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अगर आपने 1993 में खरीदा होता- आज करोड़पति स्टेटस होता. (फोटो: प्रतीकात्मक-AI)
1993 में ₹1 लाख का फैसला… और 3 दशक की कहानी
जून 1993. एक नई आईटी कंपनी भारतीय बाजार में लिस्ट होती है. IPO प्राइस ₹95. लिस्टिंग ₹145 पर. नाम- Infosys.
तब ये रकम किसी मिडिल-क्लास परिवार की कई साल की बचत होती थी.
अगर वही ₹1 लाख अगर Infosys में लगा दिए होते- तो आपका पोर्टफोलियो सिर्फ बढ़ा नहीं होता…
वो लगभग 9 करोड़ रुपये पार कर चुका होता.
मतलब?
₹1 लाख…
आज शायद किसी की पूरी जिंदगी की फाइनेंशियल फ्रीडम बन चुका होता.
ये कहानी सिर्फ शेयर प्राइस की नहीं है.
ये कहानी है:
अब सवाल ये है- इतिहास बन चुका, लेकिन क्या भविष्य भी बनेगा?
क्या ₹1347 पर Infosys अभी भी वेल्थ बना सकता है? या अब कहानी बदल चुकी है?
आज 16 फरवरी 2026 को शेयर करीब ₹1347 के आसपास है. बीच में 5 बोनस. 50 डिविडेंड. कोई स्टॉक स्प्लिट नहीं. और एक टेक दिग्गज की कहानी.
आइए पूरी हिस्ट्री, रिटर्न, डिविडेंड, बोनस, बिजनेस और अब आगे क्या करें- सब कुछ एक जगह समझते हैं.
सबसे बड़ा सवाल: क्या Infosys अभी भी लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएटर है, या 30 साल का गोल्डन पीरियड खत्म हो चुका है?

यानी पहले दिन ही 52% प्रीमियम.
मान लेते हैं आपने 1993 में ₹1 लाख Infosys में लगाए होते तो आज कितने बनते?
Step 1: IPO/लिस्टिंग पर कितने शेयर मिलते?
Step 2: बोनस के बाद शेयर कितने हो गए?
Infosys ने 5 बार बोनस दिए:
| साल | बोनस रेश्यो | शेयर कैसे बढ़े |
| 2004 | 3:1 | 4 गुना |
| 2006 | 1:1 | 2 गुना |
| 2014 | 1:1 | 2 गुना |
| 2015 | 1:1 | 2 गुना |
| 2018 | 1:1 | 2 गुना |
अब क्रम से कैलकुलेशन:
शुरुआत: 1052 शेयर
2004 (3:1)
1052 × 4 = 4208
2006 (1:1)
4208 × 2 = 8416
2014 (1:1)
8416 × 2 = 16832
2015 (1:1)
16832 × 2 = 33664
2018 (1:1)
33664 × 2 = 67328 शेयर
Step 3: आज की वैल्यू (₹1347 पर)
67328 × ₹1347 = ₹9,06,50,000 (लगभग 9.06 करोड़ रुपये)
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Infosys ने 2002 से अब तक 50 डिविडेंड दिए हैं. पिछले 12 महीनों में ₹45 प्रति शेयर डिविडेंड.
अगर औसत मान लें कि वर्षों में ₹400-500 प्रति शेयर cumulative dividend मिला होगा (conservative estimate), तो:
67328 × ₹40= ₹2.69 करोड़ (मोटा अनुमान, सटीक ऐतिहासिक कैलकुलेशन अलग होगा)
यानी:
₹1 लाख → लगभग ₹11–12 करोड़ का वेल्थ इफेक्ट (लॉन्ग टर्म)
Infosys ने 2002 से 50 बार डिविडेंड दिया है.
पिछले 12 महीनों में ₹45 प्रति शेयर.
अगर आपने 3360 शेयर होल्ड किए:
और 20 साल का डिविडेंड जोड़ें तो कुल रकम कई लाख से ऊपर.
मतलब सिर्फ शेयर प्राइस नहीं, कैश फ्लो भी शानदार.
CAGR कितना बना?
30 साल तक 28% कंपाउंडिंग- यही मेगा-वेल्थ क्रिएशन है.
अगर ₹1 लाख FD में लगाते
Gold (12% औसत मानकर)
Infosys
अंतर समझिए-
नहीं.
साल 2000 के बाद से कोई फेस वैल्यू स्प्लिट नहीं.

आज की गिरावट सामान्य सेक्टर कमजोरी नहीं, बल्कि एक बड़े ग्लोबल ट्रिगर से जुड़ी है.
मुख्य कारण:
1. Anthropic AI का बड़ा अपडेट
2. Infosys ADR में भारी गिरावट
3. AI Disruption Fear
निवेशकों को डर है:
यानी गिरावट का कारण डॉलर कमजोरी नहीं, बल्कि AI Disruption Narrative है.
रिटर्न चार्ट
| निवेश | वैल्यू आज |
| ₹10,000 (1993) | ₹45 लाख+ |
| ₹1 लाख | ₹4.5 करोड़+ |
| ₹5 लाख | ₹22 करोड़+ |
यह मल्टीबैगर नहीं, मेगा-वेल्थ क्रिएटर है.
ये भी जरूर पढ़ें: Q3 नतीजों के बाद उड़ान भरने को तैयार ये IT स्टॉक, ₹1750 तक जा सकता है भाव, 52 वीक हाई से काफी नीचे शेयर
हालिया ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार:
| ब्रोकरेज | टारगेट (₹) | रेटिंग |
| Geojit BNP Paribas | 1861 | Buy |
| Axis Direct | 1820 | Buy |
| Anand Rathi | 1884 | Buy |
| ICICI Direct | 1710 | Hold |
| IDBI Capital | 1714 | Hold |
| Consensus Target | 1820 | Buy Bias |
औसत अपसाइड: 30-38% (LTP 1346 पर)
AI Risk
Long Term Growth
Infosys जैसी कंपनियां AI से खतरे में भी हैं और AI से कमाई भी करेंगी.
अगर पहले से होल्ड कर रहे हैं:
अगर नई एंट्री सोच रहे हैं:
लॉन्ग टर्म निवेशक:
AI खतरा नहीं, बिजनेस मॉडल का अगला चरण हो सकता है.
Short Term
Medium Term
Long Term
₹95 से ₹1347 तक की यात्रा सिर्फ प्राइस ग्रोथ नहीं… यह भारत की IT क्रांति की कहानी है. अगर आपने 1993 में खरीदा होता- आज करोड़पति स्टेटस होता. अब सवाल है- क्या 2026 से 2046 तक का सफर भी ऐसा होगा? निर्णय आपका.
FAQs
Q1. क्या Infosys सच में मेगा वेल्थ क्रिएटर रहा है?
हां, 1993 में निवेश कर होल्ड करने वाले निवेशकों ने बोनस + डिविडेंड के दम पर करोड़ों का रिटर्न बनाया है.
Q2. सिर्फ शेयर प्राइस देखना सही है?
नहीं, असली रिटर्न = प्राइस ग्रोथ + बोनस शेयर + डिविडेंड.
Q3. क्या Infosys का स्टॉक स्प्लिट हुआ है?
नहीं, कंपनी ने स्प्लिट नहीं किया, लेकिन कई बार बोनस शेयर दिए हैं.
Q4. अभी शेयर गिरा क्यों?
IT सेक्टर में दबाव, Anthropic AI के नए टूल्स से चिंता, US बजट स्लोडाउन, डॉलर मूवमेंट और प्रॉफिट बुकिंग असर डाल रहे हैं.
Q5. अब निवेश करें या रुकें?
लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध खरीदारी पर विचार कर सकते हैं, शॉर्ट टर्म में वोलाटिलिटी बनी रह सकती है.