म्यूचुअल फंड निवेशकों की बल्ले-बल्ले! अब डीमैट अकाउंट में भी मिलेगी SWP और STP की जादुई सुविधा

SEBI ने डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों के लिए SWP और STP की सुविधा का प्रस्ताव दिया है. अब निवेशकों को बार-बार रिडेम्पशन निर्देश देने की जरूरत नहीं होगी. पूरी जानकारी के लिए पढ़ें.
म्यूचुअल फंड निवेशकों की बल्ले-बल्ले! अब डीमैट अकाउंट में भी मिलेगी SWP और STP की जादुई सुविधा

अब डीमैट अकाउंट में भी मिलेगी SWP और STP की जादुई सुविधा

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो अपने म्यूचुअल फंड को डीमैट अकाउंट में रखना पसंद करते हैं, तो आपके लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है. शेयर बाजार की निगरानी करने वाली संस्था SEBI ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो आपकी निवेश की राह को और भी आसान बना देगा.

अब आपको अपने निवेश से पैसे निकालने या उन्हें एक फंड से दूसरे फंड में ट्रांसफर करने के लिए बार-बार माथापच्ची नहीं करनी होगी. सेबी का यह नया कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी काम करने की आसानी को बढ़ावा देने वाला है. चलिए जानते हैं कि आखिर यह पूरा माजरा क्या है और इससे आपको क्या फायदा होने वाला है.

क्या है सेबी का नया प्रस्ताव?

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अभी तक के नियम के मुताबिक, अगर आपके पास म्यूचुअल फंड यूनिट्स डीमैट अकाउंट में हैं, तो आप सिस्टमैटिक तरीके से पैसे निकालने (SWP) या ट्रांसफर करने (STP) की सुविधा का फायदा आसानी से नहीं उठा पाते थे. यह सुविधा मुख्य रूप से उन लोगों के लिए थी जो सीधे फंड हाउस के साथ 'स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट' मोड में निवेश करते थे.

लेकिन अब सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि डीमैट होल्डर्स के लिए भी 'स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन' यानी एक बार निर्देश देकर काम करने की सुविधा शुरू की जाए. इसका मतलब यह है कि आपको हर बार पैसे निकालने या ट्रांसफर करने के लिए अलग से फॉर्म या निर्देश नहीं देने होंगे. आप एक ही बार में अपना मैनडेट रजिस्टर कर पाएंगे और सारा काम अपने आप होता रहेगा.

पुराने सिस्टम का झंझट होगा खत्म

फिलहाल डीमैट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों को रिडेम्पशन के लिए हर बार अलग से निर्देश देने पड़ते हैं. इसके लिए डिलीवरी इंस्ट्रक्शन स्लिप (DIS) का इस्तेमाल होता है या फिर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ती है. कुछ निवेशक अपने स्टॉक ब्रोकर को पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) या डीडीपीआई (DDPI) दे देते हैं ताकि ब्रोकर उनके बदले यह काम कर सके.

लेकिन सेबी ने एक बहुत पते की बात कही है. सेबी का मानना है कि पावर ऑफ अटॉर्नी देने से निवेशक का अपने निवेश पर सीधा कंट्रोल कम हो जाता है. नया प्रस्ताव आने के बाद निवेशकों को किसी को अपनी चाबी सौंपने की जरूरत नहीं होगी, वे खुद एक बार निर्देश देकर अपने पैसों को मैनेज कर सकेंगे.

दो चरणों में लागू होगा नया नियम

सेबी ने इस सुविधा को शुरू करने के लिए दो फेज का प्लान बनाया है-

पहला फेज: इसमें निवेशकों को डिपॉजिटरी या स्टॉक एक्सचेंज के जरिए यूनिट-आधारित SWP और STP मैनडेट रजिस्टर करने की सुविधा मिलेगी. ये ट्रांजैक्शन स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर पूरे किए जाएंगे.

दूसरा फेज: इस चरण में सारा काम रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट्स (RTA) के पास चला जाएगा. यहां आपको और भी एडवांस विकल्प मिलेंगे, जैसे अमाउंट-आधारित विड्रॉल या 'स्विंग-एसटीपी'. यानी आप तय कर पाएंगे कि आपको कितने रुपये निकालने हैं या मुनाफे के हिसाब से कितना पैसा ट्रांसफर करना है.

निवेशकों को क्या होगा फायदा?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव से डीमैट अकाउंट और ट्रेडिशनल म्यूचुअल फंड अकाउंट के बीच का बड़ा अंतर खत्म हो जाएगा. अब डीमैट में म्यूचुअल फंड रखना और भी फायदेमंद होगा क्योंकि आपको वही सारी सहूलियतें मिलेंगी जो बाकी निवेशकों को मिलती हैं. इससे लॉन्ग टर्म के निवेशकों को बहुत राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें अब ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

जनता की राय का इंतजार

सेबी ने इस प्रस्ताव पर आम जनता और स्टेकहोल्डर्स से 26 फरवरी 2026 तक सुझाव और कमेंट मांगे हैं. एक बार जब लोगों की राय मिल जाएगी, तो सेबी फाइनल फ्रेमवर्क जारी कर देगा. इसके बाद डीमैट होल्डर्स के लिए म्यूचुअल फंड मैनेज करना बच्चों का खेल हो जाएगा.

आपके लिए क्या मायने रखती है खबर

सेबी का यह प्रस्ताव म्यूचुअल फंड की दुनिया में एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है. डीमैट अकाउंट में यूनिट्स रखने की सुविधा तो पहले से थी, लेकिन SWP और STP जैसे फीचर्स की कमी की वजह से कई लोग हिचकिचाते थे. अब जब यह सुविधा मिल जाएगी, तो न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा. यह डिजिटल इंडिया की दिशा में निवेश की प्रक्रिया को और भी सरल बनाने वाला एक बेहतरीन कदम है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 सेबी ने डीमैट म्यूचुअल फंड होल्डर्स के लिए क्या नया प्रस्ताव दिया है?

सेबी ने डीमैट अकाउंट में म्यूचुअल फंड रखने वाले निवेशकों के लिए स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन के जरिए SWP और STP की सुविधा देने का प्रस्ताव दिया है.

Q2 अभी डीमैट निवेशकों को पैसे निकालने के लिए क्या करना पड़ता है?

अभी निवेशकों को हर बार अलग से निर्देश (DIS) देना पड़ता है या ब्रोकर को पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) देनी पड़ती है, जिसमें कंट्रोल कम हो जाता है.

Q3 क्या इस प्रस्ताव से निवेशकों का कंट्रोल बढ़ेगा?

हां, क्योंकि अब निवेशकों को किसी को पावर ऑफ अटॉर्नी देने की जरूरत नहीं होगी, वे खुद एक बार रजिस्ट्रेशन करके ऑटोमैटिक पेमेंट सेट कर पाएंगे.

Q4 यह नया नियम कितने चरणों में लागू किया जाएगा?

सेबी ने इसे दो फेज में लागू करने की योजना बनाई है, जिसमें दूसरे फेज में अमाउंट-आधारित और स्विंग-एसटीपी जैसे एडवांस फीचर्स मिलेंगे.

Q5 इस प्रस्ताव पर अपनी राय कब तक दी जा सकती है?

आम जनता और एक्सपर्ट्स इस प्रस्ताव पर 26 फरवरी 2026 तक अपने कमेंट्स और सुझाव सेबी को भेज सकते हैं.

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