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इस एक शेयर से पा सकते हैं 42% का दमदार रिटर्न. (Image Source-AI)
शेयर बाजार में जब भी इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट्स की बात होती है, तो सबकी नजरें कुछ चुनिंदा बड़े नामों पर टिक जाती हैं. इन्हीं में से एक नाम है जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर (JSW Infra), जो इस वक्त निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स की पहली पसंद बना हुआ है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि कंपनी जिस रफ्तार से अपने कारोबार का दायरा बढ़ा रही है, उसे देखकर लग रहा है कि इसके शेयरों में अभी 42 फीसदी तक की तेजी आने की गुंजाइश बाकी है.
मौजूदा समय में जेएसडब्ल्यू इंफ्रा का भाव 253.40 रुपये के आसपास है, जबकि इसका नया टारगेट 360 रुपये दिया गया है. भारत के समुद्री व्यापार और पोर्ट सेक्टर में जो हलचल हो रही है, उसका सीधा फायदा इस कंपनी को मिलता दिख रहा है. आइए समझते हैं कि आखिर इस कंपनी के पास ऐसा क्या प्लान है, जो इसे दूसरों से अलग बनाता है.
अगर हम पूरे भारत के पोर्ट्स की बात करें, तो फरवरी 2026 में प्रमुख पोर्ट्स के वॉल्यूम में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. पेट्रोलियम, कंटेनर और कोकिंग कोल जैसे सेक्टर्स में अच्छी डिमांड रही है. जेएसडब्ल्यू इंफ्रा के लिए पिछला कुछ समय थोड़ा धीमा जरूर रहा, खासकर पारादीप आयरन ओर टर्मिनल की वजह से, लेकिन दिसंबर 2025 के बाद से वहां भी जबरदस्त रिकवरी आई है.
कंपनी को उम्मीद है कि वह वित्त वर्ष 2026 का अंत 123MT के वॉल्यूम के साथ करेगी. भले ही यह उनकी पिछली उम्मीद से थोड़ा कम हो, लेकिन आने वाले सालों के लिए तस्वीर बेहद साफ और मजबूत है. कंपनी ने हाल ही में जेएनपीए (JNPA) में अपना लिक्विड टर्मिनल भी शुरू कर दिया है, जिससे उसकी कुल क्षमता बढ़कर 181.4mtpa हो गई है.
जेएसडब्ल्यू इंफ्रा (JSW Infra) सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कदम बढ़ा दिए हैं. ओमान में 'मिनरल्स डेवलपमेंट ओमान' (MDO) के साथ मिलकर कंपनी एक विशाल 27mpta का ग्रीनफील्ड पोर्ट विकसित कर रही है. यह प्रोजेक्ट कंपनी को ग्लोबल मैप पर एक नई पहचान दिलाएगा.
वहीं दूसरी तरफ, मिडल ईस्ट के तनाव की वजह से कंपनी की फुजैरा (Fujairah) फैसिलिटी के एक स्टोरेज टैंक को नुकसान जरूर पहुंचा था, लेकिन कंपनी ने साफ कर दिया है कि उनके पास पर्याप्त इंश्योरेंस कवर है. इसका कंपनी के बड़े बिजनेस पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है. फुजैरा में कंपनी का 5mtpa का लिक्विड स्टोरेज टर्मिनल लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है.
पोर्ट्स के साथ-साथ जेएसडब्ल्यू इंफ्रा अब लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी बड़े दांव खेल रही है. कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030 तक इस बिजनेस से 80 अरब रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है. इसके लिए कंपनी ने नवकार (Navkar) का अधिग्रहण किया है और अब कई रेल लॉजिस्टिक्स कंपनियों को भी अपने साथ जोड़ने जा रही है.
कंपनी की योजना है कि वित्त वर्ष 2027 तक उसके पास रेल बेड़े में 45 वैगन (Rakes) हों, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 110 तक ले जाने का लक्ष्य है. लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इस आक्रामक विस्तार के लिए कंपनी ने वित्त वर्ष 2030 तक 90 अरब रुपये के निवेश का प्लान तैयार किया है. इससे न केवल कंपनी का रेवेन्यू बढ़ेगा, बल्कि मुनाफे का मार्जिन भी 25 फीसदी तक पहुंच सकता है.
जेएसडब्ल्यू इंफ्रा की सबसे बड़ी ताकत उसकी भविष्य की योजनाएं हैं. कंपनी अपनी पोर्ट क्षमता को मौजूदा स्तर से दोगुने से भी ज्यादा बढ़ाकर 400mtpa करना चाहती है. इसके लिए कर्नाटक में केनी पोर्ट, ओडिशा में जटाधर पोर्ट और स्लरी पाइपलाइन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
भारत सरकार का 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 2047 तक पोर्ट क्षमता को चार गुना करने का लक्ष्य इस कंपनी के लिए सोने पर सुहागा जैसा है. एक प्रमुख प्राइवेट खिलाड़ी होने के नाते जेएसडब्ल्यू इंफ्रा इस सरकारी विजन का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने की स्थिति में है. कंपनी की स्ट्रैटेजी बहुत साफ है- तटीय पोर्ट्स को मजबूत करो और देश के भीतर के इलाकों को लॉजिस्टिक्स के जरिए उनसे जोड़ दो.