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Indigo Share Price: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo में चालू संकट और गहरा हो गया है. बीते एक हफ्ते से फ्लाइट रद्द होने की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं और इसका असर पूरे एविएशन सेक्टर और यात्रियों पर भारी पड़ा है. पिछले सात दिनों में Indigo ने 4,500 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल की हैं, जिससे हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए और यात्रा योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं. चूंकि IndiGo घरेलू बाजार में लगभग 60 प्रतिशत मार्केट शेयर रखती है, इसलिए ये मास कैंसिलेशन इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं.
आज इंडिगो का शेयर 9% गिरकर 4842 रुपये के इंट्राडे लो पर चला गया था.
विमानन मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच जारी है. उन्होंने कहा कि कड़ी कार्रवाई इंडस्ट्री में अनुशासन का उदाहरण बनेगी.
UBS ने शेयर पर Buy की रेटिंग बरकरार रखी है. टारगेट प्राइस को घटाकर 6,350 पर किया है. UBS का मानना है कि नए FDTL नियमों की तैयारी में कमी और क्रू आवंटन की दिक्कतों की वजह से यह संकट गहरा हुआ. कंपनी के FY26–FY28 के लिए लागत अनुमान बढ़ाए गए हैं, क्योंकि अधिक पायलट और स्टाफ की जरूरत पड़ेगी और डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी लागत बढ़ाएगी. हालांकि फर्म का कहना है कि इंटरनेशनल एक्सपैंशन के सहारे लंबे समय में ग्रोथ आउटलुक मजबूत है.
जेफरीज़ ने Buy की रेटिंग को बरकरार रखते हुए 7025 का टारगेट प्राइस दिया है. ब्रोकरेज ने कहा कि FDTL नियमों से पायलट ड्यूटी आवर्स कटे और क्रू की जरूरत बढ़ी, जिससे IndiGo का हाई-यूटिलाइजेशन मॉडल प्रभावित हुआ. यह बदलाव क्षमता विस्तार, टेक्निकल समस्याओं और एयरपोर्ट कंजेशन के साथ मिला, जिससे कैस्केडिंग डिसरप्शन हुआ. कंपनी शेड्यूल फिर से संतुलित कर रही है और मध्य दिसंबर तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है.

हालांकि इंडस्ट्री कंसॉलिडेटेड है, लेकिन IndiGo को शॉर्ट टर्म में लागत बढ़ने, रुपया कमजोरी और संभावित ऑपरेशनल पेनाल्टी जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है. मार्केट की नजर अब DGCA की कार्रवाई, कंपनी की प्रतिक्रिया और दिसंबर के अंत तक स्थिति सामान्य करने की क्षमता पर होगी.