&format=webp&quality=medium)
IndusInd Bank Share Price: लगातार गिरने के बाद IndusInd Bank के शेयरों में सोमवार को शुरुआती कारोबार में 5.2% तक की तेजी आई. शेयर का भाव इंट्राडे में ₹707 प्रति शेयर तक पहुंच गया. यह तेजी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आश्वासन के बाद आई है, जिसमें सेंट्रल बैंक ने बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर राहत भरा बयान दिया है और निवेशकों को कोई चिंता न करने की सलाह दी है,
हाल ही में IndusInd Bank से जुड़े कुछ घटनाक्रमों और अफवाहों को लेकर बाजार में चिंता का माहौल था. लेकिन RBI ने अपने बयान में यह स्पष्ट कर दिया कि बैंक की पूंजी पर्याप्त है और इसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक बनी हुई है. RBI ने कहा कि डिपॉजिटर्स को किसी भी अफवाह या अटकलों पर प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है. बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 16.46%, प्रोविजन कवरेज रेशियो 70.20% और 9 मार्च 2025 तक लिक्विडिटी कवरेज रेशियो 113% था, जो नियामक आवश्यकता 100% से अधिक है.
इसके अलावा, बैंक ने पहले ही एक बाहरी ऑडिट टीम नियुक्त कर दी है जो मौजूदा सिस्टम की जांच कर रही है और संभावित प्रभाव का आकलन कर रही है. RBI ने बैंक के बोर्ड और प्रबंधन को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जो मौजूदा तिमाही (Q4FY25) में पूरे किए जाएंगे.
हालांकि सोमवार को शेयर में तेजी आई, लेकिन पिछले कुछ समय में इसमें भारी गिरावट देखी गई है. पिछले 5 दिनों में शेयर 27%, पिछले 1 महीने में 36% और YTD (साल की शुरुआत से अब तक) 31% गिरा था.
IndusInd Bank के तिमाही नतीजे (Q3FY25) के मुताबिक इसका लोन बुक ₹3,66,889 करोड़, डिपॉजिट ₹4,09,438 करोड़, नेटवर्थ ₹65,102 करोड़, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹5,228 करोड़, नेट प्रॉफिट ₹1,402 करोड़, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 3.93% और नेट NPA 0.68% पर है. हालांकि, डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक पर कुछ वित्तीय दबाव पड़ सकता है. RBI के मास्टर डायरेक्शन 2023 के लागू होने के बाद, बैंक के डेरिवेटिव निवेशों की समीक्षा की गई थी, जिसमें कुछ खामियां मिली थीं. बैंक ने स्वीकार किया कि दिसंबर 2024 तक इसकी नेटवर्थ पर 2.35% का नकारात्मक असर पड़ सकता है. यह गड़बड़ी पांच से सात साल पहले हुए डेरिवेटिव ट्रेड्स से जुड़ी हुई है.
अनुमान है कि IndusInd Bank की ₹65,000 करोड़ की नेटवर्थ पर लगभग ₹1,500 करोड़ का नुकसान हो सकता है. इसका असर Q4FY25 के बाद के टैक्स प्रॉफिट्स पर भी पड़ सकता है. इसके अलावा, बैंक की माइक्रोफाइनेंस (MFI) बुक में पहले से ही स्लिपेज की समस्या बनी हुई है. यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि CET1 रेश्यो पर 0.35% का असर हो सकता है.