभावित भारत यात्रा, अमेरिकी फेड रेट कट, भारत-अमेरिका और भारत-EU ट्रेड डील, और एफआईआई के निवेश पैटर्न से प्रभावित होगा.
2. निफ्टी 50 के लिए मुख्य रेसिस्टेंस लेवल क्या है?
निफ्टी 50 फिलहाल 25,300 पर रुकावट का सामना कर रहा है. अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 25,800 तक जा सकता है.
3. अमेरिकी फेड रेट कट का भारतीय बाजार पर क्या असर होगा?
अगर अमेरिकी फेड 25 bps कट करता है तो बाजार पर सीमित असर होगा. लेकिन 50 bps की बड़ी कटौती से भारतीय बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है.
4. एफआईआई का रुख क्यों अहम है?
एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने नेट खरीदारी की है. उनका ट्रेड पैटर्न तय करेगा कि बाजार में तेजी बनी रहेगी या करेक्शन आएगा.
5. भारत-अमेरिका और भारत-EU ट्रेड डील का बाजार पर क्या प्रभाव होगा?
दोनों ट्रेड डील से भारतीय निर्यातकों और कंपनियों को राहत मिलेगी, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार को सपोर्ट मिलेगा.