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LIC के नतीजों के बाद ग्लोबल ब्रोकरेज हैं सुपर बुलिश. (प्रतीकात्मक तस्वीर: AI/ChatGPT)
LIC Share Price: सरकारी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India यानी LIC के शेयरों में गुरुवार को जोरदार तेजी दिखाई दी. कंपनी ने कल चौथी तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए थे और पहली बार बोनस इशू का ऐलान किया, जिसके बाद ब्रोकरेज शेयर पर बुलिश नजर आ रहे हैं. LIC का स्टॉक इंट्राडे में करीब 5% चढ़कर ₹839 के हाई पर पहुंच गया था. वहां से थोड़ा नीचे आकर ₹818 के आसपास ट्रेड कर रहा था.
दमदार Q4 नतीजों और मैनेजमेंट की पॉजिटिव कमेंट्री के बाद कई ब्रोकरेज ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं. सबसे ज्यादा चर्चा Citi की रिपोर्ट की हो रही है, जिसने LIC पर 1475 रुपये का टारगेट दिया है. मौजूदा भाव 818 रुपये के मुकाबले यह करीब 80% अपसाइड दिखाता है.
फोकस अब इस बात पर है कि क्या लंबे समय से दबाव में रहा यह सरकारी बीमा स्टॉक अब नई तेजी के दौर में प्रवेश कर सकता है.
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Citigroup ने LIC पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस 1345 रुपये से बढ़ाकर 1475 रुपये कर दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का Q4 ऑपरेशनल प्रदर्शन उम्मीद से काफी बेहतर रहा.
Citi के मुताबिक VNB यानी Value of New Business Margin में सालाना आधार पर करीब 690 बेसिस पॉइंट्स की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई. यह उनके अनुमान से भी लगभग 600 बेसिस पॉइंट ज्यादा रही. इसका मतलब है कि LIC अब नई पॉलिसियों से पहले के मुकाबले ज्यादा मुनाफा कमा रही है.
ब्रोकरेज ने कहा कि यह सुधार खासतौर पर नॉन-पार प्रॉडक्ट्स के बढ़ते योगदान की वजह से आया. आसान भाषा में समझें तो LIC अब ऐसे प्रोडक्ट ज्यादा बेच रही है जिनमें कंपनी का मार्जिन बेहतर होता है.
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Citi ने अपनी रिपोर्ट में Embedded Value यानी EV का भी जिक्र किया. FY26 में EV पर थोड़ा दबाव दिखा और सितंबर 2025 के मुकाबले इसमें 3% की गिरावट रही. इसकी बड़ी वजह निवेश पोर्टफोलियो में मार्क-टू-मार्केट असर रहा.
हालांकि मैनेजमेंट ने कहा कि मार्च 2026 तक जो नुकसान दिखा था, उसका करीब 80% हिस्सा मई के मध्य तक रिकवर हो चुका है. इससे निवेशकों को राहत मिली है कि बाजार में उतार-चढ़ाव का असर स्थायी नहीं है.
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मैनेजमेंट ने कॉन्कॉल में साफ कहा कि कंपनी अब लंबे समय के सुधार पर काम कर रही है. इसमें पुराने ग्राहकों को लंबे समय तक बनाए रखना, नए प्रोडक्ट लॉन्च करना और एजेंट्स की उत्पादकता बढ़ाना शामिल है. इसके अलावा LIC अब नॉन-एजेंसी चैनल्स पर भी फोकस बढ़ा रही है. यानी सिर्फ एजेंट नेटवर्क पर निर्भर रहने के बजाय कंपनी दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल से भी बिजनेस बढ़ाना चाहती है.
Jefferies Financial Group ने LIC पर BUY रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट 900 रुपये से बढ़ाकर 960 रुपये कर दिया है. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के मार्जिन में सुधार और मजबूत ग्रोथ आने वाले समय में शेयर को सपोर्ट करेगी.
Goldman Sachs ने LIC पर Neutral रेटिंग रखते हुए टारगेट 870 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये किया है. यानी यह ब्रोकरेज बहुत ज्यादा आक्रामक नहीं है, लेकिन कंपनी के प्रदर्शन में सुधार को स्वीकार कर रहा है.
वहीं Bernstein ने Market Perform रेटिंग के साथ 940 रुपये का टारगेट दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि LIC की नई पॉलिसी बिक्री में अच्छी ग्रोथ दिख रही है और non-par products की वजह से मार्जिन मजबूत हो रहे हैं.
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Zee Business की संवाददाता एकता सूरी के साथ बातचीत में LIC के CEO & MD आर. दोरईस्वामी ने कहा कि ग्रोथ इंडस्ट्री की ग्रोथ से ज़्यादा रखने पर फोकस है. Non Par पोर्टफ़ोलियो बढ़ाने पर कंपनी की स्ट्रेटेजी है. Non-Par Business Share 35%+ पहुंच गया है. LIC Persistency Ratio में मिक्स्ड ट्रेंड दिख रहा है. LIC AUM ₹57 लाख करोड़ के पार हो गया है. हेल्थ इंश्योरेंस बिज़नेस शुरू करने पर फ़ोकस अभी कम है. फिलहाल LODR नियमों के तहत आगे स्टेक डाइलूशन सरकार की कोशिश रहेगी कि इसी वित्तवर्ष में हो. RBI के साथ 50-100 साल लॉन्ग टर्म बांड पर चर्चा चल रही है.
बाजार को लेकर उन्होंने कहा कि Volatile मार्केट चिंता का विषय नहीं है. LIC लॉन्ग टर्म निवेश करता है. उन्होंने ये भी कहा कि NSE को आश्वासन दिया है कि IPO को सफल बनाने में योगदान देंगे. स्टेकहोल्डिंग पर उन्होंने कहा कि अगर बाकी निवेशक ज़्यादा शेयर डाइलूट कर रहे हैं तो ज़रूरी नहीं कि NSE के 10.7% में LIC स्टेक डाइलूट करेगा. बेचने की मजबूरी नहीं है.
LIC लंबे समय तक एक वैल्यू अनलॉक स्टोरी की तरह देखा जाता रहा है, लेकिन अब ऑपरेशनल प्रदर्शन भी मजबूत दिखने लगा है. मार्जिन सुधार, नए प्रोडक्ट्स, एजेंट नेटवर्क में मजबूती और बढ़ते non-par बिजनेस से कंपनी की कमाई की गुणवत्ता बेहतर हो रही है.
अगर मैनेजमेंट आने वाले क्वार्टर में भी यही ट्रेंड बनाए रखता है, तो LIC का शेयर धीरे-धीरे वैल्यूएशन री-रेटिंग की तरफ बढ़ सकता है. हालांकि प्रमोटर होल्डिंग स्ट्रक्चर और सरकारी हिस्सेदारी को लेकर अनिश्चितता अभी भी एक बड़ा ओवरहैंग बनी हुई है.