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देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनी Hindustan Unilever (HUL) ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा तोहफा दिया. सरकार द्वारा की गई जीएसटी दर कटौती (GST Rate Cut) का पूरा फायदा कंपनी ने अपने ग्राहकों तक पहुंचाया. इस फैसले के तहत कंपनी के लगभग 40% प्रोडक्ट पोर्टफोलियो पर जीएसटी की दर घटकर 5% हो गई है, जिससे साबुन, डिटर्जेंट और दूसरे घरेलू सामान सस्ते हो गए हैं. लंबी अवधि में यह कदम कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ यानी बिक्री की संख्या बढ़ाने में मददगार साबित होगा.
इस फैसले के बाद से अब ब्रोकरेज कंपनियों ने अपनी राय इस शेयर पर दी है. ग्लोबल ब्रोकरेज कंपनी जैसे मॉर्गन स्टेनली, बैंक ऑफ अमेरिका और जेफरीज ने अपनी कमेंट्री दी है. तीनों कंपनियों ने बताया है कि अब निवेशकों को इस शेयर में क्या करना चाहिए?
Hindustan Unilever का यह कदम ग्राहकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. कंपनी ने जीएसटी कटौती का फायदा या तो उत्पादों की कीमतें घटाकर या फिर उसी दाम में ज्यादा मात्रा (ग्रामेज बढ़ाकर) देकर ग्राहकों तक पहुंचाया है. इससे महंगाई के दौर में लोगों को रोजमर्रा के सामान पर कुछ बचत करने में मदद मिलेगी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतें कम होने से मांग बढ़ेगी और कंपनी को लंबी अवधि में अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी.
इस वजह से दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में HUL की कंसोलिडेटेड बिजनेस ग्रोथ या तो फ्लैट (यानी स्थिर) रह सकती है या फिर बहुत मामूली (लो सिंगल डिजिट) बढ़ सकती है, जो बाजार के अनुमानों से काफी कम है. कंपनी ने खुद यह अंदेशा जताया है. माना जा रहा है कि अक्टूबर के महीने में भी बिक्री पर इसका असर जारी रह सकता है और नवंबर से जब कीमतें पूरी तरह स्थिर हो जाएंगी, तब बिक्री में सुधार की उम्मीद की जा सकती है.
HUL के इस फैसले और उसके बाद बने कारोबारी माहौल को देखते हुए, बड़े-बड़े ब्रोकरेज हाउस ने अपनी रिपोर्ट जारी की है. कुछ ब्रोकरेज लंबी अवधि को लेकर पॉजिटिव हैं, तो कुछ ने सतर्क रहने की सलाह दी है.
ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने HUL के शेयर पर अपनी 'बाय' (Buy) यानी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है. Jefferies का मानना है कि जीएसटी कटौती का यह असर सिर्फ HUL पर ही नहीं, बल्कि दूसरी तिमाही में सभी एफएमसीजी कंपनियों पर देखने को मिलेगा. यह एक अस्थायी समस्या है. ब्रोकरेज का कहना है कि मध्यम अवधि में कीमतें घटने से मांग बढ़ेगी और वॉल्यूम ग्रोथ को सहारा मिलेगा.
Jefferies को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे काफी बेहतर होंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया है कि इस बदलाव का निगेटिव असर क्विक कॉमर्स (Quick commerce) कंपनियों पर भी पड़ सकता है. Jefferies ने HUL के शेयर के लिए ₹3000 का टारगेट प्राइस तय किया है.
Bank of America (BofA) ने शेयर पर अपनी 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग को बनाए रखा है. BofA का मानना है कि जीएसटी ट्रांजिशन का असर छोटी अवधि में रहेगा, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिलेगी. ब्रोकरेज ने इस तिमाही को "अनएक्साइटिंग" यानी फीका बताया है.
BofA की नजर अब कंपनी की कमेंट्री पर है. HUL अपनी दूसरी तिमाही के नतीजे 23 अक्टूबर को जारी करेगी, और उसी दिन कंपनी का मैनेजमेंट भविष्य को लेकर क्या कहता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा. BofA ने शेयर के लिए ₹2840 का टारगेट प्राइस दिया है.
ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने HUL पर 'इक्वल-वेट' (Equal-weight) की रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹2335 तय किया है. Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दूसरी तिमाही में कंपनी की ग्रोथ बाजार के अनुमान से कम रहने की आशंका है. हालांकि, ब्रोकरेज ने HUL के एक कदम की तारीफ की है. कंपनी ने पहली बार तिमाही खत्म होने के बाद एक अपडेट जारी किया है, जो एक मार्केट लीडर के तौर पर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अच्छा बदलाव है.
A1. HUL ने अपने लगभग 40% उत्पादों पर जीएसटी कटौती का लाभ कीमतों को कम करके या उसी कीमत पर अधिक उत्पाद देकर ग्राहकों तक पहुंचाया है.
A2. तत्काल असर यह है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए नए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं, जिससे कंपनी की दूसरी तिमाही (Q2) की बिक्री ग्रोथ धीमी रहने की आशंका है.
A3. Jefferies ने HUL के शेयर पर खरीदारी (Buy) की रेटिंग बरकरार रखी है और लंबी अवधि को देखते हुए ₹3000 का टारगेट प्राइस दिया है.
A4. "चैनल डिस्टॉकिंग" के कारण असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि विक्रेता नई, कम कीमतों पर ऑर्डर देने से पहले अपने मौजूदा स्टॉक को पुरानी कीमतों पर बेच रहे हैं.
A5. Hindustan Unilever (HUL) 23 अक्टूबर को अपनी दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगी, जिसमें कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी.
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