LPG Supply Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार और कई सेक्टरों पर भी दिखने लगा है. ईरान के हमले के बाद कतर के बड़े LNG एक्सपोर्ट हब Ras Laffan में सप्लाई बाधित हुई है, जिससे ग्लोबल LNG सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया. एशियाई स्पॉट LNG कीमतें करीब 10 डॉलर प्रति MMBtu से बढ़कर 25 डॉलर के ऊपर पहुंच गुई हैं.
1/11भारत के लिए यह संकट ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि देश की गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. करीब 55-65% LNG सप्लाई Strait of Hormuz से होकर आती है और अकेले कतर से लगभग 35-40% LNG आयात होता है. ऐसे में सप्लाई बाधित होने का असर अब अलग-अलग सेक्टरों और कंपनियों पर दिखाई देने लगा है.
2/11गैस सप्लाई में कटौती का पहला असर सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर पड़ सकता है. Indraprastha Gas Limited और Mahanagar Gas Limited जैसी कंपनियों को कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स के लिए गैस सप्लाई में कटौती का सामना करना पड़ सकता है. इससे इन कंपनियों के वॉल्यूम ग्रोथ पर दबाव बन सकता है.
3/11टाइल्स इंडस्ट्री में गैस सबसे अहम इनपुट है. Kajaria Ceramics और Cera Sanitaryware जैसी कंपनियों के लिए गैस लागत का करीब 25-30% हिस्सा बनाती है. मोरबी के सिरेमिक क्लस्टर में गैस सप्लाई घटने के कारण कई यूनिट्स का उत्पादन प्रभावित होने लगा है.
4/11वुड पैनल इंडस्ट्री में भी इनपुट कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है. Century Plyboards India और Greenply Industries के लिए कच्चे माल की कीमतों में 13% से 46% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. ऐसे में कंपनियों के लिए प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है.
5/11इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में प्लास्टिक और केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, जिनका उत्पादन गैस आधारित होता है. PG Electroplast और EPACK Durable जैसी कंपनियों को गैस सप्लाई में कटौती की खबरें सामने आई हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है.
6/11ग्लास इंडस्ट्री पूरी तरह गैस आधारित फर्नेस पर निर्भर रहती है. Borosil Limited और Asahi India Glass जैसी कंपनियों के लिए गैस की कमी बड़ा जोखिम बन सकती है. मोरबी में 100 से ज्यादा यूनिट्स का कामकाज प्रभावित होने की खबरें हैं और Borosil को भी सप्लाई में रुकावट की जानकारी मिली है.
7/11PVC की कीमतों में तेजी से पाइप कंपनियों को कुछ समय के लिए इन्वेंटरी गेन मिल सकता है. Astral Limited, Finolex Industries और Supreme Industries को अल्पकाल में फायदा हो सकता है क्योंकि PVC कीमतें जनवरी से करीब 47% बढ़कर 101 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. हालांकि यह फायदा ज्यादा समय तक टिके रहने की संभावना कम मानी जा रही है.
8/11कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी से पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक महंगा हो सकता है. Aarti Industries और Deepak Nitrite जैसी केमिकल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है.
9/11बेस ऑयल की कीमत बढ़ने से लुब्रिकेंट कंपनियों की लागत बढ़ सकती है. Gandhar Oil Refinery India, Castrol India और Gulf Oil Lubricants India के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ना चिंता का कारण बन सकता है.
10/11ऑटो सेक्टर में भी गैस का इस्तेमाल पेंटिंग और हीट ट्रीटमेंट प्रक्रियाओं में होता है. इस वजह से Mahindra & Mahindra, Maruti Suzuki और Tata Motors जैसी कंपनियों की उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है.
11/11गैस सप्लाई संकट का असर केवल एनर्जी सेक्टर तक सीमित नहीं है. इससे कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ सकती है और कुछ कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है. निवेशकों के लिए ऐसे समय में उन कंपनियों पर खास नजर रखना जरूरी है जो गैस या पेट्रोकेमिकल इनपुट पर ज्यादा निर्भर हैं. वहीं कुछ सेक्टरों में अल्पकालिक इन्वेंटरी गेन भी देखने को मिल सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है.