इस मल्टीबैगर स्टॉक में फिर आएगी तेजी! नतीजों के बाद 7 ब्रोकरेज बुलिश, बढ़िया रिटर्न की उम्मीद

इस कंपनी के चौथी तिमाही नतीजों के बाद Goldman Sachs, HSBC, Citi और CLSA समेत 7 ब्रोकरेज कंपनियां स्टॉक पर बुलिश नजर आई हैं. सोमवार को शेयर में करीब 6% की तेजी देखने को मिली. आगे भी ये शेयर दमदार रिटर्न दिला सकता है.
इस मल्टीबैगर स्टॉक में फिर आएगी तेजी! नतीजों के बाद 7 ब्रोकरेज बुलिश, बढ़िया रिटर्न की उम्मीद

इस मल्टीबैगर स्टॉक में बनेगा पैसा! नोट कर लें नाम (फोटो - AI)

देश की दिग्गज कमर्शियल व्हीकल कंपनी Eicher Motors ने हाल ही में चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए थे. शुक्रवार को कंपनी ने तिमाही नतीजे जारी किए और अब हफ्ते के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को इस शेयर पर एक साथ 7 ब्रोकरेज की राय आई है. अलग-अलग ब्रोकरेज कंपनी ने इस शेयर पर BUY की रेटिंग दी है. साथ ही टारगेट प्राइस भी बढ़ाकर दिया है.

इतना ही नहीं, आयशर मोटर्स का शेयर सोमवार (25 मई 2026) को करीब 6% की तेजी के साथ ट्रेड कर रहा है. बाजार बंद होते-होते इस शेयर में 6 फीसदी की तेजी दिख रही है. वहीं स्टॉक का भाव 7450 रुपए पर ट्रेड कर रहा है. लेकिन अभी भी इस शेयर में जबरदस्त रैली की उम्मीद है.

Eicher Motors: 7 ब्रोकरेज बुलिश

ब्रोकरेजरेटिंगटारगेट प्राइस (रुपए)
JP Morganओवरवेट7700 रुपए
UBSबाय8550 रुपए
Goldman Sachsबाय8400 रुपए
HSBCबाय8200 रुपए
Citiबाय8350 रुपए
CLSAएक्यूमुलेट7651 रुपए
Bernsteinमार्केट परफॉर्म7000 रुपए

Goldman Sachs ने क्या बोला?

ब्रोकरेज ने इस शेयर पर खरीदारी की राय दी है. साथ ही अपनी कमेंट्री में कहा कि मैनेजमेंट ने बताया कि मजदूरों की कमी और कच्चे माल/गैस की सप्लाई में दिक्कत की वजह से मई में प्रोडक्शन प्रभावित हुआ था. हालांकि अब ये समस्याएं सुलझा ली गई हैं.

कंपनी के पास मौजूदा समय में इन्वेंट्री स्तर काफी कम है और केवल 7-8 दिनों का स्टॉक बचा है. डीलर्स के पास भी इन्वेंट्री इससे कम स्तर पर चल रही है. अप्रैल में कंपनी ने 175 बेसिस प्वाइंट्स का प्राइस हाइक किया है, जिससे कमोडिटी लागत के 300-350 बेसिस प्वाइंट्स के असर का करीब 50% तक संतुलन हो सकता है. इसके अलावा आगे और उपायों से दबाव कम किया जा सकता है.

HSBC क्यों बुलिश?

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों बाजारों में मांग की मजबूत रफ्तार आगे भी बनी रहेगी. हालांकि महंगाई और बढ़ती लागत निकट भविष्य में दबाव बना सकती है.

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Royal Enfield ने बताया कि Cheyyar प्लांट में चल रहे ब्राउनफील्ड विस्तार के जरिए 20 लाख यूनिट की वार्षिक क्षमता बढ़ाने के अलावा कंपनी अब एक नए ग्रीनफील्ड विस्तार की भी तैयारी कर रही है.

Citi ने क्या कहा?

कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजे अनुमान से थोड़े बेहतर रहे. बेहतर औसत बिक्री कीमत (ASP) और मजबूत ग्रॉस मार्जिन की वजह से प्रदर्शन मजबूत दिखा. मैनेजमेंट ने भारत में मिड-सेगमेंट मोटरसाइकिल्स की मांग को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है. इस सेगमेंट में रॉयल एनफील्ड की मजबूत पकड़ बनी हुई है.

मांग के मजबूत संकेत लगातार देखने को मिल रहे हैं. पूछताछ (Enquiry) में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई है, हालांकि अप्रैल महीने में कर्मचारियों की कमी और LPG सप्लाई में दिक्कत की वजह से डिलीवरी प्रभावित हुई थी.

VECV बिजनेस में भी मांग का ट्रेंड स्थिर बना हुआ है. कंपनी का मानना है कि Volvo के साथ नया फाइनेंसिंग जॉइंट वेंचर आगे चलकर बिक्री वॉल्यूम बढ़ाने में मदद करेगा. हालांकि कंपनी ने यह भी माना कि लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है. अब तक किए गए प्राइस हाइक से बढ़ती लागत के असर का केवल करीब 50% हिस्सा ही कवर हो पाया है.

CLSA को भरोसा

कंपनी को उम्मीद है कि Royal Enfield इंडस्ट्री के मुकाबले बेहतर वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज करेगी. इसकी बड़ी वजह 350cc से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिल्स की मजबूत मांग है. ब्रोकरेज ने FY26-28 के दौरान RE के वॉल्यूम में करीब 12% CAGR ग्रोथ का अनुमान लगाया है.

VECV बिजनेस को लेकर ब्रोकरेज ने सतर्क लेकिन सकारात्मक रुख अपनाया है. हालांकि मिडिल ईस्ट संकट और कमजोर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों की वजह से चुनौतियां बनी हुई हैं.

(डिस्‍क्‍लेमर: यहां स्‍टॉक्‍स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज/एक्सपर्ट द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से सलाह लें.)

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 ब्रोकरेज कंपनियां किसी शेयर पर BUY रेटिंग क्यों देती हैं?

जब ब्रोकरेज को लगता है कि कंपनी की ग्रोथ, कमाई और भविष्य मजबूत है, तब वे BUY रेटिंग देती हैं.

Q2 किसी ऑटो कंपनी की ग्रोथ किन फैक्टर्स पर निर्भर करती है?

डिमांड, प्रोडक्शन क्षमता, कच्चे माल की लागत, नई लॉन्चिंग और आर्थिक माहौल जैसे फैक्टर्स अहम होते हैं.

Q3 कमोडिटी महंगाई का कंपनियों पर क्या असर पड़ता है?

कच्चे माल की लागत बढ़ने से कंपनी के मार्जिन और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है.

Q4 कैपेसिटी एक्सपेंशन का क्या मतलब होता है?

जब कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए नए प्लांट या विस्तार करती है, उसे कैपेसिटी एक्सपेंशन कहा जाता है.

Q5 लॉन्ग टर्म निवेशकों को ऑटो सेक्टर में क्या देखना चाहिए?

ब्रांड की मजबूती, बिक्री ग्रोथ, मार्जिन, नई टेक्नोलॉजी और कंपनी की भविष्य की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए.

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