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Renewable Energy Stocks पर HSBC ने शुरू की कवरेज. (Image: AI-generated)
Stocks to BUY: भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर अब एक नए मोड़ पर खड़ा है. पहले जहां सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग (capital) की होती थी, अब असली गेम एक्जीक्यूशन का हो गया है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC की ताजा रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सेक्टर में ग्रोथ की कहानी मजबूत है और आने वाले सालों में कुछ चुनिंदा कंपनियां तेजी से आगे निकल सकती हैं.
ब्रोकरेज ने ACME Solar, Clean Max Enviro पर कवरेज की शुरुआत की है, और BUY रेटिंग के साथ 28 से 30% तक का अपसाइड देख रहा है. इस रिपोर्ट के बाद दोनों ही शेयरों में तेजी दिखी. ACME Solar 7% तक उछलकर 286 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया था.
HSBC के मुताबिक भारत में पावर डिमांड की स्ट्रक्चरल ग्रोथ मजबूत बनी हुई है. तेजी से बढ़ता शहरीकरण, इंडस्ट्रियल ग्रोथ और इलेक्ट्रिफिकेशन इस सेक्टर को लंबी अवधि का सपोर्ट दे रहे हैं.
सबसे अहम बात ये है कि अब नई बिजली क्षमता का बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल से आ रहा है. FY26 में करीब 88% नई क्षमता रिन्यूएबल से आने का अनुमान है, जबकि पिछले 5 साल में भी करीब 80% नई कैपेसिटी इसी सेक्टर से आई है.
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रिन्यूएबल एनर्जी अब सिर्फ पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि जेब के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीन एनर्जी, थर्मल पावर के मुकाबले 30-50% तक सस्ती है.
यही वजह है कि बड़ी कंपनियां (corporates) और DISCOMs तेजी से इसे अपना रहे हैं. इससे सेक्टर की डिमांड लगातार बढ़ रही है.
रिन्यूएबल सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती थी- बिजली की अनियमित सप्लाई. लेकिन अब Battery Energy Storage Systems (BESS) इस समस्या को हल कर रहे हैं. BESS खासतौर पर शाम के समय (evening demand) में बिजली की कमी को पूरा करेगा. इससे रिन्यूएबल एनर्जी की विश्वसनीयता बढ़ेगी और एडॉप्शन और तेज होगा.
इस समय रिन्यूएबल सेक्टर में दो मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहे हैं:
| मॉडल | क्या है |
| D2D (DISCOM Supply) | बिजली कंपनियों के जरिए सप्लाई |
| D2C (Direct Corporate Supply) | कंपनियों को सीधे ग्रीन एनर्जी सप्लाई |
दोनों मॉडल साथ-साथ ग्रोथ कर रहे हैं, जिससे सेक्टर का स्कोप और बड़ा हो गया है.
HSBC ने इस थीम में दो कंपनियों पर खास भरोसा जताया है, जहां से मजबूत रिटर्न की उम्मीद है.
इस कंपनी को HSBC ने BUY रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया है और 350 रुपये का टारगेट दिया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 23% अपसाइड दिखाता है. शेयर सोमवार को BSE पर 5.4% की तेजी के साथ 283 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
कंपनी के पास करीब 6GW की कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी है, जिससे आने वाले समय में कमाई की अच्छी विजिबिलिटी मिलती है. इसके अलावा FDRE (Firm & Dispatchable Renewable Energy) और BESS प्रोजेक्ट्स कंपनी के रिटर्न को और बेहतर बना सकते हैं.
HSBC का अनुमान है कि FY26 से FY28 के बीच कंपनी का EBITDA CAGR करीब 72% रह सकता है, जो काफी मजबूत ग्रोथ को दिखाता है.
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Clean Max को भी HSBC ने BUY रेटिंग दी है और 1150 रुपये का टारगेट रखा है, जो करीब 30% अपसाइड का संकेत देता है. शेयर सोमवार को 2.7% की तेजी के साथ 885 रुपये पर ट्रेड कर रहा था.
यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी C&I (Commercial & Industrial) रिन्यूएबल एनर्जी सप्लायर है. चूंकि ग्रीन एनर्जी पारंपरिक बिजली से 30-45% सस्ती है, इसलिए कंपनियां तेजी से इसकी ओर शिफ्ट हो रही हैं. HSBC के मुताबिक FY26-28 के दौरान कंपनी का EBITDA CAGR करीब 60% रह सकता है.

अगर आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो रिन्यूएबल एनर्जी एक मजबूत थीम के तौर पर उभर रहा है. सेक्टर में ग्रोथ के कई ट्रिगर मौजूद हैं- सस्ती लागत, बढ़ती डिमांड, सरकारी सपोर्ट और नई टेक्नोलॉजी. हालांकि, ध्यान रखना जरूरी है कि इस सेक्टर में एक्जीक्यूशन सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर भी है. इसलिए निवेश से पहले कंपनियों की प्रोजेक्ट डिलीवरी और बैलेंस शीट पर जरूर नजर डालें.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अभी इतना फोकस क्यों है?
क्योंकि भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और ग्रीन एनर्जी अब सस्ती भी हो गई है. इसके चलते कंपनियां और सरकार दोनों इस सेक्टर पर जोर दे रहे हैं.
Q2 BESS क्या है और यह क्यों जरूरी है?
BESS यानी Battery Energy Storage System. यह बिजली को स्टोर करने में मदद करता है, जिससे शाम के समय भी रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल हो सके.
Q3 क्या रिन्यूएबल एनर्जी थर्मल पावर से सस्ती है?
हाँ, रिपोर्ट के मुताबिक ग्रीन एनर्जी थर्मल पावर से करीब 30-50% तक सस्ती पड़ रही है, यही इसकी डिमांड बढ़ने की बड़ी वजह है.
Q4 HSBC ने किन शेयरों पर BUY रेटिंग दी है?
HSBC ने ACME Solar Holdings और Clean Max Enviro Energy Solutions पर BUY रेटिंग दी है, जिनमें 20-30% तक अपसाइड का अनुमान है.
Q5 क्या अभी इन शेयरों में निवेश करना सही रहेगा?
लॉन्ग टर्म के लिए यह सेक्टर मजबूत दिख रहा है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की execution क्षमता और फाइनेंशियल्स जरूर देखना चाहिए.