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शेयर बाजार में जब मैक्वेरी (Macquarie) जैसी बड़ी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म कोई रिपोर्ट जारी करती है, तो उथल-पुथल मचना तय है. इस बार मैक्वेरी ने अपनी पैनी नजर डाली है भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सेक्टर - बैंकिंग और इंश्योरेंस पर. इस रिपोर्ट ने बाजार में एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां कुछ बैंकों को 'हीरो' बनाकर खरीदने की सलाह दी गई है, वहीं कुछ बड़े नामों को 'जीरो' की तरफ धकेलते हुए उनकी रेटिंग घटा दी गई है.
मैक्वेरी प्राइवेट बैंकों को लेकर काफी बुलिश है और इसके पीछे ठोस वजहें हैं. भले ही RBI आने वाले समय में ब्याज दरें घटाए, मैक्वेरी का मानना है कि प्राइवेट बैंकों के NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी मुनाफे का मार्जिन) पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. ये बैंक अपने सेविंग और टर्म डिपॉजिट की लागत को कंट्रोल कर रहे हैं, जिससे उनके मुनाफे को सपोर्ट मिलेगा. सबसे बड़ी बात, मैक्वेरी को उम्मीद है कि अगले तीन सालों में प्राइवेट बैंकों की EPS (प्रति शेयर कमाई) में 15% की शानदार ग्रोथ देखने को मिल सकती है. मैक्वेरी ने इस सेक्टर में HDFC Bank और Axis Bank को अपना टॉप पिक बनाया है.
वहीं दूसरी तरफ, सरकारी बैंकों को लेकर मैक्वेरी का रुख 'सतर्क' यानी Cautious है. ब्रोकरेज को डर है कि वित्त वर्ष 2026 में सरकारी बैंकों की कमाई घट सकती है. डिपॉजिट्स यानी पैसा जमा कराने के मामले में सरकारी बैंकों का मार्केट शेयर लगातार घट रहा है, जो एक बड़ी चिंता का विषय है.

IndusInd Bank को "डबल डाउनग्रेड" किया गया है, यानी सीधे दो पायदान नीचे. Outperform से सीधे Underperform. साथ ही टारगेट प्राइस में लगभग 50% की भारी कटौती की गई है, जो एक बहुत बड़ा निगेटिव संकेत है. Kotak Bank और SBI Card में कहानी थोड़ी अलग है. हालांकि रेटिंग घटाकर 'Neutral' कर दी गई है, लेकिन टारगेट प्राइस बढ़ाया गया है. इसका मतलब है कि ब्रोकरेज को लगता है कि स्टॉक में सीमित तेजी बची है और मौजूदा स्तरों से बहुत बड़े रिटर्न की उम्मीद नहीं है. इंश्योरेंस सेक्टर के दिग्गज HDFC Life को भी 'Underperform' की रेटिंग दी गई है, जो इस सेक्टर में चुनौतियों की ओर इशारा कर रहा है.
मैक्वेरी की यह रिपोर्ट निवेशकों के लिए एक वेक-अप कॉल है. इससे कुछ बड़े संकेत मिलते हैं. बाजार का रुझान बड़ी, स्थिर और मजबूत ग्रोथ वाली कंपनियों की तरफ है. मैक्वेरी का दांव साफ तौर पर HDFC और Axis Bank जैसे लीडर्स पर है. अब ऐसा नहीं है कि पूरा बैंकिंग सेक्टर एक साथ चलेगा. कुछ बैंक अच्छा प्रदर्शन करेंगे, जबकि कुछ पिछड़ सकते हैं. निवेशकों को स्टॉक-स्पेसिफिक होना पड़ेगा. हमेशा याद रखें कि यह एक ब्रोकरेज फर्म की राय है. किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले अपनी खुद की रिसर्च करें या अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.