OLA Share: QIP के जरिए 13,94,31,121 शेयर जारी, फंड जुटाने पर जोर, लेकिन एक्सपर्ट की दूर रहने की सलाह, जानें क्यों?

ओला इलेक्ट्रिक का QIP लॉन्च हो गया है. इसके तहत कंपनी 13.94 करोड़ नए शेयर जारी कर कैपिटल रेज कर रही है. कंपनी सेल्स के मोर्चे पर भी ग्रोथ दिखा रही है लेकिन एक्सपर्ट को अभी ये शेयर क्यों रिस्की लग रहा है, यहां जानें.
OLA Share: QIP के जरिए 13,94,31,121 शेयर जारी, फंड जुटाने पर जोर, लेकिन एक्सपर्ट की दूर रहने की सलाह, जानें क्यों?

OLA QIP लॉन्च, कंपनी जुटा रही फ्रेश इक्विटी, एक्सपर्ट ने निवेशकों को दी ये सलाह (फोटो- AI)

इलेक्ट्रिक टू व्हीलर बनाने वाली कंपनी OLA Electric ने फंड जुटाने के उद्देश्य से QIP यानी कि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट आज लॉन्च किया है. इसके लिए कंपनी ने 13.94 करोड़ फ्रेश शेयर जारी किए हैं ताकि कंपनी कैपिटल जुटा सके. इस QIP के जरिए क्वालिफाइड इंटीट्यूशनल इन्वेस्टर्स जैसे म्यूचुअल फंड, इंश्योरेंस कंपनी जैसे संस्थान निवेश कर सकते हैं. OLA का QIP आज से जारी हो गया है, लेकिन स्टॉक में गिरावट का मूमेंटम दिख रहा है.

मंगलवार को ओला इलेक्ट्रिक के शेयर ने करीब 3% का इंट्राडे गिरावट दर्ज की. शेयर ने दिन का लो 38.15 रुपए का भाव छुआ. हालांकि ये शेयर अब रिकवरी होकर 39.14 के भाव पर ट्रेड कर रहा है. लेकिन QIP इश्यू, फंड जुटाने के बाद भी एक्सपर्ट ने इस शेयर से दूरी बनाने को कहा है. एक्सपर्ट का कहना है कि अभी ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयर में रिस्क की संभावना है. ऐसे में निवेशकों को इस शेयर से दूरी बनानी चाहिए.

फंड जुटाकर घाटा कम करने की कोशिश

मार्केट एक्सपर्ट अविनाश गोरक्षकर ने ज़ी बिजनेस के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ओला इलेक्ट्रिक इस समय कारोबार और प्रतिस्पर्धा दोनों मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है. कंपनी की तेज वाहन बिक्री के मुकाबले उसका आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क कमजोर माना जा रहा है, जिसका असर ग्राहकों के अनुभव और कारोबार पर पड़ रहा है. इसके साथ ही EV टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है.

OLA Electric

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो ओला इलेक्ट्रिक का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग कैश फ्लो (OCF) अभी भी घाटे में है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसमें कुछ सुधार देखने को मिला है. कंपनी का OCF घटकर ₹778 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह ₹2,391 करोड़ के घाटे पर था.

घाटा कम करने और कारोबार संभालने की कोशिश

एक्सपर्ट अविनाश गोरक्षकर के मुताबिक यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और घाटा कम करने की दिशा में उठाया गया प्रयास माना जा रहा है. हालांकि निकट अवधि में कंपनी के मुनाफे में लौटने की संभावना सीमित दिखाई दे रही है और अगले 2-3 तिमाहियों तक दबाव बने रहने का अनुमान लगाया जा रहा है. ऐसे में फिलहाल स्टॉक से दूरी बनाई जा सकती है.

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काफी समय से कंपनी प्रबंधन की ओर से सुधार और ग्रोथ की बात की जा रही है, लेकिन निवेशक अब केवल बयानों के बजाय मजबूत वित्तीय नतीजों का इंतजार कर रहे हैं.

EV बाजार में बढ़ी चुनौती

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है. इस सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प, बजाज और टीवीएस जैसी कंपनियां मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर नकदी स्थिति के साथ मौजूद हैं. इसके मुकाबले मौजूदा पूंजी संरचना के आधार पर ओला इलेक्ट्रिक अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति में दिखाई देती है.

निवेशकों की नजर आगे के प्रदर्शन पर

QIP पूरा होने के बाद बाजार की नजर कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन और वित्तीय नतीजों पर रहेगी. अगर आने वाली तिमाहियों में कारोबार और मुनाफे में सुधार नहीं दिखता है तो शेयर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. फिलहाल बाजार इसे उच्च जोखिम वाले निवेश के रूप में देख रहा है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है.

OLA Electric के QIP की जानकारी

कंपनी अब नई पूंजी जुटाने के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) लेकर आई है. इसके तहत ओला इलेक्ट्रिक करीब ₹500 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. इस प्रक्रिया में करीब 13.94 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं.

SEBI के नियमों के अनुसार इस इश्यू का फ्लोर प्राइस ₹37.74 प्रति शेयर तय किया गया है. वहीं इंडिकेटिव इश्यू प्राइस ₹35.86 प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछली क्लोजिंग कीमत के मुकाबले करीब 9.28% की छूट पर है.

कैसे रहे कंपनी के तिमाही नतीजे?

मार्च तिमाही (Q4FY26) में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस घटकर ₹500 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹870 करोड़ था. घाटे में यह कमी मुख्य रूप से खर्चों में कटौती की वजह से आई. हालांकि इससे पहले दिसंबर तिमाही में कंपनी का नेट लॉस ₹487 करोड़ दर्ज किया गया था.

पूरे वित्त वर्ष FY26 की बात करें तो कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस घटकर ₹1,833 करोड़ रहा, जबकि FY25 में यह ₹2,276 करोड़ था. यानी कंपनी घाटा कम करने में सफल रही है. हालांकि दूसरी तरफ कंपनी की परिचालन आय में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. FY26 में कंपनी का राजस्व घटकर ₹2,253 करोड़ रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष FY25 में ₹4,514 करोड़ था.

कैसी रही कंपनी की सेल्स?

कंपनी ने इस वित्त वर्ष सेल्स के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन किया है. इस फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत यानी कि अप्रैल में कंपनी ने 12,323 से ज्यादा यूनिट्स को बेचा. वहीं बीते महीने यानी कि मई में कंपनी ने 15,139 यूनिट्स को बेचा, जो 23% तेजी को दर्शाता है.

स्टॉक का प्रदर्शन

DurationChange (%)
1 हफ्ता3.51
1 महीना6.43
3 महीना61.70
6 महीना-2.75
1 साल-27.51
YTD3.76

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