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Solar Stocks: रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर सरकार का बड़ा और अग्रेसिव प्लान है. 2030 तक 500 गीगावाट की क्लीन एनर्जी कैपेसिटी डेवलप करने का लक्ष्य रखा गया है जिसमें 243GW की कैपेसिटी डेवलप की जा चुकी है. रिन्यूएबल एनर्जी में सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर Solar Energy होगा और 2030 तक 300GW की सोलर एनर्जी कैपेसिटी का लक्ष्य है. यही वजह है कि निवेश के लिहाज से यह स्पेस काफी अट्रैक्टिव है. क्या आपने कभी सोचा है कि इस्तेमाल के बाद Solar Panels का क्या होता है?
इस आर्टिकल में हम बात करेंगे Solar Waste की जो सोलर पैनल्स की लाइफ खत्म होने के बाद पैदा होती है. अमूमन सोलर पैनल्स की लाइफ 25-30 सालों की होती है. FY23 तक देश में 1 लाख टन सोलर वेस्ट था जिसे 2030 तक करीब छह गुना बढ़कर 6 लाख टन पर पहुंच जाने की उम्मीद है. 2050 तक यह आंकड़ा 19 मिलियन टन पर पहुंच जाने की संभावना है. ऐसे में जो कंपनियां वेस्ट मैनेजमेंट बिजनेस में है, उनके लिए यह सिल्वर लाइनिंग है.
साल 2022 में ही सोलर मॉड्यूल को E-Waste Rules के तहत शामिल कर दिया गया था. इसका मतलब, सोलर पैनल्स मैन्युफैक्चरर को कलेक्शन सेंटर बनाने होंगे और 2035 तक ई-वेस्ट रेग्युलेशन को फॉलो करना होगा. अब सोलर पैनल के मैन्युफैक्चरिंग कंटेंट की बात करें तो 80% हिस्सा ग्लास, एल्युमीनियम और मेटल्स होते हैं. इनकी री-साइकिलिंग आसान है.
इसके अलावा सोलर पैनल्स में सिलिकॉन, सिल्वर और cadmium/tellurium जैसे महंगे मेटल्स भी होते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में एग्जिस्टिंग सोलर कैपेसिटी से 340000 टन सोलर वेस्ट पैदा होने की उम्मीद है. इसमें 1 लाख टन सिलिकॉन, 12-18 टिन सिल्वर और 16 टन कैडमियम/टेलेरियम पैदा होने की उम्मीद है. यह भारत के मिनरल्स इंपोर्ट बिल को घटा सकता है, लेकिन इसके लिए उचित वेस्ट मैनेजमेंट जरूरी है.
सोलर वेस्ट मैनेजमेंट सेगमेंट में आने वाले समय में नौकरी की भी भरमार होगी. स्टडीज के मुताबिक, 2030 तक भारत में लाखों ग्रीन जॉब्स पैदा होने की उम्मीद है. नंबर ऑफ एंप्लॉयमेंट का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 1 MW की सोलर कैपेसिटी डेवलप करने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंस्टालेशन, ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट समेत पूरे प्रोसेस में 25-30 नौकरियां पैदा होती हैं.
भारत में 2030 तक 300 GW यानी 300000 MW की सोलर कैपेसिटी डेवलप करने का लक्ष्य है. वर्तमान कैपेसिटी 119 GW है और आने वाले सालों में हर साल 30-40 हजार मेगावाट की कैपेसिटी जोड़ने का लक्ष्य है. इस हिसाब से हर साल करीब 10 लाख ग्रीन जॉब्स पैदा होंगे और अगले कई सालों तक यह सिलसिला चलता रहेगा.
इन्वेस्टमेंट की बात करें तो लॉन्ग टर्म के लिहाज से जो कंपनियां सोलर वेस्ट को लेकर डायरेक्ट या प्रॉक्सी प्ले करती हैं, उनमें ग्रोथ की बड़ी अपॉर्च्युनिटी है. कोटक सिक्योरिटीज की तरफ से जारी की गई इस रिपोर्ट में ऐनालिस्ट ने कहा कि सोलर पैनल मैन्युफैक्चरर के अलावा Borosil Renewables और Exide Industries ऐसी लिस्टेड कंपनियां हैं जो थीम से रिलेटेड हैं. इसके अलावा केमिकल, लॉजिस्टिक और ग्रिड ट्रांसमिशन कंपनियों पर भी फोकस कर सकते हैं.
Borosil Renewables एक सोलर कंपनी है जो सोलर पैनल्स में लगने वाले ग्लास का निर्माण करती है. यह कंपनी भारत की पहली और एकमात्र सोलर ग्लास मैन्युफैक्चरर है. गुजरात में कंपनी का एक बड़ा प्लांट है. हर साल कंपनी 6.5 GW सोलर मॉड्यूल के लिए सोलर ग्लास सप्लाई कर सकती है. वर्तमान में इसकी कैपेसिटी 1000 TPD है. कंपनी ने 600 TPD की एडिशनल कैपेसिटी डेवलप करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए 950 करोड़ का कैपेक्स किया जाएगा. नए प्लांट को दिसंबर 2026 तक शुरू करने की योजना है. भारत इस समय 75% सोलर ग्लास इंपोर्ट कर रहा है.
Borosil Renewables का शेयर इस समय 585 रुपए पर है. अप्रैल 2022 में शेयर ने 833 रुपए का लाइफ हाई बनाया था. 2025 में शेयर ने 660 रुपए का हाई और 441 रुपए का लो बनाया. 2024 में 669 रुपए का हाई और 402 रुपए का लो बनाया. कंपनी का मार्केट कैप 8000 करोड़ रुपए के करीब है. FII के पास 4.62%, DII के पास 0.72% हिस्सेदारी है. प्रमोटर के पास 61.93% हिस्सेदारी है. 258992 रीटेल निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है और इनकी हिस्सेदारी 25.45% है. पिछले 3 सालों में स्टॉक ने खास प्रदर्शन नहीं किया है. इस साल अब तक 6% का रिटर्न दिया है.
Exide Industries बैटरी बनाने वाली दिग्गज कंपनी है. सोलर एनर्जी स्पेस में कंपनी की मजबूत पकड़ है. यह कंपनी सोलर बैटरी बनाती है. इसके अलावा सोलर इन्वर्टर, सोलर पीवी मॉड्यूल भी बनाती है. सब्सिडियरी की मदद से यह लेड री-साइकिलिंग प्लांट भी रन करती है. यह शेयर 420 रुपए पर है. इसके लिए 52 वीक्स हाई 535 रुपए और लो 327 रुपए है. इस साल अब तक शेयर ने कोई रिटर्न नहीं दिया है. एक साल में -14% और दो साल में 58% की तेजी आई है. FII/DII की हिस्सेदारी 11.47%/17.39% है जबकि प्रमोटर की हिस्सेदारी 45.99% पर है.
Q1. 2030 तक भारत का सोलर एनर्जी कैपेसिटी क्या लक्ष्य है?
Q2. सोलर पैनल्स का लाइफ स्पैन कितना होता है?
Q3. देश में सोलर वेस्ट की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावना क्या है?
Q4.सोलर वेस्ट रिसाइक्लिंग से क्या अवसर उत्पन्न होंगे?
Q5. Borosil Renewables और Exide Industries इस क्षेत्र में कैसे योगदान दे रही हैं?
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