प्राइवेट बैंकों पर भारी पड़े सरकारी बैंक! लोन ग्रोथ और रिटर्न में दिखी मजबूती, जेफरीज ने बताए दो टॉप शेयरों के नाम

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, पीएसयू बैंक लोन ग्रोथ के मामले में प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ रहे हैं. हाउसिंग और ऑटो लोन में इनकी ग्रोथ 14 प्रतिशत है, जबकि प्राइवेट सेक्टर में यह 13 प्रतिशत है. हालांकि, डिपॉजिट पर ज्यादा ब्याज दरें देने के कारण इनके स्प्रेड्स पर दबाव बढ़ा है.
प्राइवेट बैंकों पर भारी पड़े सरकारी बैंक! लोन ग्रोथ और रिटर्न में दिखी मजबूती, जेफरीज ने बताए दो टॉप शेयरों के नाम

इमेज सोर्स - एआई

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इन दिनों कुछ अलग हो रहा है. आमतौर पर प्राइवेट बैंक अपनी तेज रफ्तार और बेहतर मैनेजमेंट के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन जेफरीज की हालिया रिपोर्ट ने इस तस्वीर को थोड़ा बदल दिया है.

सरकारी बैंक यानी पीएसयू बैंक अब लोन बांटने की दौड़ में प्राइवेट बैंकों से आगे निकल गए हैं. सरकारी बैंकों ने 14 प्रतिशत की ग्रोथ दिखाई है, जबकि प्राइवेट बैंकों का आंकड़ा 13 प्रतिशत के आसपास रहा है.

लोन ग्रोथ में सरकारी बैंकों का दम

Add Zee Business as a Preferred Source

सरकारी बैंकों की इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा हाथ हाउसिंग और ऑटो लोन का है. जब भी आम आदमी घर या गाड़ी खरीदने की सोचता है, तो सरकारी बैंकों की पहुंच और उनके भरोसे को प्राथमिकता दी जाती है. यही कारण है कि इन सेक्टर्स में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन प्राइवेट प्लेयर्स की तुलना में बेहतर रहा है.

jefferies psu bank Stocks

यह ग्रोथ किसी चमत्कार से नहीं आई है. सरकारी बैंकों के पास सरप्लस लिक्विडिटी थी, जिसका उन्होंने सही इस्तेमाल किया. हालांकि, इसके साथ एक चुनौती भी जुड़ी है. इन बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट यानी टीडी पर ग्राहकों को ज्यादा ब्याज दरें दी हैं. नतीजा यह रहा कि प्राइवेट बैंकों की तुलना में इनके स्प्रेड्स यानी कमाई के मार्जिन पर थोड़ा ज्यादा दबाव देखने को मिला है.

कुल लोन ग्रोथ14 प्रतिशत13 प्रतिशत
ग्रोथ का मुख्य आधारहाउसिंग और ऑटो लोन-

क्या आरओए में सुधार की उम्मीद है

बैंक की कमाई का एक बड़ा पैमाना उसका रिटर्न ऑन एसेट्स यानी आरओए होता है. जेफरीज का मानना है कि पीएसयू बैंकों के लिए एक सुनहरा मौका है. अगर बैंक अपनी लोन ग्रोथ को थोड़ा नियंत्रित करें और डिपॉजिट कॉस्ट को बेहतर ढंग से मैनेज करें, तो उनके आरओए में तेजी आ सकती है.

जब किसी बैंक का आरओए सुधरता है, तो बाजार में उसके शेयरों को फिर से नई रेटिंग मिलती है, जिसे हम रीरेटिंग कहते हैं. चूंकि आरओए और प्राइस टू बुक यानी पीबी के बीच सीधा रिश्ता है, इसलिए उम्मीद है कि आने वाले समय में इन बैंकों के वैल्यूएशन में भी सुधार देखने को मिलेगा.

एसबीआई और पीएनबी क्यों हैं खास

जेफरीज की नजर में सभी सरकारी बैंक एक जैसे नहीं हैं. रिपोर्ट में भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई को टॉप पिक्स में रखा गया है. वहीं पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी को 'बाय' रेटिंग दी गई है. इन बैंकों की मजबूत स्थिति और बाजार में उनकी बढ़ती पैठ उन्हें निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प बनाती है.

निवेशकों के काम की बात

पीएसयू बैंकों ने साबित कर दिया है कि वे बदलते समय के साथ खुद को ढाल रहे हैं. लोन ग्रोथ में प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ना यह दिखाता है कि इन बैंकों की रणनीति सही दिशा में है. हालांकि डिपॉजिट कॉस्ट और स्प्रेड्स पर दबाव अभी भी एक चुनौती है, लेकिन बेहतर मैनेजमेंट से इसे पार किया जा सकता है. एसबीआई और पीएनबी जैसे बड़े नामों का प्रदर्शन आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर के रुख को और साफ करेगा.

(डिस्‍क्‍लेमर: यहां स्‍टॉक्‍स में निवेश की सलाह ब्रोकरेज हाउस द्वारा दी गई है. ये जी बिजनेस के विचार नहीं हैं. निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें.)

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6